Prayagraj : प्रयागराज, आगरा और कानपुर में उपचारित जल के पुनः उपयोग से जल प्रबंधन में बड़ा बदलाव
आगरा भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। यहां करीब 286 MLD सीवेज उत्पन्न होता है और उपचार क्षमता 221 MLD से बढ़ाकर लगभग 398 MLD की जा रही है। धांधूपुरा, जगनपुर
प्रयागराज उपचारित जल के पुनः उपयोग का बड़ा उदाहरण बन रहा है। यहां लगभग 340 MLD क्षमता के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चल रहे हैं, लेकिन अब तक उपचारित जल का दोबारा इस्तेमाल सीमित था। अब नैनी, राजापुर और कोडरा STP से उद्योगों और रेलवे को पानी देने की योजनाओं से 126 MLD से ज्यादा ट्रीटेड वॉटर रीयूज की क्षमता विकसित की जा रही है। इससे प्रयागराज पुनर्चक्रित जल पर आधारित शहरी प्रबंधन का मजबूत मॉडल बन सकता है।
आगरा भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। यहां करीब 286 MLD सीवेज उत्पन्न होता है और उपचार क्षमता 221 MLD से बढ़ाकर लगभग 398 MLD की जा रही है। धांधूपुरा, जगनपुर और बिछपुरी STP से रेलवे, मेट्रो कॉरिडोर और कीठम झील के लिए लगभग 28 MLD उपचारित जल के पुनः उपयोग की योजना चल रही है। इससे पता चलता है कि आगरा अब जल संकट का हल नए स्रोतों में नहीं, बल्कि उपलब्ध पानी के दोबारा उपयोग में ढूंढ रहा है।
कानपुर ने उपचारित जल के पुनः उपयोग में एक ठोस मॉडल पेश किया है। नमामि गंगे मिशन के तहत बिनगवां में 30 MLD STP विकसित किया गया है, जो पहला उन्नत हाइब्रिड एन्युटी मॉडल आधारित संयंत्र है और सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर तकनीक पर काम करता है। यह प्लांट जून 2023 से पूरी क्षमता पर चल रहा है और आधुनिक स्वचालित प्रणाली से अपशिष्ट जल का प्रभावी उपचार कर रहा है। उपचारित जल को मानकों के अनुसार पांडु नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे गंगा पर प्रदूषण कम हो रहा है। साथ ही यह जल नीचे की ओर कृषि के लिए भी उपयोगी हो रहा है। आगे बढ़कर पनकी तापीय विद्युत संयंत्र लगभग 40 MLD उपचारित जल का इस्तेमाल कर रहा है।
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