Special : चंद्रशेखर की 18वीं पुण्यतिथि- आदर्शवादी राजनीति के अंतिम प्रतीक को नमन
Chandrashekhars 18th death anniversary : चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल 1927 को बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में एक राजपूत किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने सतीश चंद्र पी.जी. कॉलेज, बलिया से स्नातक
By Asif Hussain Zaidi
8 जुलाई 2025 को बलिया, उत्तर प्रदेश में जन्मे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की 18वीं पुण्यतिथि मनाई जाएगी। समाजवादी विचारधारा के प्रखर नेता, जिन्हें ‘युवा तुर्क’ और ‘जननायक’ के नाम से जाना जाता है, चंद्रशेखर एक ऐसे राजनेता थे जिन्होंने अपने सिद्धांतों और आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया। उनकी राजनीति का आधार नानक, बुद्ध, गांधी, आचार्य नरेंद्र देव और जयप्रकाश नारायण जैसे महान व्यक्तित्वों की शिक्षाएं थीं। सूर्य कुमार, जो भारत यात्रा ट्रस्ट के ट्रस्टी और चंद्रशेखर के निकट सहयोगी रहे, ने उनकी स्मृति में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया।
चंद्रशेखर का जीवन और विचारधारा
चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल 1927 को बलिया जिले के इब्राहिमपट्टी गांव में एक राजपूत किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने सतीश चंद्र पी.जी. कॉलेज, बलिया से स्नातक और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन से ही वे समाजवादी आंदोलन से जुड़े और आचार्य नरेंद्र देव व डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं से प्रेरित हुए। 1951 में वे बलिया जिले के प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सचिव बने और बाद में उत्तर प्रदेश इकाई के महासचिव के रूप में कार्य किया। 1962 में वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए और 1977 में जनता पार्टी के अध्यक्ष बने।
चंद्रशेखर ने 1983 में कन्याकुमारी से दिल्ली तक 4260 किलोमीटर की भारत यात्रा की, जिसका उद्देश्य जनता के दुख-दर्द को समझना और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना था। इस यात्रा ने उन्हें जनता के बीच और करीब लाया। उन्होंने भारत यात्रा ट्रस्ट और भोंडसी (हरियाणा) में भारत यात्रा केंद्र की स्थापना की, जो सामाजिक कार्यों और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित रहे। हालांकि, 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने भोंडसी केंद्र के जमीन के दुरुपयोग पर सवाल उठाए।
प्रधानमंत्री के रूप में योगदान
चंद्रशेखर 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। यह दौर देश के लिए आर्थिक और राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण था। उनके कार्यकाल में भारत को आर्थिक संकट से उबारने के लिए स्वर्ण भंडार गिरवी रखने जैसे कठिन निर्णय लिए गए। विदेशी लेखक रोड्रिक मैथ्यू ने अपनी पुस्तक Chandra Shekhar: Six Months That Saved India में उनके इन नीतिगत फैसलों की सराहना की, जिसमें उन्होंने भारत को आर्थिक संकट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके कार्यकाल में स्वर्ण मंदिर में सैन्य कार्रवाई और श्रीलंका में भारतीय सेना की तैनाती जैसी घटनाओं पर उनकी टिप्पणियां उनकी गहरी ऐतिहासिक समझ को दर्शाती हैं। उन्होंने स्वर्ण मंदिर की घटना को सिख इतिहास के परिप्रेक्ष्य में गंभीर बताया और श्रीलंका में भारतीय सेना की तैनाती को इतिहास से सबक न लेने का परिणाम माना। उनकी यह टिप्पणी, “ऐसा तब होता है जब लोग इतिहास को नहीं पढ़ते और इतिहास गढ़ने निकल पड़ते हैं,” उनकी दूरदर्शिता को दर्शाती है।
सिद्धांतों पर अडिग राजनेता
चंद्रशेखर ने हमेशा सत्ता से ऊपर सिद्धांतों को रखा। आपातकाल (1975-77) के दौरान, जब वे कांग्रेस के सदस्य थे, तब भी इंदिरा गांधी के खिलाफ खड़े हुए और उन्हें पटियाला जेल में कैद किया गया। उन्होंने जयप्रकाश नारायण और डॉ. लोहिया जैसे नेताओं के सामने भी अपनी राय को विनम्रता के साथ रखा। उनकी यह दृढ़ता और वैचारिक प्रतिबद्धता उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती थी।
वे धर्म और राजनीति के मिश्रण के खिलाफ थे। एक धार्मिक गुरु से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं नहीं जानता कि धर्म में राजनीति का हस्तक्षेप कितना नुकसान करता है, पर मैं जानता हूं कि राजनीति में धर्म का प्रवेश देश और समाज के लिए घातक है।” उनकी यह सोच सामाजिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्षता के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को दर्शाती है।
चंद्रशेखर की विरासत
चंद्रशेखर की राजनीति क्रांति और समाज रचना से प्रेरित थी। वे सत्ता के लिए नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने के लिए राजनीति में आए। उनके सहयोगी सूर्य कुमार बताते हैं कि चंद्रशेखर अपने कार्यकर्ताओं की निष्ठा और स्वाभिमान का सम्मान करते थे। उनकी सादगी और जनता के प्रति करुणा उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। उन्होंने कहा था, “जुनून के बिना राजनीति निरर्थक है, करुणा के बिना नीति व्यर्थ है।” उनकी यह सीख आज भी प्रासंगिक है।
उपसभापति राज्यसभा हरिवंश ने अपनी पुस्तक Chandra Shekhar: The Last Icon of Ideological Politics में उन्हें आदर्शवादी राजनीति का अंतिम प्रतीक बताया। उनके विचार आज भी समाजवादी आंदोलन और ग्रामीण विकास के लिए प्रेरणा देते हैं।
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