पुष्कर के पवित्र सरोवर के वराह घाट के समीप चांदी की अंगूठी में फंसा असहाय सांप, जीवन और मृत्यु के बीच कई घंटों तक तड़पा।
राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल पुष्कर की पवित्र और ऐतिहासिक सरोवर के किनारे एक अत्यंत हैरान,
- पवित्र तीर्थ नगरी में सांप की विभीषिका देख स्थानीय निवासियों ने दिखाई तत्परता, रेस्क्यू टीम ने कटर की मदद से धातु को काटकर दी नई जिंदगी।
- सरोवर के किनारों पर पर्यटकों द्वारा छोड़े जा रहे कचरे और आभूषणों से जलीय जीवों और सरीसृपों के अस्तित्व पर मंडराया गंभीर संकट।
राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल पुष्कर की पवित्र और ऐतिहासिक सरोवर के किनारे एक अत्यंत हैरान, विचलित और भावुक कर देने वाला अनूठा मामला सामने आया है। आस्था के इस महान केंद्र पर प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक आध्यात्मिक शांति की खोज में पवित्र स्नान और पूजा-पाठ के लिए सरोवर के विभिन्न घाटों पर एकत्रित होते हैं। लेकिन इसी पावन सरोवर के किनारों पर स्थित एक मुख्य घाट के समीप स्थानीय लोगों ने एक ऐसे बेजुबान जीव को भयंकर पीड़ा से गुजरते हुए देखा जिसने मानवीय लापरवाही की एक डरावनी तस्वीर सबके सामने पेश कर दी। सरोवर के किनारे पत्थरों के बीच एक सांप अत्यंत संदेहास्पद और असहाय अवस्था में पड़ा हुआ था जो काफी देर से दर्द के मारे बुरी तरह से तड़प रहा था और खुद को मुक्त कराने के लिए छटपटा रहा था। सामान्यतः सांपों को देखकर दूरी बना लेने वाले स्थानीय नागरिकों ने जब इस जीव की असहनीय तड़प को देखा तो वे अपनी मानवीय संवेदनाओं को रोक नहीं पाए और उसके बेहद करीब जाकर स्थिति का बारीकी से मुआयना करने का फैसला किया।
सरोवर के किनारे एकत्रित हुए प्रबुद्ध स्थानीय लोगों और पुरोहितों ने जब उस असहाय जीव को बेहद ध्यानपूर्वक और संवेदनशीलता के साथ देखा तो उन्हें असली समस्या का पता चला जिसे देखकर हर कोई पूरी तरह से स्तब्ध रह गया। उस बेजुबान सांप के शरीर के बिल्कुल बीचों-बीच इंसानों द्वारा पहनी जाने वाली एक कीमती चांदी की अंगूठी बेहद मजबूती के साथ फंसी हुई थी जो उसके मांस के भीतर तक धंस चुकी थी। अंगूठी का व्यास सांप के शरीर की मोटाई से काफी कम होने के कारण उस धातु के छल्ले ने सांप के आंतरिक श्वसन तंत्र और रक्त परिसंचरण को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया था, जिसके चलते उसका दम घुट रहा था। इस अत्यधिक दबाव और असहनीय दर्द के कारण सांप पूरी तरह से लाचार हो चुका था और वह अपनी सामान्य गति से रेंगने या हिलने-डुलने में भी पूरी तरह से असमर्थ नजर आ रहा था। यदि समय रहते उस पर ध्यान नहीं दिया जाता तो वह कुछ ही समय में तड़प-तड़प कर वहीं अपने प्राण त्याग देता।
जैसे ही इस अत्यंत विचित्र और संकटपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी पवित्र पुष्कर सरोवर के आसपास के दुकानदारों, नाविकों और तीर्थयात्रियों को मिली, तो देखते ही देखते घाट पर भारी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। जीव पर आए इस अप्रत्याशित संकट को देखते हुए स्थानीय युवाओं ने बिना एक पल का समय गंवाए जीव रक्षा के लिए समर्पित 'एनिमल केयर सोसाइटी' की रेस्क्यू टीम को इस आपातकालीन स्थिति की तत्काल सूचना दी। सूचना मिलते ही वन्यजीव प्रेमियों और सर्प विशेषज्ञों की एक अत्यधिक कुशल और अनुभवी टीम विशेष सुरक्षा उपकरणों और प्राथमिक चिकित्सा किट के साथ अविलंब सरोवर के किनारे