Moradabad : मुरादाबाद में कुमार विश्वास ने शंकराचार्य विवाद और भाषा राजनीति पर रखी राय
भाषा विवाद पर बोलते हुए उन्होंने स्टालिन के हिंदी विरोधी बयानों को दुखद बताया। भाषाएं देश की आत्मा होती हैं और उनका काम संवाद, समरसता और एकता बढ़ाना है, न कि टकरा
मुरादाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कवि और विचारक कुमार विश्वास ने शंकराचार्य विवाद और देश में चल रही भाषा राजनीति पर अपनी बात रखी। उन्होंने प्रशासन से संतों और धर्माचार्यों के प्रति संवेदनशील और मर्यादित व्यवहार करने की अपील की। साथ ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हिंदी विरोधी रुख पर नाराजगी जताई।
शंकराचार्य विवाद पर कुमार विश्वास ने कहा कि भारत की सनातन संत परंपरा हजारों साल पुरानी है और यह देश की आत्मा का आधार है। संतों और धर्माचार्यों के सम्मान से कभी समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने खुद को सामान्य आस्तिक बताते हुए पूज्य शंकराचार्य के प्रति श्रद्धा जताई। यदि किसी पक्ष से चूक हुई तो वे विनम्र भाव से क्षमा मांगते हैं। उन्होंने शंकराचार्य से सात्विक क्रोध त्याग कर सब पर आशीर्वाद बरसाने की प्रार्थना की।
भाषा विवाद पर बोलते हुए उन्होंने स्टालिन के हिंदी विरोधी बयानों को दुखद बताया। भाषाएं देश की आत्मा होती हैं और उनका काम संवाद, समरसता और एकता बढ़ाना है, न कि टकराव पैदा करना। हिंदी किसी एक क्षेत्र की भाषा नहीं बल्कि देश को जोड़ने वाली संपर्क भाषा है। उन्होंने कहा कि जिनके पिता का नाम करुणानिधि है जो राम का पर्याय है उनके द्वारा राम की भाषा हिंदी का विरोध विरोधाभास है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भाषा के विरोधी नहीं हैं और सभी भाषाओं का समान सम्मान होना चाहिए।
कुमार विश्वास ने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम जैसी दक्षिण भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत की सराहना की। उत्तर भारत के लोगों से सुब्रमण्यम भारती, तिरुवल्लुवर जैसे महान कवियों को पढ़ने की अपील की ताकि उत्तर-दक्षिण की दूरी कम हो। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत विविधता में एकता है। भाषा, धर्म और संस्कृति को राजनीति का हथियार बनाने के बजाय जोड़ने का माध्यम बनाना चाहिए। भाषाएं संवाद के लिए होती हैं विरोध के लिए नहीं। संत, संस्कृति और भाषा के प्रति मर्यादा और सद्बुद्धि राष्ट्र को आगे ले जा सकती है।
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