Ayodhya: गोद नहीं, झोले में सफर करता बचपन—मां की लाचारी का वायरल सच, मजबूरी की मार्मिक तस्वीर।
रामनगरी की भीड़भाड़ भरी गलियों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। यह कोई चमत्कार नहीं
अयोध्या। रामनगरी की भीड़भाड़ भरी गलियों से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि गरीबी और मजबूरी की सच्ची कहानी है—एक मां की, जो अपने कंधे पर टंगे पुराने झोले में अपनी एक साल की बच्ची को लेकर रोजी-रोटी कमाने निकलती है।
बताया जा रहा है कि महिला सुबह से शाम तक अलग-अलग घरों में झाड़ू-पोंछा कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। उसका पति चोटिल होने के कारण काम करने में असमर्थ है, ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी उसी पर आ गई है। आर्थिक तंगी के बीच सबसे बड़ी चुनौती उसके लिए अपनी मासूम बच्ची को संभालना है।
मां के पास कोई विकल्प नहीं, इसलिए वह बच्ची को झोले में बैठाकर अपने साथ हर घर ले जाती है। धीरे-धीरे बच्ची भी इस जीवन की आदी हो चुकी है। अब वह गोद में रोती नहीं, बल्कि उसी झोले में बैठकर मां के साथ शहर की गलियों में सफर करती है—धूप, पसीना और थकान के बीच। इस मार्मिक दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग भावुक हो उठे हैं। कई लोग मदद की अपील कर रहे हैं, तो कई इसे समाज के सामने एक आईना बता रहे हैं।
एक ओर अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, वहीं दूसरी ओर उसी नगरी में एक मां अपनी बच्ची को सपनों की पालकी नहीं, बल्कि मजबूरियों के झोले में ढोने को विवश है। यह घटना न केवल संवेदनाओं को झकझोरती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक ऐसी माताएं अपने बच्चों का बचपन यूं ही संघर्ष में ढोती रहेंगी।
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