उस चिन्हित स्थान पर पहुंच गई। टीम के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले भीड़ को शांत किया और सांप को एक सुरक्षित घेरे में लिया ताकि अत्यधिक तनाव और डर के कारण वह किसी को नुकसान न पहुंचाए और रेस्क्यू ऑपरेशन को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके। धातु की अंगूठी सांप के नाजुक शरीर में इस कदर जकड़ चुकी थी कि मामूली सी चूक से भी सांप की रीढ़ की हड्डी टूट सकती थी या उसका आंतरिक अंग फट सकता था, जिसके चलते रेस्क्यू टीम ने बेहद धीरज के साथ काम लिया।
रेस्क्यू टीम के साहसी सदस्यों ने सांप की प्रजाति और उसके आक्रामक व्यवहार का आकलन करने के बाद अत्यंत सावधानीपूर्वक और सूझबूझ के साथ इस बेहद जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन का सूत्रपात किया। सांप के मुंह को एक विशेष उपकरण की मदद से सुरक्षित रूप से काबू में किया गया ताकि वह दर्द के मारे रेस्क्यू करने वालों पर पलटवार न कर सके। इसके बाद एक बेहद पतले और अत्याधुनिक मेडिकल सर्जिकल कटर का उपयोग करते हुए सांप के शरीर को बिना छुए उस मजबूत चांदी की अंगूठी पर एक सूक्ष्म कट लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान जरा सी भी हड़बड़ाहट या हाथ का कांपना उस मूक जीव के लिए जानलेवा साबित हो सकता था, लेकिन विशेषज्ञों ने अपनी कार्यकुशलता का परिचय देते हुए लगभग आधे घंटे की सांस रोक देने वाली मशक्कत के बाद आखिरकार उस चांदी के छल्ले को दो हिस्सों में काटकर सांप के शरीर से पूरी तरह से अलग करने में सफलता प्राप्त कर ली।
अंगूठी के चंगुल से पूरी तरह मुक्त होते ही उस बेजुबान सांप ने मानो एक नई जिंदगी की खुली सांस ली और उसके शरीर की तड़प तुरंत शांत हो गई, जिसे देखकर वहां मौजूद दमकलकर्मियों, वन्यजीव प्रेमियों और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने राहत की गहरी सांस ली। अंगूठी के अत्यधिक घर्षण के कारण सांप के शरीर की त्वचा और मांस पर गहरे जख्म बन गए थे, जहां से हल्का रक्तस्राव भी हो रहा था। रेस्क्यू टीम ने उस जीव को तुरंत जंगल में छोड़ने के बजाय अपनी प्राथमिक चिकित्सा किट से विशेष एंटीसेप्टिक लिक्विड और हीलिंग ऑइंटमेंट का लेप उसके घावों पर लगाया ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इस प्राथमिक उपचार के बाद सांप को कुछ समय के लिए एक सुरक्षित और हवादार बॉक्स में डॉक्टर की निगरानी में रखा गया ताकि उसकी शारीरिक रिकवरी और ऊर्जा के स्तर को जांचा जा सके।
इस अनोखी और आंखें खोल देने वाली घटना ने पवित्र पुष्कर सरोवर के पर्यावरण और वहां आने वाले पर्यटकों व श्रद्धालुओं की नागरिक जिम्मेदारी पर एक बहुत बड़ा नैतिक सवाल खड़ा कर दिया है। अक्सर देखा जाता है कि धार्मिक आस्थाओं, मन्नतों और ज्योतिषीय उपायों के नाम पर कई श्रद्धालु अपने पहने हुए आभूषण, अंगूठियां, सिक्के और अन्य सिंथेटिक सामग्रियां सीधे पवित्र सरोवर के जल में प्रवाहित कर देते हैं। पानी के भीतर और किनारों पर जमा होने वाला यही धातु और प्लास्टिक का कचरा वहां रहने वाले जलीय जीवों, कछुओं, मछलियों और सरीसृपों के लिए एक जानलेवा काल बन जाता है। इस घटना के बाद स्थानीय पर्यावरणविदों और सामाजिक संस्थाओं ने प्रशासन से घाटों पर कचरा और आभूषण फेंकने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने और सरोवर की नियमित सफाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की मांग तेज कर दी है।
What's Your Reaction?




