Special Article- बंगाल विधानसभा चुनाव  से पूर्व खेल हुआ प्रारंभ, आखिर कब तक बचाव कर पाएंगी ममता दीदी ?

वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल विधनासभा चुनाव होने निर्धारित हैं। जैसे -जैसे विधानसभा चुनावों का समय निकट आ रहा है, वैसे वैसे राजनीति का पारा भी

Jan 13, 2026 - 16:56
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Special Article- बंगाल विधानसभा चुनाव  से पूर्व खेल हुआ प्रारंभ, आखिर कब तक बचाव कर पाएंगी ममता दीदी ?

लेख - मृत्युंजय दीक्षित  

वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल विधनासभा चुनाव होने निर्धारित हैं। जैसे -जैसे विधानसभा चुनावों का समय निकट आ रहा है, वैसे वैसे राजनीति का पारा भी चढ़ रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए अत्यंत आक्रामक रूप ले  चुकी हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भी इस बार बंगाल में अपनी सरकार बनाने का संकल्प लिया है। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा में कहा था कि,’गंगा नदी का बिहार से ही बंगाल जाती है”, उसी दिन से  बंगाल मे राजनीतिक तपिश अनुभव की जाने लगी थी। भारतीय  जनता पार्टी का कहना है कि जिस प्रकार उसने बिहार से जंगलराज का समापन किया उसी प्रकार वह बंगाल को महाजंगलराज  से मुक्त कराएगी। राह दोनों की ही सरल नहीं है।

ममता दीदी के बंगाल में चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह केवल भाजपा ही नहीं वरन कांग्रेस और वामपंथी दल भी पूरी ताकत से रोकेंगे। एक बड़ी समस्या उनके अपने ही निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर भी हो सकते हैं जिन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से एक मस्जिद की नींव रखकर एक आलग पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का  किया है। मुर्शिदाबाद की घटना में स्मरणीय है कि हुमायूं कबीर के कदमों का ममता दीदी की सरकार ने इसलिए प्रतिवाद नहीं किया कि कहीं उनके मुस्लिम मतदाता  नाराज न हो जाएं। बंगाल की कानून व्यवस्था भी ममता दीदी की राह में रोड़े अटका सकती है। उन पर  मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप भी हैं । संदेशखाली  की वीभत्स घटना के आरोपी को बचाने से लेकर आर जी कार मेडिकल कॉलेज  की क्रूरतम घटना में शामिल तृणमूल समर्थकों बचाने की निंदनीय चुनाव प्रचार के दौरान उठाई जाएंगी । उनकी सरकार अनेक आर्थिक घोटालों में फंसी हुई हैं जिनकी जांच चल रही है । 

मतदाता सूची के शुद्धीकरण के  गहन अभियान ने भी उनके सामने चुनौतियाँ प्रस्तुत की हैं। मतदाता शुद्धीकरण (एसआईआर) अभियान के दौरान ममता बनर्जी ने पूरा दम लगा दिया कि किस न किसी  प्रकार इस कार्य को बाधित किया जाए या रोक दिया जाए। ममता की ओर से एसआईआर को लेकर भ्रम पैदा निंदनीय करने के पूरे प्रयास किए गए। पहले ममता दीदी ने स्वयं एसआईआर फॉर्म नहीं भरने की घोषणा कर दी और बाद में फॉर्म  भर भी दिया। 

आई पैक घोटाले मे प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में ममता जी ने जो किया वो उनके लिए गंभीर समस्या बन सकता है। अब ममता दीदी केंद्रीय एजेंसियों पर हमला बोल रही हैं उधर आई पैक का प्रकरण हाईकोर्ट की  दहलीज से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।अब ममता दीदी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बंगाल बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी पर कोयला घोटाले में शामिल होने का आरोप लगा रही हैं। ममता दीदी कहना है  कि बीजेपी ईडी के सहारे उनकी पार्टी की रणनीति चुराना चाहती है। आई- पैक प्रकरण पर आपा खो बैठी हैं। इस  प्रकरण में ग्रीन फाइल को लेकर वह संकट में हैं। सीधा प्रश्न है कि उन ग्रीन फाइल्स में ऐसा क्या था जिसे पाने के लिए उन्होंने राज्य पुलिस की पूरी ताकत लगा दी। अब ईडी ने उन  फाइल्‍स को तत्काल पाने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगा दी है। न्यायालय में दोनों ही पक्षों  ने अपनी-अपनी याचिकाएं लगा दी हैं । 

