Agra: सुरकुटी दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा बाधित न हो- हाईकोर्ट व शिक्षा महानिदेशक के आदेश तार-तार, जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग।
प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) की एक प्रतिनिधि टीम, जिसमें सपना गुप्ता (अधिकृत समन्वयक–सुरकुटी), पंकज टंडन
आगरा। प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ़ पेरेंट्स अवेयरनेस (PAPA NGO) की एक प्रतिनिधि टीम, जिसमें सपना गुप्ता (अधिकृत समन्वयक–सुरकुटी), पंकज टंडन एवं मीनाक्षी टंडन शामिल थे, आज कीठम स्थित सुरकुटी दृष्टिबाधित विद्यालय के प्रधानाचार्य महेश कुमार एवं विद्यालय के दृष्टिबाधित (दिव्यांग) बच्चों के साथ मंडलायुक्त, आगरा मंडल से मुलाकात हेतु पहुँची।
मंडलायुक्त महोदय ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से सुनते हुए इस विषय में जिलाधिकारी, आगरा से तत्काल भेंट करने का सुझाव दिया और जिलाधिकारी महोदय से टेलीफोनिक वार्ता भी की किन्तु प्रतिनिधिमंडल के जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचने तक जिलाधिकारी महोदय कार्यालय से प्रस्थान कर चुके थे। अब प्रतिनिधिमंडल द्वारा कल जिलाधिकारी से भेंट की जाएगी।
PAPA NGO की समन्वयक सपना गुप्ता का स्पष्ट कहना है कि यह मामला सोसायटी की आपसी लड़ाई में दिव्यांग बच्चों को बेवजह घसीटने का है, इस बेवजह के तनाव से दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य पर असर पड़ रहा है
हाल ही में जारी कुछ विभागीय आदेशों के कारण इन बच्चों की नियमित पढ़ाई बाधित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जो न केवल मानवीय दृष्टि से, बल्कि संवैधानिक और विधिक दृष्टि से भी गंभीर विषय है।
सपना गुप्ता ने यह भी रेखांकित किया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश में संबंधित प्रतिनिधित्व/प्रार्थना-पत्रों पर समयबद्ध निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं, दूसरी तरफ शिक्षा महानिदेशक के मान्यता को लेकर स्पष्ट निर्देश भी हैं ऐसे में, सोसायटी के बीच की लड़ाई में बिना समुचित और निष्पक्ष जांच के, एकतरफा कठोर कार्रवाई से सबसे अधिक नुकसान उन बच्चों को हो रहा है, जो पहले से ही विशेष चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
सपना ने बताया कि PAPA NGO की माँगें स्पष्ट हैं –
1. उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश writ – c 24325/2025 दिनांक 28/7/2025 के अनुक्रम में नई सोसायटी अविलंब बनाई जाए और पुरानी सोसायटी के आदेश तत्काल निरस्त किए जाएं.
2. दृष्टिबाधित बच्चों की शिक्षा पर तत्काल प्रभाव डालने वाले आदेशों पर रोक लगाई जाए।
3. पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और मानवीय दृष्टिकोण से जांच कराई जाए।
4. जांच अवधि में विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों की पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रहने दी जाए।
5. वन विभाग को निर्देशित किया जाए कि सूरकुटी में गिरासू भवन की मरम्मत के लिए भवन निर्माण सामग्री को अंदर ले जाने की इजाज़त प्रदान करें.
6. सुरकुटी में आने वाले समस्त वाहन आदि को टिकट से मुक्त किया जाए एवं एक बेरियर सुरकुटी के तिराहे पर आगे की ओर लगाया जाए ताकि जो कीठम जाना चाहता है उससे शुल्क आदि लिया जा सके.
7. किसी भी प्रशासनिक निर्णय में दिव्यांग बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखा जाए।
संस्था के राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन ने कहा कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, समाधान है। यदि समय रहते प्रशासन द्वारा संतुलित हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो बच्चों के भविष्य की क्षति के लिए व्यवस्था स्वयं उत्तरदायी होगी, हमें मजबूरन इन दिव्यांग बच्चों के हित में सड़क पर आंदोलन की भूमिका बनानी पड़ेगी जिसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की ही मानी जाएगी।
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