अब कुत्ता भी भगायेंगे शिक्षक, राजस्थान शिक्षा विभाग के आदेश पर शिक्षकों में भारी आक्रोश: प्रभारी शिक्षकों को आवारा कुत्तों की निगरानी का आदेश।
राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी एक आदेश ने बड़े विवाद को जन्म दिया है जिसमें सरकारी स्कूलों के प्रभारी शिक्षकों तथा प्रधानाचार्यों को
राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी एक आदेश ने बड़े विवाद को जन्म दिया है जिसमें सरकारी स्कूलों के प्रभारी शिक्षकों तथा प्रधानाचार्यों को स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों की निगरानी करने, उनकी गतिविधियों पर नजर रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पकड़वाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है जिसमें सार्वजनिक संस्थानों जैसे स्कूलों, अस्पतालों तथा अन्य स्थानों पर आवारा कुत्तों की उपस्थिति को खतरा बताया गया है तथा उन्हें हटाने या नियंत्रित करने के उपाय करने को कहा गया है। आदेश में शिक्षकों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा कुत्तों के काटने की स्थिति में तत्काल इलाज तथा रेबीज इंजेक्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है जिससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ गई है।
शिक्षक संगठनों ने इस आदेश को शिक्षकों की गरिमा के खिलाफ तथा गैर-शैक्षणिक कार्य बताया है। उनका कहना है कि राज्य में पहले से ही भारी शिक्षक कमी है तथा शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी, जनगणना, सर्वे तथा अन्य कई गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है। अब आवारा कुत्तों की निगरानी तथा पकड़ने जैसी जिम्मेदारी सौंपने से बच्चों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। संगठनों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है तथा कहा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 तथा जनवरी 2026 के फैसलों के बाद तेज हुआ है जिसमें कोर्ट ने आवारा कुत्तों की उपस्थिति को सार्वजनिक संस्थानों में खतरा बताया तथा राजस्थान सहित अन्य राज्यों में हाईवे तथा स्कूलों से उन्हें हटाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि कुत्तों का मूड अनिश्चित होता है तथा वे किसी भी समय काट सकते हैं जिससे दुर्घटनाएं तथा रेबीज जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। राजस्थान सरकार ने देश में सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए जिसमें कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी करने तथा वापस छोड़ने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया लेकिन स्कूलों में निगरानी की जिम्मेदारी शिक्षकों पर डालने से विरोध बढ़ा।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि कुत्ते काटने की घटना होती है तो स्कूल प्रशासन जिम्मेदार होगा तथा बच्चे को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने तथा रेबीज इंजेक्शन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी होगी। शिक्षकों ने इसे अतिरिक्त बोझ बताया तथा कहा कि कुत्तों को पकड़ना तथा नियंत्रित करना नगर निकायों, पशुपालन विभाग या प्रशिक्षित टीमों का कार्य है न कि शिक्षकों का। कई जिलों जैसे कोटा में कॉलेज स्तर पर भी प्रोफेसरों को नोडल अधिकारी बनाया गया है जहां वे परिसर में कुत्ते दिखने पर जिम्मेदार होंगे।
अभिभावक भी इस फैसले से चिंतित हैं तथा शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षक पहले से ही परीक्षाओं, सिलेबस पूरा करने तथा अन्य कार्यों में व्यस्त हैं तथा ऐसी जिम्मेदारियां पढ़ाई से ध्यान भटकाएंगी। शिक्षक संगठनों ने कहा कि राज्य में शिक्षक कमी के कारण पहले ही कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं तथा अब कुत्तों की निगरानी से स्थिति और खराब होगी।
वर्तमान में विवाद बढ़ता जा रहा है तथा शिक्षा विभाग पर दबाव है कि आदेश वापस लिया जाए। राजस्थान सरकार ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए पशुपालन तथा स्थानीय निकायों को निर्देश दिए हैं लेकिन स्कूलों में नोडल अधिकारी के रूप में शिक्षकों की नियुक्ति ने स्थिति को जटिल बना दिया है। अब देखना होगा कि विरोध के बीच विभाग इस आदेश पर कितना अडिग रहता है या संशोधन करता है।
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