आई -पैक प्रकरण की खबर मीडिया जगत में आग की तरह फैली । इसके साथ ही कोलकाता से लेकर नई दिल्ली के राजनैतिक गलियारों हलचल मच गई। संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमने वाले टीवी  चैनलों पर आ गए और कहा जाने लगा कि चुनाव से दो -तीन महीने पहले ही यह छापेमारी क्यों शुरू हो जाती है ? जबकि वास्तविकता यह है कि यह जांच काफी समय से चल रही है । इस घोटाले की जांच रुकवाने के लिए तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने एक याचिका दायर की थी जो खारिज हो चुकी है। ईडी का यह छापा तृणमूल कांग्रेस आईटी सेल के हेड प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर पड़ा था । माना जा रहा है कि उनके रिश्ते चुनावी रणनीतिकार  प्रशांत किशोर से भी हैं । प्रशांत किशोर बिहार में अपनी पार्टी बनाकर चुनाव भी लड़ चुके हैं। वह बंगाल में ममता दीदी के भी प्रमुख रणनीतिकारों में से एक हैं। यही कारण है कि जब ईडी का छापा पड़ा और ममता दीदी की पुलिस ने ईडी के कब्जे से ग्रीन फाइलें अपने कब्जे में लीं  तो लगने लगा कि दाल में कुछ तो काला है, आखिर क्यों उन्हें ग्रीन फाइलों से इतना लगाव है? ममता दीदी  धमकी देते हुए कह रही हैं कि अगर वह बीजेपी के कार्यालय में घुस जाएं  तो क्या होगा? उनका यह भी कहना है कि जब बीजेपी को पता चला कि अबकी बार बीजेपी को पहले की तुलना में भी कम सीटें आ रही हैं  तब उन्होंने उन्होंने हमारी रणनीति चुराने का प्रयास किया। उधर प्रवर्तन निदेशालय ने अब सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप तथा कोयला घोटाले में  ममता दीदी व तृणमूल सरकार को आरोपी बनाने का फैसला कर लिया है। 

ऐसा नहीं है कि ममता दीदी का जांच एजेंसियों  के साथ टकराव पहली बार हुआ हो,  इससे पहले 27 अक्टूबर 2023 को जब राशन घोटाले में तत्कालीन मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को गिरफ्तार किया तब ममता उनके बचाव में उतरी थीं। 11 अगस्त 2022 सीबीआई ने पशु तस्करी में तृणमूल नेता अनुब्रत मंडल को गिरफ्तार किया और वह भी ममता दीदी के करीबी थे। 23 जुलाई 2022 को स्कूल भर्ती घोटाले में ईडी ने शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया। 6 सितबर 2021 को नारद स्टिंग केस में सीबीआई ने तृणमूल नेताओं को गिरफ्तार किया तब ममता ददी ने सीबीआई के कार्यालय के बाहर 6 घंटे धरना दिया। 6 सिंतबर 2021 को ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी से कोयला घोटाले में 9 घंटे तक पूछताछ हो चुकी है। बंगाल के राजनीतिक इतिहास में सबसे बड़ा शारदा चिटफंड  घोटाला हुआ है जिसकी जांच चल रही है और उसके दायरे में ममता दीदी सीधे  फंस  रही हैं। 

ममता दीदी के सामने अब वैसी ही चुनौती आ सकती है जैसी दिल्ली  के पूर्व  मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष आ गई थी।  अगर ममता दीदी को कोर्ट से राहत नहीं मिलती और वह ग्रीन फाइल्स को लेकर  जांच एजेंसियों के साथ टकराव का रास्ता अपनाती हैं तो केंद्र सरकार वहां पर राष्ट्रपति शासन लागू करने पर मजबूर हो सकती है । बंगाल में लंबे समय से कई  अवसरों पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की जा रही है किंतु अभी तक केंद्र सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।  उस समय भी नहीं जब वहां चुनावों के पूर्व, दौरान तथा पश्चात  तृणमूल कांग्रेस के संगठित अपराधियों  द्वारा भीषण हिंसा की गई और भाजपा  व हिंदू संगठनों  के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। अभी आई -पैक प्रकरण के दौरान  मची हलचल के बीच भी भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की कार पर हमला बोला गया। 

आगामी सप्ताह बंगाल  की राजनीति और हलचल भरे होने वाले हैं। अदालतों का निर्णय और उसके बाद होने वाली कार्यवाही  बंगाल विधानसभा चुनावों  की दिशा और दशा तय करने वाले हैं। 

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