राजस्थान के सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल की अनोखी पहल: टॉपर छात्राओं को अपनी जेब से कराई हेलिकॉप्टर सैर
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के केराप गांव स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में एक प्रेरणादायक घटना ने शिक्षा के क्षेत्र में नई
- डीडवाना-कुचामन के केराप गांव में तीन छात्राओं का सपना सच: मजाक भरी इच्छा बनी वास्तविकता
- शिक्षा को नई ऊंचाई: प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने छात्राओं को आसमान की सैर देकर प्रेरित किया
राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के केराप गांव स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में एक प्रेरणादायक घटना ने शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने अपने स्कूल की तीन होनहार छात्राओं रंजना नायक, ज्योति मेघवाल और खुशी मेघवाल को उनके सपने पूरे करने के लिए हेलिकॉप्टर की सैर करवाई। यह सब तब हुआ जब स्कूल में आयोजित एक टेस्ट में ये तीनों छात्राएं प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं। प्रिंसिपल ने पुरस्कार के रूप में उनकी इच्छा पूछी तो छात्राओं ने मजाक में कहा कि उन्हें हेलिकॉप्टर में बैठना है। प्रिंसिपल ने इस मजाक को गंभीरता से लिया और अपनी जेब से खर्च करके 13 मार्च 2026 को हेलिकॉप्टर बुक कर लिया। छात्राएं पहली बार हेलिकॉप्टर में सवार हुईं और आसमान की सैर का आनंद लिया, जिससे उनकी आंखों में चमक और चेहरे पर गर्व साफ दिखाई दिया। यह घटना इलाके में तेजी से चर्चा का विषय बन गई है, जहां लोग प्रिंसिपल की इस पहल की सराहना कर रहे हैं। स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है और यहां पढ़ने वाली अधिकांश छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं, इसलिए हेलिकॉप्टर जैसी लग्जरी उनके लिए सपने से ज्यादा कुछ नहीं थी। प्रिंसिपल का यह कदम न केवल छात्राओं के लिए बल्कि पूरे स्कूल के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है।
घटना की शुरुआत स्कूल में आयोजित एक आंतरिक टेस्ट से हुई, जहां छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। टेस्ट के परिणाम घोषित होने के बाद प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने टॉप तीन छात्राओं को बुलाया और पूछा कि वे पुरस्कार में क्या चाहती हैं। छात्राओं ने पहले तो झिझक दिखाई लेकिन फिर मजाक में हेलिकॉप्टर सैर की इच्छा जताई। प्रिंसिपल ने इसे चुनौती के रूप में लिया और तय किया कि छात्राओं का यह सपना पूरा होगा। उन्होंने हेलिकॉप्टर सेवा प्रदाता से संपर्क किया और अपनी व्यक्तिगत बचत से खर्च वहन किया। 13 मार्च को हेलिकॉप्टर स्कूल परिसर में उतारा गया, जहां छात्राओं को विशेष सुरक्षा निर्देश दिए गए और फिर वे सवार हुईं। सैर के दौरान छात्राओं ने आसमान से अपने गांव और स्कूल को देखा, जो उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा। उतरने के बाद छात्राओं ने बताया कि यह उनके जीवन का सबसे खुशी का पल था और वे अब और अधिक मेहनत करके बड़े सपने देखेंगी। यह पहल शिक्षा में प्रोत्साहन देने का एक अनोखा तरीका साबित हुई, जहां छात्रों की छोटी-छोटी इच्छाओं को पूरा करके उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाई जा सकती है।
प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका की यह पहल ग्रामीण शिक्षा में एक नया आयाम जोड़ती है। उन्होंने कहा कि छात्राओं को केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि जीवन के अनुभव भी देने चाहिए, ताकि वे बड़े सपने देख सकें। केराप गांव एक छोटा सा ग्रामीण इलाका है, जहां अधिकांश परिवार खेती पर निर्भर हैं और बच्चों के लिए हेलिकॉप्टर जैसी चीजें दूर की कौड़ी होती हैं। प्रिंसिपल ने छात्राओं की मेहनत को सम्मान देने के लिए यह कदम उठाया, जो अन्य शिक्षकों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। इस घटना के बाद स्कूल में छात्रों की उपस्थिति और उत्साह में वृद्धि देखी गई है, क्योंकि वे जानते हैं कि अच्छा प्रदर्शन करने पर उन्हें विशेष पुरस्कार मिल सकता है। प्रिंसिपल ने भविष्य में भी ऐसी पहल जारी रखने की बात कही है, ताकि ग्रामीण बच्चों में आत्मविश्वास बढ़े। यह कदम राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों के अनुरूप है, जहां छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए नवाचार को बढ़ावा दिया जाता है।
छात्राओं का अनुभव
हेलिकॉप्टर से उतरने के बाद रंजना नायक ने कहा कि आसमान से गांव देखना सपने जैसा लगा। ज्योति मेघवाल ने बताया कि अब वे डॉक्टर बनने का सपना और मजबूती से देख रही हैं। खुशी मेघवाल ने प्रिंसिपल को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
इस घटना ने डीडवाना-कुचामन जिले में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाया है। स्थानीय लोग और अभिभावक प्रिंसिपल की इस पहल की तारीफ कर रहे हैं और इसे अन्य स्कूलों में अपनाने की मांग कर रहे हैं। जिले में कई स्कूलों में अब छात्रों के लिए विशेष पुरस्कार योजनाएं शुरू की जा रही हैं, जहां अच्छे प्रदर्शन पर छोटे-छोटे इनाम दिए जा रहे हैं। प्रिंसिपल ढाका ने बताया कि यह उनकी तरफ से छात्राओं को दिया गया व्यक्तिगत योगदान है, जो शिक्षा में निवेश का एक रूप है। हेलिकॉप्टर सैर के बाद छात्राओं की पढ़ाई में और अधिक रुचि बढ़ गई है और वे क्लास में अन्य साथियों को भी प्रेरित कर रही हैं। यह कहानी दिखाती है कि शिक्षक कितने प्रभावशाली हो सकते हैं जब वे छात्रों के सपनों को महत्व देते हैं।
प्रिंसिपल की इस पहल ने सोशल मीडिया पर भी खूब वाहवाही बटोरी है, जहां वीडियो और तस्वीरें तेजी से शेयर हो रही हैं। लोग इसे गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत मिसाल बता रहे हैं। राज्य स्तर पर शिक्षा विभाग ने इस घटना की सराहना की है और अन्य प्रिंसिपलों को छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया है। केराप गांव के लोग अब स्कूल को गर्व से देखते हैं, जहां शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं बल्कि जीवन बदलने वाली घटनाओं से जुड़ी हुई है। छात्राओं के परिवारों ने भी प्रिंसिपल का आभार जताया है और कहा कि उनकी बेटियां अब और अधिक आत्मविश्वासी हो गई हैं।
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