लखीमपुर खीरी में आंबेडकर जयंती पर प्रतिमा स्थापना को लेकर दो गुटों में टकराव: भारी पथराव के बाद प्रशासन ने संभाला मोर्चा।

उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित लखीमपुर खीरी जिले के एक गांव में आंबेडकर जयंती के पावन अवसर पर उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न

By INA News Desk
Apr 15, 2026 - 12:00
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लखीमपुर खीरी में आंबेडकर जयंती पर प्रतिमा स्थापना को लेकर दो गुटों में टकराव: भारी पथराव के बाद प्रशासन ने संभाला मोर्चा।
लखीमपुर खीरी में आंबेडकर जयंती पर प्रतिमा स्थापना को लेकर दो गुटों में टकराव: भारी पथराव के बाद प्रशासन ने संभाला मोर्चा।
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  • दलित समुदाय के दो पक्षों में प्रतिमा स्थापना पर विवाद, पुलिस पर भी हुआ हमला: डीएम-एसपी मौके पर तैनात, स्थिति नियंत्रण में।
  • भीम आर्मी और स्थानीय ग्रामीणों के बीच झड़प से तनाव: प्रतिमा को पहुंचा नुकसान, अफवाहों के बीच भारी पुलिस बल का फ्लैग मार्च।

उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित लखीमपुर खीरी जिले के एक गांव में आंबेडकर जयंती के पावन अवसर पर उस समय तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के स्थान को लेकर एक ही समुदाय के दो गुट आमने-सामने आ गए। जानकारी के अनुसार, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं द्वारा एक चयनित स्थल पर प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन उसी समाज के दूसरे पक्ष ने उस विशेष स्थान पर स्थापना का विरोध किया। विवाद की शुरुआत बहस से हुई, लेकिन जल्द ही इसने हिंसक झड़प का रूप ले लिया। दोनों पक्षों के बीच हुई इस छीना-झपटी में निर्माणाधीन स्थल और प्रतिमा को भी क्षति पहुंचने की खबरें आईं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन भीड़ के आक्रोश के सामने प्रारंभिक पुलिस बल कम नजर आया।

विवाद ने उस समय और अधिक गंभीर मोड़ ले लिया जब कुछ शरारती तत्वों ने अफवाहों का सहारा लेकर भीड़ को भ्रमित करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया और मौखिक रूप से फैली गलत सूचनाओं के कारण उत्तेजित भीड़ ने मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर पथराव शुरू कर दिया। इस अचानक हुए हमले में कुछ पुलिस वाहनों को क्षति पहुंची और व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे जवानों को पीछे हटना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) अमित कुमार राय ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर रवाना किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष किसी अंतर-जातीय वैमनस्य का परिणाम नहीं था, बल्कि एक ही समाज के भीतर स्थान के चयन और नेतृत्व को लेकर उपजा विरोधाभास था, जिसे उपद्रवियों ने गलत दिशा देने का प्रयास किया।

वर्तमान में लखीमपुर खीरी के उस प्रभावित क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्वयं कमान संभाले हुए हैं। भारी पुलिस बल के साथ आला अधिकारी गांव की गलियों में गश्त कर रहे हैं और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से क्षेत्र को सेक्टरों में बांटकर मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी गई है। आसपास के थानों से भी अतिरिक्त पीएसी (PAC) की टुकड़ियों को बुलाकर संवेदनशील बिंदुओं पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। पुलिस प्रशासन ने सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी है ताकि किसी भी प्रकार की भड़काऊ पोस्ट या फर्जी वीडियो के माध्यम से तनाव न फैलाया जा सके। आईटी सेल लगातार सक्रिय है और अफवाह फैलाने वाले संदिग्ध अकाउंट्स को चिन्हित किया जा रहा है। अधिकारियों ने स्थानीय संभ्रांत व्यक्तियों के साथ बैठक कर आपसी भाईचारा बहाल करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।

कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बात करते हुए पुलिस प्रशासन ने बताया है कि अब हालात पूरी तरह से नियंत्रण में हैं। पुलिस पर पथराव करने वाले उपद्रवियों की पहचान के लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद ली जा रही है। पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य शांति बहाली है, लेकिन साथ ही उन लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है जिन्होंने सरकारी कार्य में बाधा डाली और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है ताकि आम जनता के भीतर सुरक्षा का भाव पैदा हो सके और वे बिना किसी भय के अपने दैनिक कार्यों को सुचारू रूप से कर सकें।

प्रतिमा स्थापना के विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासन ने अब मध्यस्थता का रास्ता अपनाया है। दोनों पक्षों के मुख्य प्रतिनिधियों को बुलाकर एक सर्वसम्मत स्थान तय करने की बात चल रही है, जहाँ नियमों के दायरे में रहकर प्रतिमा को ससम्मान स्थापित किया जा सके। जिला प्रशासन का कहना है कि किसी भी नई परंपरा या बिना अनुमति के सार्वजनिक भूमि पर निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। आंबेडकर जयंती जैसे गौरवशाली अवसर पर इस तरह की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए स्थानीय प्रशासन ने लोगों से भावनात्मक बहकावे में न आने का आग्रह किया है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाबा साहेब के सम्मान में आयोजित होने वाले अन्य कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों। घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन पुलिस की मौजूदगी ने सुरक्षा का घेरा मजबूत कर दिया है। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि प्रतिमा स्थापना को लेकर पूर्व में कोई विधिवत अनुमति नहीं ली गई थी, जिससे प्रशासन को प्रक्रियात्मक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं और दूसरे पक्ष के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने इस उत्सव के माहौल में खलल डाला। अपर पुलिस अधीक्षक ने मीडिया को जानकारी दी है कि प्रतिमा को हुए नुकसान की भरपाई और उसे ससम्मान सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था कर दी गई है। घायलों, यदि कोई हों, के उपचार और उनकी सुरक्षा के भी पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं।

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