Sitapur : नैमिषारण्य में 84 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ, लाखों श्रद्धालु शामिल
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में नीमसार के पहले आश्रम में महंत नारायण दास ने डंका बजाकर यात्रा शुरू की। श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर से परिक्रमा की शुरुआत की। मंदिर चौराहे पर स्थानी
रिपोर्ट : सुरेंद्र मोठी INA NEWS नैमिषारण्य
नैमिषारण्य में विश्व प्रसिद्ध 84 कोसी परिक्रमा श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गई। श्रद्धालुओं ने जय श्री राम के नारे लगाते हुए यात्रा की शुरुआत की। यह परिक्रमा प्रतिवर्ष ऋषि-मुनियों की परंपरा के अनुसार प्रारंभ होती है।
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में नीमसार के पहले आश्रम में महंत नारायण दास ने डंका बजाकर यात्रा शुरू की। श्रद्धालुओं ने मां ललिता देवी मंदिर से परिक्रमा की शुरुआत की। मंदिर चौराहे पर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने संतों, महात्माओं और श्रद्धालुओं का स्वागत माल्यार्पण और तिलक लगाकर किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्प वर्षा की।
दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु, साधु-संत देश-विदेश से पहुंचे हैं। उन्होंने वैदिक मंत्रों, कीर्तन और भजन के साथ जय श्री राम के जयकारे लगाते हुए पहले पड़ाव भगवान द्वारकाधीश के दरबार की ओर प्रस्थान किया। मार्ग पर स्वागत द्वार सजाए गए हैं। मिश्रिख नगर पालिका और प्रशासन ने संतों का भव्य स्वागत किया। पूरे मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। ड्रोन से निगरानी की जा रही है। विभिन्न जिलों की पुलिस, पीएसी और अधिकारी सादे कपड़ों में तैनात हैं ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और सुरक्षित रहे।
श्रद्धालुओं ने सबसे पहले भगवान गणेश का लड्डू का भोग लगाकर पूजन किया, फिर मां ललिता देवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। बुजुर्गों से बच्चों तक सभी में जोश दिखा। हाथी, घोड़े, पालकी, रथ, बैलगाड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली से लोग जा रहे हैं। सतयुग से चली आ रही यह परिक्रमा पुराणों में वर्णित है। मान्यता है कि इससे 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्ति, पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है। नैमिषारण्य में भक्ति, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है।
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