अकबरुद्दीन ओवैसी का पीएम मोदी पर तीखा प्रहार: कहा- देश को चौकीदार नहीं, बहादुर सैनिकों की जरूरत, कहा- 'औरंगाबाद' नाम बदलने वालों को मेयर नहीं बनना चाहिए।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने छत्रपति संभाजीनगर में एक चुनावी रैली के दौरान
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने छत्रपति संभाजीनगर में एक चुनावी रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश को चौकीदार नहीं बल्कि बहादुर सैनिकों की जरूरत है। यह बयान प्रधानमंत्री के 'चौकीदार' वाले नारे का संदर्भ देते हुए दिया गया, जिसमें ओवैसी ने मोदी को देश के प्रति प्रेम और चिंता की कमी का आरोप लगाया तथा उन्हें सबसे अक्षम प्रधानमंत्री करार दिया। रैली 11 जनवरी 2026 को आमखास मैदान में हुई, जो आगामी नगर निगम चुनावों के लिए एआईएमआईएम उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित की गई थी।
ओवैसी ने औरंगाबाद का नाम छत्रपति संभाजीनगर करने वालों पर निशाना साधा और कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हार के बाद अब आगामी नगर निगम चुनाव में शहर का मेयर पद उन लोगों को नहीं मिलना चाहिए जिन्होंने शहर का नाम बदला। उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी को हार मिली लेकिन हर वोट की ताकत को समझना चाहिए। नाम बदलने से शहर की समस्याओं जैसे किसान आत्महत्या, बेरोजगारी, पानी की कमी और महिलाओं के खिलाफ अपराध का समाधान नहीं होगा। ओवैसी ने मुसलमानों और पिछड़े वर्गों की एकजुटता पर जोर दिया तथा कहा कि मुसलमान हर क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं और विभिन्न सरकारों ने उनके साथ अन्याय किया है।
रैली में ओवैसी ने मुसलमानों पर होने वाले कथित अन्याय और अत्याचारों का जिक्र किया तथा कहा कि मुसलमानों की लिंचिंग की निंदा की जाती है वैसे ही बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या और फिलिस्तीनियों की हत्या की भी निंदा की जाती है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को एक-दूसरे से दूर नहीं होना चाहिए बल्कि एकजुट होकर अन्याय का विरोध करना चाहिए। ओवैसी ने महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टियों पर आरोप लगाया कि वे विचारधारा छोड़कर केवल सत्ता के लिए काम कर रही हैं और मुसलमान तथा पिछड़े वर्ग दशकों से राष्ट्रीय नेताओं को समर्थन देने के बावजूद सबसे नीचे बने हुए हैं। उन्होंने एआईएमआईएम को मुसलमानों के साथ-साथ दलितों और पिछड़े वर्गों की आवाज उठाने वाला बताया।
ओवैसी ने कहा कि वे खुद को भारतीय और मुसलमान दोनों होने पर गर्व महसूस करते हैं लेकिन मुसलमानों को अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें दयनीय स्थिति में धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराधिकारी सरकारों ने मुसलमानों को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से वंचित रखा है। ओवैसी ने कहा कि एआईएमआईएम पिछड़े वर्गों को साथ लेकर सरकार से उनकी खराब स्थिति के बारे में बात कर रही है। रैली में उन्होंने मुसलमानों को हर क्षेत्र में पिछड़े होने का जिक्र किया तथा एकजुट होने की अपील की।
यह रैली महाराष्ट्र में आगामी महानगरपालिका चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जहां एआईएमआईएम सक्रिय रूप से प्रचार कर रही है। ओवैसी ने शहर की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए वोट की शक्ति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नाम बदलाव से वास्तविक मुद्दों का हल नहीं होता और लोगों को वोट के माध्यम से अपनी ताकत दिखानी चाहिए। ओवैसी का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ उनकी लगातार आलोचना का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने पहले भी विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
रैली के दौरान ओवैसी ने मुसलमानों की स्थिति पर विस्तार से बात की तथा कहा कि देश में मुसलमानों के साथ होने वाले कथित अन्याय को रोकने के लिए एकता जरूरी है। उन्होंने विभिन्न सरकारों द्वारा मुसलमानों की अनदेखी का आरोप लगाया तथा एआईएमआईएम को उनकी आवाज बताया। ओवैसी ने प्रधानमंत्री को अक्षम बताते हुए कहा कि वे देश से प्रेम नहीं करते और चिंता नहीं करते। यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के 'चौकीदार' वाले अभियान का जवाब मानी जा रही है, जहां ओवैसी ने बहादुर सैनिकों की जरूरत बताई।
छत्रपति संभाजीनगर में यह रैली एआईएमआईएम के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा में हार के बाद यहां अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। ओवैसी ने मेयर पद पर नाम बदलने वालों को रोकने की बात कही तथा वोट की ताकत पर बल दिया। उन्होंने मुसलमानों को पिछड़े होने और अन्याय का सामना करने का जिक्र किया तथा एकजुटता की अपील की। ओवैसी का भाषण चुनावी मुद्दों पर केंद्रित रहा तथा प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला गया।
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