Hardoi: राष्ट्रीय लोक अदालत में 3,06,501 मामलों का निस्तारण, 16.48 करोड़ रुपये का हुआ समझौता।
जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण करते हुए कुल
हरदोई: जिला न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण करते हुए कुल 3,06,501 मामलों का समाधान किया गया। इस दौरान विभिन्न मामलों में 16,48,44,434 रुपये की समझौता धनराशि भी निर्धारित की गई।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरदोई काव्या सिंह ने बताया कि जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रीता कौशिक द्वारा प्रातः 10:30 बजे राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय महेन्द्र नाथ, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण विशम्भर प्रसाद, अपर जिला जज मनमोहन सिंह, कुसुम लता, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत एवं अपर जिला जज यशपाल, बार एसोसिएशन अध्यक्ष जय प्रकाश त्रिवेदी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल, बैंक अधिकारी तथा समस्त न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, विभिन्न बैंकों और बीमा कंपनियों के अधिकारियों ने भाग लेकर वादों का निस्तारण कराया। विभिन्न न्यायालयों द्वारा 4,546 वादों का निस्तारण किया गया।
लोक अदालत में उत्तराधिकार प्रकृति के 10, मोटर दुर्घटना प्रतिकर के 257, पारिवारिक मामलों के 48, स्थायी लोक अदालत के 6, फौजदारी के 4,190 तथा अन्य प्रकृति के 160 वादों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन द्वारा 6,751 वादों का निस्तारण आपसी सुलह-समझौते और अभिस्वीकृति के आधार पर किया गया।
मोटर दुर्घटना वादों में पीड़ित पक्षकारों को 4,17,35,000 रुपये की प्रतिकर धनराशि दिलवाई गई। वहीं ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से जिला प्रशासन के विभागों द्वारा 2,89,771 मामलों का निस्तारण किया गया।
प्राधिकरण सचिव काव्या सिंह ने बताया कि लोक अदालत के आयोजन के दौरान न्यायालय परिसर में बैंकों के कैंप लगाए गए, जिनमें 1,709 बैंक ऋण से संबंधित मामलों का निस्तारण किया गया और कुल 10,99,13,000 रुपये की ऋण धनराशि पर समझौता हुआ। इसके अलावा भारत संचार निगम द्वारा 3 वादों तथा यातायात निरीक्षक द्वारा 3,721 ई-चालानों का निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में समस्त न्यायिक अधिकारियों, बैंक-बीमा कंपनियों, जिला प्रशासन और अधिवक्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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