Lucknow : रेरा की 198वीं अथॉरिटी बैठक में 3 परियोजनाओं पर 5-5 लाख की शास्ति अधिरोपित की गई
रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी योजना क्षेत्र में स्थित ऐसी रियल एस्टेट परियोजना, जिसका क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से अधिक हो या जिसमें 8 से अधिक फ्लैट या अपार्ट
अपंजीकृत परियोजनाओं के प्रचार पर रेरा की सख्ती, पिछले छह महीने में 13 परियोजनाओं पर लगाई गई 63 लाख की शास्ति
लखनऊ / गौतमबुद्ध नगर : उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने अपंजीकृत आवासीय परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए एस्टेट 105, सोभा रिवाना और अविकल्प एस्टेट परियोजनाओं पर 5-5 लाख रुपये की शास्ति अधिरोपित की है। यह निर्णय रेरा की 198वीं अथॉरिटी बैठक में लिया गया। यह कार्रवाई भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा-3 के उल्लंघन के मामलों में की गई है।
रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, किसी भी योजना क्षेत्र में स्थित ऐसी रियल एस्टेट परियोजना, जिसका क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर से अधिक हो या जिसमें 8 से अधिक फ्लैट या अपार्टमेंट शामिल हों, उसका विज्ञापन, विपणन, बुकिंग या बिक्री शुरू करने से पहले रेरा में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के किसी भी माध्यम चाहे वह वेबसाइट, सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म हो पर परियोजना का प्रचार-प्रसार करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।
प्राधिकरण द्वारा की गई जांच में पाया गया कि एम/एस मैक्स एस्टेट की नोएडा स्थित परियोजना ‘एस्टेट 105’ तथा एम/एस सोभा लिमिटेड की नोएडा स्थित परियोजना ‘सोभा रिवाना’ का प्रचार-प्रसार बिना रेरा पंजीकरण के वेबसाइट के माध्यम से किया जा रहा था। यह स्पष्ट रूप से अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। वहीं, एम/एस धनुषकोठी बिल्डर एवं डेवलपर की लखनऊ स्थित परियोजना ‘अविकल्प एस्टेट’ में बिना पंजीकरण के बिक्री किए जाने का मामला सामने आया, जो गंभीर उल्लंघन माना गया।
इन मामलों में रेरा द्वारा संबंधित प्रमोटरों को पूर्व में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था, किन्तु प्रस्तुत किए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके पश्चात प्राधिकरण ने भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा-59 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए तीनों परियोजनाओं पर 5-5 लाख रुपये का आर्थिक दंड अधिरोपित किया।
उल्लेखनीय है कि अधिनियम की धारा-59 के अनुसार, यदि कोई प्रमोटर धारा-3 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उस पर परियोजना की अनुमानित लागत का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि उल्लंघन जारी रहता है या प्राधिकरण के आदेशों का अनुपालन नहीं किया जाता, तो संबंधित प्रमोटर के विरुद्ध तीन वर्ष तक के कारावास अथवा अतिरिक्त आर्थिक दंड का प्रावधान भी किया गया है।
रेरा की यह कार्रवाई रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा घर खरीदारों के हितों की रक्षा के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि बिना पंजीकरण के परियोजनाओं का प्रचार-प्रसार या बिक्री करने वाले प्रमोटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।
पिछले छह महीनों में प्राधिकरण द्वारा अपंजीकृत परियोजनाओं के विरुद्ध लगातार कार्रवाई करते हुए कुल 13 परियोजनाओं पर 63 लाख रुपये की शास्ति अधिरोपित की जा चुकी है। जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित परियोजनाएं शामिल हैं—
एम/एस एसआरएसडी बिल्डकॉन वेंचर एलएलपी (SRSD Buildcon Venture LLP), गाजियाबाद की ‘फारेस्ट वॉक फेस-2 (Forest Walk Phase-2)’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
एम/एस परदोस डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (Pardos Developers Pvt Ltd), लखनऊ की ‘सुकून बाय परदोस ओकस (Sukoon by Pardos Okas)’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
एम/एस एलडिको होम्स डेवलपर लिमिटेड की नोएडा स्थित ‘Eldeco 7 Peak Residencies’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
एम/एस पूजा इन्फोटेक प्रा. लि. की नोएडा स्थित ‘Jain X Cyber City’ परियोजना पर 4 लाख रुपये
एम/एस ओम बिल्डकॉन की मथुरा स्थित ‘Shri Vrinda Orchids’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
एल्डेको हाउसिंग एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड की लखनऊ स्थित ‘Eldeco Solano Gardens’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
एम/एस विकास विहार डेवलपर्स एंड कंस्ट्रक्शन की लखनऊ स्थित ‘Vikas Vihar Officers Enclave’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
एम/एस इम्पैक्टम लैंड प्रा. लि. की मथुरा स्थित ‘The Rass’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
एम/एस जॉन बिजनेस कंसल्टेंट्स प्रा. लि. की लखनऊ स्थित ‘HIM Golden City’ परियोजना पर 4 लाख रुपये
एम/एस सफरान डेवलपर्स प्रा. लि. की लखनऊ स्थित ‘Sanfran Estate Anandam Villas’ परियोजना पर 5 लाख रुपये
अध्यक्ष का वक्तव्य
रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि प्राधिकरण रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण के किसी भी परियोजना का प्रचार-प्रसार या बिक्री करना अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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