Sambhal : शबे-बारात इबादत की रात, स्टंट और आतिशबाज़ी से करें परहेज़: उलेमा की अपील
शबे-बारात को लेकर उलेमाओं ने आम जनता, खासतौर पर नौजवानों से शांति, इबादत और संयम बरतने की अपील की है। मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमलुल उलूम के मौलाना व
Report : उवैस दानिश, सम्भल
शबे-बारात को लेकर उलेमाओं ने आम जनता, खासतौर पर नौजवानों से शांति, इबादत और संयम बरतने की अपील की है। मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमलुल उलूम के मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि शबे-बारात मग़फिरत और निजात की रात है। इस रात अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए, न कि बाइक स्टंट, हुड़दंग और आतिशबाज़ी जैसे काम करने चाहिए, जो इस्लाम में सख़्त मना हैं।
मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि सड़क पर स्टंट करने से न सिर्फ़ हादसों का खतरा बढ़ता है बल्कि कई मासूम जानें भी चली जाती हैं। वहीं आतिशबाज़ी को हराम बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे माल का नुकसान होता है और शहर की हवा भी ज़हरीली होती है, जिससे AQI और बिगड़ता है। उन्होंने बताया कि शबे-बारात के दिन कब्रिस्तान जाना हदीस से साबित है। कब्रिस्तान जाकर क़ुरान-पाक़ और दरूद पढ़कर अपने मरहूमीन के लिए ईसाले सवाब करना चाहिए।
वहीं मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि शबे-बारात इबादत, तौबा और निजात की मुकद्दस रात है। इस रात अल्लाह तआला अपनी रहमतों के साथ दुनिया-ए-आसमान पर नुज़ूल फरमाते हैं और बंदों की दुआएं क़बूल करते हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी रात को इबादत में गुज़ारें, अपनी औलाद के बेहतर मुस्तकबिल, मुल्क की तरक्की, अमन और भाईचारे के लिए दुआ करें। मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने भी साफ़ शब्दों में कहा कि पटाखे और आतिशबाज़ी बिल्कुल न करें, तेज़ बाइक चलाकर या हुड़दंग मचाकर किसी को तकलीफ न दें, ताकि इस्लाम की तालीमात और समाज में भाईचारे का पैग़ाम कायम रहे।
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