EPFO का बड़ा फैसला: UAN से गलत मेंबर आईडी हटाना हुआ आसान, अब योगदान जमा होने पर भी मिलेगी डी-लिंकिंग की सुविधा।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने हाल ही में अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक महत्वपूर्ण अपडेट किया है, जो उन कर्मचारियों के

Apr 15, 2026 - 12:07
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EPFO का बड़ा फैसला: UAN से गलत मेंबर आईडी हटाना हुआ आसान, अब योगदान जमा होने पर भी मिलेगी डी-लिंकिंग की सुविधा।
EPFO का बड़ा फैसला: UAN से गलत मेंबर आईडी हटाना हुआ आसान, अब योगदान जमा होने पर भी मिलेगी डी-लिंकिंग की सुविधा।
  • यूएएन में गलत आईडी से हैं परेशान? ईपीएफओ ने शुरू की नई ऑनलाइन सुविधा, बिना कार्यालय गए घर बैठे सुधारें अपनी सर्विस हिस्ट्री।
  • ईपीएफओ डी-लिंकिंग प्रोसेस 2026: गलत तरीके से लिंक हुई आईडी को हटाने के लिए जारी हुए नए नियम, नियोक्ताओं और क्षेत्रीय कार्यालयों को मिले निर्देश।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने हाल ही में अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक महत्वपूर्ण अपडेट किया है, जो उन कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा जिनकी यूएएन (UAN) प्रोफाइल में गलती से कोई गलत मेंबर आईडी लिंक हो गई थी। अक्सर देखा गया है कि नौकरी बदलने या प्रशासनिक त्रुटियों के कारण एक ही व्यक्ति के यूएएन में ऐसी आईडी जुड़ जाती हैं जो उनकी नहीं होतीं या जिनमें गलत जानकारी दर्ज होती है। पहले ऐसी आईडी को हटाना एक जटिल प्रक्रिया थी, विशेषकर तब जब उसमें पीएफ का पैसा जमा हो चुका हो। लेकिन 2026 के नए नियमों के तहत, ईपीएफओ ने इस सुविधा का विस्तार कर दिया है। अब कर्मचारी सीधे सदस्य पोर्टल के माध्यम से ऐसी गलत आईडी को हटाने के लिए अनुरोध कर सकते हैं, जिससे उनकी सर्विस हिस्ट्री पूरी तरह से सटीक और साफ-सुथरी बनी रहेगी।

इस नई सुविधा के तहत प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए इसे कई चरणों में विभाजित किया गया है। जब कोई सदस्य पोर्टल पर डी-लिंक करने का अनुरोध करता है, तो यह सबसे पहले संबंधित नियोक्ता (Employer) के पास जाता है। यदि नियोक्ता इस अनुरोध को स्वीकार कर लेता है और उस विशेष आईडी में योगदान दो बार से अधिक जमा नहीं हुआ है, तो आईडी को नियोक्ता के स्तर पर ही डी-लिंक कर दिया जाएगा। यह उन मामलों में अत्यंत प्रभावी है जहाँ गलत आईडी हाल ही में बनाई गई थी। हालांकि, सुरक्षा और प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के लिए ईपीएफओ ने सख्त प्रोटोकॉल भी बनाए हैं ताकि इस सुविधा का कोई दुरुपयोग न हो सके और केवल वास्तविक त्रुटियों को ही सुधारा जाए।

ईपीएफओ ने उन मामलों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं जहाँ नियोक्ता अनुरोध पर प्रतिक्रिया नहीं देता है या उसे खारिज कर देता है। यदि नियोक्ता दो सप्ताह के भीतर कोई कार्रवाई नहीं करता है, या यदि उस आईडी में दो बार से अधिक लेकिन छह बार से कम योगदान जमा हो चुका है, तो मामला स्वतः ही क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) को भेज दिया जाएगा। वहां अनुपालन शाखा (Compliance Branch) के अधिकारी मामले की गहन जांच करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों की समीक्षा के बाद ही ऐसी आईडी को डी-लिंक करने की अनुमति दी जाएगी। यह सुनिश्चित करता है कि यदि किसी कर्मचारी का नियोक्ता सहयोग नहीं कर रहा है, तो भी कर्मचारी के पास अपनी प्रोफाइल ठीक कराने का विकल्प मौजूद रहेगा। ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा उन आईडी के लिए उपलब्ध नहीं होगी जिनसे निकासी के लिए पहले ही दावे (Claims) प्रोसेस हो चुके हैं, सेटल हो चुके हैं या लंबित हैं। इसके अलावा, यदि किसी मेंबर आईडी में छह बार से अधिक पीएफ योगदान जमा किया जा चुका है, तो उसे इस ऑनलाइन सुविधा के माध्यम से हटाया नहीं जा सकेगा। ऐसे मामलों में बैलेंस को सस्पेंस रिजर्व फंड (SRF) में स्थानांतरित करने के लिए अलग से निर्देश जारी किए जाएंगे।

गलत मेंबर आईडी को हटाने की ऑनलाइन प्रक्रिया बेहद सरल है। सबसे पहले सदस्य को ईपीएफओ के आधिकारिक एकीकृत पोर्टल पर जाकर अपने यूएएन और पासवर्ड से लॉगिन करना होगा। लॉगिन करने के बाद 'View' टैब के अंतर्गत 'Service History' विकल्प पर जाना होगा। यहाँ आपको आपके यूएएन से लिंक सभी मेंबर आईडी की सूची दिखाई देगी। जिस आईडी को आप हटाना चाहते हैं, उसके सामने दिए गए 'De-link' बटन पर क्लिक करें। इसके बाद आपको डी-लिंकिंग का उचित कारण चुनना होगा और आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी (OTP) के माध्यम से इसे सत्यापित करना होगा। सफल सत्यापन के बाद आपका अनुरोध सबमिट हो जाएगा और आप इसकी स्थिति को ट्रैक कर सकेंगे। इस पहल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पीएफ दावों के सेटलमेंट के दौरान होने वाली देरी और अस्वीकृति (Rejection) को कम करेगा। अक्सर गलत आईडी के कारण सर्विस हिस्ट्री में विसंगतियां आ जाती थीं, जिससे पेंशन और अंतिम निकासी के समय कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब चूंकि कर्मचारी स्वयं इन त्रुटियों को पहचान कर उन्हें ठीक करने की पहल कर सकते हैं, इसलिए डेटा की शुद्धता बढ़ेगी। ईपीएफओ का उद्देश्य इस प्रक्रिया को पूरी तरह से पेपरलेस बनाना है ताकि अंशधारकों को अपने ही पैसे और रिकॉर्ड के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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