Moradabad : मुरादाबाद नगर निगम में निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप, घटिया सड़कें और नियमों की अनदेखी से लोगों में नाराजगी

नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बिना शासनादेश के फरमान जारी किया कि टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदार भारत सरकार की मान्यता प्राप्त एनएबीएल लैब का प्रमाण पत्र निगम वेबसा

By INA News Desk
Jan 4, 2026 - 21:48
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Moradabad : मुरादाबाद नगर निगम में निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप, घटिया सड़कें और नियमों की अनदेखी से लोगों में नाराजगी
Moradabad : मुरादाबाद नगर निगम में निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप, घटिया सड़कें और नियमों की अनदेखी से लोगों में नाराजगी

मुरादाबाद नगर निगम में निर्माण कार्यों को लेकर आला अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। महानगर के कई पॉश इलाकों जैसे रामगंगा विहार, दीन दयाल नगर, नवीन नगर और आशियाना बुद्धि बिहार में घटिया निर्माण हुआ है। जानकारी के अनुसार कुछ प्रभावशाली ठेकेदारों ने निगम अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े ठेके हासिल किए और सड़कों का घटिया निर्माण किया। प्राधिकरण कॉलोनियों में पुरानी क्षतिग्रस्त सड़कों पर रात के समय सिर्फ कोलतार छिड़काव किया गया। नियमों के अनुसार पुरानी सड़क उखाड़ना, पत्थर डालना या रोलर चलाना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

कुछ कॉलोनियों में सीसी टाइल्स या आरसीसी सड़कों को भी ठेकेदारों ने मोटे कमीशन के लालच में कोलतार वाली सड़कें बना दीं। दो-तीन महीने पहले बनी ये सड़कें अब उखड़ने लगी हैं।

नाम न छापने की शर्त पर कुछ भाजपा नेताओं ने बताया कि निगम में भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों का सिंडिकेट काम कर रहा है। ईमानदार ठेकेदारों को ठेके नहीं मिलते। सूत्रों के अनुसार नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने बिना शासनादेश के फरमान जारी किया कि टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदार भारत सरकार की मान्यता प्राप्त एनएबीएल लैब का प्रमाण पत्र निगम वेबसाइट पर अपलोड करें। बिना प्रमाण पत्र के टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार नहीं। कुछ ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि एनएबीएल प्रमाण पत्र के नाम पर अधिकारी नया खेल खेल रहे हैं और निजी स्वार्थ में निगम को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इसी तरह ठेकेदारों को ईपीएफ प्रमाण पत्र जमा करने की शर्त लगाई गई, लेकिन स्मार्ट सिटी योजना के तहत करोड़ों के कार्यों में भुगतान कर दिए गए, जबकि शर्त पूरी नहीं हुई। निर्माण सामग्री की जांच एनएबीएल लैब से कराने की बात कही गई, लेकिन अब पीडब्ल्यूडी से जांच कराई जा रही है। जगह-जगह मानकों के विपरीत घटिया सीसी टाइल्स लगाई जा रही हैं।

निगम अधिकारियों की इन कार्रवाइयों से उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शहर की कई सामाजिक संस्थाओं ने मंडलायुक्त से निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच टीम गठित करने की मांग की है।

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