दिल्ली-NCR में सूरज के तेवर हुए तल्ख: 42°C के करीब पहुँचने का अनुमान, मौसम विभाग ने जारी की कड़ी चेतावनी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से में आसमान पूरी तरह साफ रहने
- भारत में भीषण गर्मी का आगाम: उत्तर और मध्य भारत में लू के थपेड़ों का अलर्ट, 5°C तक बढ़ सकता है पारा।
- उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में भीषण गर्मी की लहर: लू जैसे हालात ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें, अगले कुछ दिन होंगे बेहद भारी।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग 95 प्रतिशत हिस्से में आसमान पूरी तरह साफ रहने वाला है, जिसके कारण दिन के समय सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ रही हैं और धरातल को तेजी से गर्म कर रही हैं। वर्तमान में कई शहरों का तापमान 40°C की दहलीज को पार कर चुका है, जबकि मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में इस सप्ताह पारा 42°C से 45°C के बीच रहने की प्रबल संभावना है। नमी में आती कमी और पश्चिमी विक्षोभों के प्रभाव के कमजोर पड़ने से शहरी क्षेत्रों में 'हीट स्ट्रेस' यानी गर्मी का तनाव बढ़ गया है। रात के तापमान में भी सामान्य से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे राहत नहीं मिल पा रही है।
विशेष रूप से दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में गर्मी का असर बहुत तेजी से देखा जा रहा है। यहाँ शुष्क गर्मी का प्रभाव बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 42°C तक पहुँचने का अनुमान है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण सड़कों पर आवाजाही मुश्किल हो गई है। मौसम विभाग का कहना है कि आसमान साफ होने और हवाओं की गति धीमी रहने से गर्मी का संचय ज्यादा हो रहा है, जिससे 'हीट आइलैंड' जैसा प्रभाव बन रहा है। दिल्ली में वायु गुणवत्ता का सूचकांक भी मध्यम श्रेणी में बना हुआ है, लेकिन धूल भरी हवाओं और बढ़ती गर्मी के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश के परिदृश्य पर नजर डालें तो लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों में सूरज की तपिश झुलसाने वाली हो गई है। राज्य के कई जिलों में अधिकतम तापमान 38°C से 40°C के बीच बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 5°C की और अधिक बढ़ोतरी हो सकती है। लू जैसे हालात केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मध्य और पूर्वी हिस्सों में भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में दोपहर के समय सन्नाटा पसरने लगा है क्योंकि सीधी धूप में काम करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। मौसम विभाग ने तेलंगाना, रायलसीमा, महाराष्ट्र, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिमी राजस्थान और झारखंड के अलग-अलग हिस्सों में लू चलने की चेतावनी दी है। इन क्षेत्रों में गर्म और शुष्क हवाओं का प्रवाह जारी रहेगा, जो स्वास्थ्य, जल संसाधनों और बिजली की मांग पर सीधा दबाव डालेगा।
कृषि क्षेत्र पर बढ़ती गर्मी के प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए विशेष परामर्श जारी किया गया है। उत्तर-पश्चिम भारत में गेहूं और सरसों की कटाई जल्द से जल्द पूरी करने की सलाह दी गई है ताकि खड़ी फसलों को अत्यधिक गर्मी से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। पूर्वी और मध्य भारत में जहां धान, मक्का और दलहन की फसलें अभी खड़ी हैं, वहां हल्का और बार-बार सिंचाई करने की हिदायत दी गई है। बढ़ते तापमान और नमी के तालमेल से कीटों और कवक रोगों के हमले की संभावना भी बढ़ गई है, इसलिए फसलों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। गर्मी की यह लहर न केवल इंसानों बल्कि फसलों की पैदावार को भी प्रभावित कर सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस भीषण गर्मी के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा है। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले मजदूरों के लिए यह मौसम काफी खतरनाक हो सकता है। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) और 'हीट स्ट्रोक' से बचने के लिए तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाने और दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच देश के पूर्वी, पूर्वोत्तर और उत्तरी हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी वाले दिन रहने वाले हैं। इस दौरान रातें भी काफी गर्म रहेंगी, जिससे शरीर को गर्मी से उबरने का समय नहीं मिल पाएगा। आने वाले दिनों में बिजली की मांग में भी भारी उछाल आने की संभावना है क्योंकि तापमान बढ़ने के साथ ही एयर कंडीशनर और कूलरों का उपयोग बढ़ जाएगा। कई राज्यों में जल संकट की खबरें भी सामने आने लगी हैं क्योंकि जलाशयों का स्तर गर्मी के कारण तेजी से गिर रहा है। मौसम विभाग की भविष्यवाणियां संकेत दे रही हैं कि इस बार गर्मी का मौसम काफी लंबा खिंच सकता है। उत्तर और मध्य भारत के लोगों को आने वाले एक सप्ताह तक किसी भी तरह की राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि किसी मजबूत मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
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