सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश यादव की याचिका पर सुनवाई टाली, सांप के जहर मामले में अगली तारीख 19 मार्च।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को यूट्यूबर एल्विश यादव की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने सांप के जहर से जुड़े मामले में उनके खिलाफ
- एल्विश यादव के खिलाफ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत जांच जारी, कोर्ट ने राज्य से मांगा अतिरिक्त सामग्री
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मशहूर व्यक्ति द्वारा बेजुबान सांपों का इस्तेमाल समाज में बुरा संदेश देता है, मामले में NDPS की धाराओं पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को यूट्यूबर एल्विश यादव की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने सांप के जहर से जुड़े मामले में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मामले को 19 मार्च 2026 के लिए स्थगित कर दिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य को अतिरिक्त सामग्री पेश करने का समय दिया है। याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 मई 2025 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें हाईकोर्ट ने एल्विश यादव की याचिका खारिज कर दी थी, जो चार्जशीट और समन आदेश को चुनौती दे रही थी। मामला वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, आईपीसी और एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज है। कोर्ट ने पिछले साल 6 अगस्त 2025 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जो अब भी जारी है।
मामला नवंबर 2023 में नोएडा में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि एल्विश यादव ने एक रेव पार्टी में सांप के जहर को नशीले पदार्थ के रूप में इस्तेमाल किया और विदेशियों को आपूर्ति की। एल्विश यादव को 17 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया गया था। जांच में दावा किया गया कि वे एक यूट्यूब वीडियो शूट के लिए सांपों का इस्तेमाल कर रहे थे और जहर निकालने में शामिल थे। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि मशहूर व्यक्ति बेजुबान सांपों जैसे जानवरों का इस्तेमाल लोकप्रियता के लिए करते हैं तो इससे समाज में बहुत बुरा संदेश जाता है। पीठ ने एल्विश यादव के वकील से पूछा कि क्या वीडियो शूट के लिए अनुमति थी और क्या ऐसी अनुमति जहर निकालने तक बढ़ सकती है। कोर्ट ने कहा कि आप जो चाहें कर सकते हैं, ऐसा नहीं कहा जा सकता।
- कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां और सवाल
पीठ ने कहा कि मुख्य चिंता वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत शिकायत है। क्या सांपों के इस्तेमाल के लिए कोई वैध अनुमति थी। यदि अनुमति वीडियो शूट के लिए थी तो क्या जहर निकालना कभी अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने पूछा कि क्या जू में जाकर जानवरों से खेल सकते हैं। क्या यह अपराध नहीं होगा। पीठ ने राज्य से कहा कि अनुमति की प्रकृति और वैधता की जांच करें। कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट की धाराओं के आवेदन पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि सांपों में जहर ग्रंथियां नहीं थीं, जैसा कि मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया। नौ सांपों की जांच में वे जहरीले नहीं पाए गए। कोर्ट ने पर्याप्त सामग्री की जांच करने का संकेत दिया।
- मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
मामला नोएडा में एक रेव पार्टी से जुड़ा है, जहां आरोप है कि सांप का जहर मनोरंजन के लिए इस्तेमाल किया गया। एफआईआर में वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धाराएं लगाई गईं, क्योंकि सांप संरक्षित प्रजातियां हैं। आरोप है कि एल्विश यादव ने सांपों का दुरुपयोग किया और जहर निकाला। जांच में सांपों की जब्ती हुई लेकिन रिपोर्ट में वे जहरीले नहीं पाए गए। चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें समन जारी हुआ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई। अगस्त 2025 में ट्रायल पर रोक लगी।
- सुनवाई का विवरण और स्थगन का कारण
18 फरवरी 2026 को सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दलीलें पेश की गईं। राज्य पक्ष ने जवाब दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया। राज्य को अतिरिक्त सामग्री पेश करने का निर्देश दिया। मामला 19 मार्च 2026 को सूचीबद्ध किया गया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक बरकरार रखी। सुनवाई में वाइल्डलाइफ एक्ट के प्रावधानों पर फोकस रहा।
- कानूनी स्थिति और संबंधित धाराएं
मामला वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 की धाराओं के तहत है, जो संरक्षित जानवरों के दुरुपयोग पर रोक लगाता है। एनडीपीएस एक्ट की धाराएं नशीले पदार्थों के लिए लगाई गईं। आईपीसी की धाराएं भी शामिल हैं। कोर्ट एनडीपीएस के आवेदन पर सवाल उठा रहा है। चार्जशीट में विभिन्न धाराएं हैं। याचिका में कार्यवाही रद्द करने की मांग है। हाईकोर्ट ने खारिज किया था।
- पिछली अपडेट्स और विकास
अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर अंतरिम रोक लगाई। नोटिस जारी किया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मई 2025 में याचिका खारिज की। गिरफ्तारी मार्च 2024 में हुई। जांच नोएडा पुलिस ने की। मामले में सह-अभियुक्त भी हैं। कोर्ट ने पर्याप्त सामग्री की जांच पर जोर दिया।
- मामले का महत्व और आगे की प्रक्रिया
मामला वाइल्डलाइफ संरक्षण और प्रभावशाली व्यक्तियों की जिम्मेदारी से जुड़ा है। कोर्ट ने समाज पर प्रभाव पर टिप्पणी की। राज्य को अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने हैं। अगली सुनवाई में काउंटर एफिडेविट पर विचार होगा। ट्रायल रोक जारी है।
What's Your Reaction?











