Hapur: श्रद्धा भारी, व्यवस्था लाचार- बुद्ध पूर्णिमा पर ब्रजघाट ‘जामघाट’ में तब्दील।
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुक्रवार को गढ़मुक्तेश्वर का ब्रजघाट आस्था का केंद्र तो बना, लेकिन साथ ही
हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर: बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुक्रवार को गढ़मुक्तेश्वर का ब्रजघाट आस्था का केंद्र तो बना, लेकिन साथ ही दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग-9 ‘जामघाट’ में तब्दील हो गया। गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने यातायात व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। हालात ऐसे बने कि हाईवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और गाड़ियां घंटों तक रेंगती नजर आईं।
सुबह से ही ब्रजघाट पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में पहुंचे लोग गंगा स्नान के लिए उत्साहित दिखे, लेकिन व्यवस्थाओं की कमी ने इस आस्था को परेशानी में बदल दिया। जाम में फंसे श्रद्धालु, स्थानीय निवासी और दूर-दराज से आए यात्री बेहाल हो गए। छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं गर्मी और धूप में घंटों तक जूझते नजर आए।
स्थिति इतनी विकट हो गई कि कई वाहन चालकों ने मजबूरी में अपनी गाड़ियां सड़क किनारे ही खड़ी कर दीं और पैदल ही गंगा तट की ओर बढ़ गए। इससे हाईवे पर अव्यवस्था और बढ़ती गई। ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन मौके पर मौजूद तो रहे, लेकिन भीड़ के आगे व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हुईं।
जाम का एक बड़ा कारण ब्रजघाट टोल के पास चल रहा ओवरब्रिज निर्माण कार्य भी बना। निर्माण के चलते सड़क संकरी हो गई है, जिससे वाहनों की रफ्तार थम गई और लंबी कतारें लगती चली गईं। हैरानी की बात यह रही कि गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद NH-9 पर यह भीषण जाम लगा, जिसने यातायात प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए।
घंटों जाम में फंसे लोगों ने प्रशासनिक इंतजामों पर नाराजगी जताई। कई यात्रियों ने कहा कि हर साल ऐसे बड़े पर्वों पर भीड़ का अनुमान पहले से होता है, फिर भी ट्रैफिक प्लानिंग क्यों फेल हो जाती है? बुद्ध पूर्णिमा पर आस्था का यह मंजर जहां एक ओर श्रद्धा से सराबोर रहा, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्थाओं ने लोगों की परीक्षा ले ली। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन आने वाले बड़े आयोजनों के लिए सबक लेगा या फिर हर बार श्रद्धालुओं को इसी तरह जाम और परेशानी से जूझना पड़ेगा।
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