नमकीन-चिप्स की आड़ में चलता था कोडीन का काला कारोबार, यूपी में 100 करोड़ का तस्करी नेटवर्क उजागर, मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद गिरफ्तार, 40 फर्मों पर FIR। 

उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी का एक विशाल नेटवर्क उजागर हुआ है, जो नमकीन और चिप्स की बोरियों में छिपाकर

Dec 1, 2025 - 14:34
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नमकीन-चिप्स की आड़ में चलता था कोडीन का काला कारोबार, यूपी में 100 करोड़ का तस्करी नेटवर्क उजागर, मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद गिरफ्तार, 40 फर्मों पर FIR। 
नमकीन-चिप्स की आड़ में चलता था कोडीन का काला कारोबार, यूपी में 100 करोड़ का तस्करी नेटवर्क उजागर, मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद गिरफ्तार, 40 फर्मों पर FIR। 

उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी का एक विशाल नेटवर्क उजागर हुआ है, जो नमकीन और चिप्स की बोरियों में छिपाकर माल ढोता था। वाराणसी आधारित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल पर मुख्य आरोप है, जिन्होंने शेल कंपनियों और जाली दस्तावेजों के जरिए 89 लाख बोतलों की आपूर्ति की, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। भोला प्रसाद को कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जबकि शुभम दुबई फरार है। उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (UPFSDA) ने 40 से अधिक फर्मों के खिलाफ FIR दर्ज की हैं, और जांच 30 जिलों तक फैल चुकी है। यह नेटवर्क हिमाचल प्रदेश की फैक्ट्री से सिरप खरीदता, गाजियाबाद में स्टोर करता और आगरा, लखनऊ, वाराणसी होते हुए पूर्वी राज्यों तथा नेपाल, बांग्लादेश तक पहुंचाता था।

तस्करी की शुरुआत 2023 में हुई, जब शुभम जायसवाल ने कोविड के दौरान मांग बढ़ने का फायदा उठाया। वह पहले छोटे स्तर का मेडिकल सप्लायर था, लेकिन जल्दी ही नेटवर्क विस्तार किया। शुभम और उसके पिता ने रांची की शैली ट्रेडर्स और वाराणसी की न्यू वृद्धि फार्मा जैसी फर्मों का इस्तेमाल किया। ये फर्म कागजों पर ही मौजूद थीं, और जाली बिल, ट्रांसपोर्ट दस्तावेज बनाए जाते थे। हिमाचल प्रदेश की एक फैक्ट्री से कोडीन सिरप खरीदा जाता, जो गैर-चिकित्सकीय उपयोग के लिए प्रतिबंधित है। स्टॉक गाजियाबाद के गोदामों में रखा जाता, फिर नमकीन-चिप्स के कार्टन में पैक कर ट्रकों से भेजा जाता। सोनभद्र में 18 अक्टूबर को हुई छापेमारी में 12,000 बोतलें बरामद हुईं, जो चिप्स के डिब्बों में छिपी थीं। ट्रक ड्राइवरों के बयानों से शुभम की फर्मों का पता चला।

नेटवर्क की संरचना जटिल थी। कम से कम छह शेल फर्में थीं, जो वैध दवा शिपमेंट का दिखावा करतीं। रांची की शैली ट्रेडर्स से फर्जी इनवॉयस जारी होते, जो इंटरस्टेट मूवमेंट को कवर देते। वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर जैसे जिलों में मेडिकल स्टोर्स के जरिए बिक्री दिखाई जाती, लेकिन असल में सिरप बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, नेपाल और बांग्लादेश भेजा जाता। UPFSDA ने 102 फर्मों पर नजर रखी, जिनमें से 31 की जांच में 28 पर FIR हुई। शुभम और भोला पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। जौनपुर में 12 मेडिकल स्टोर मालिकों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, जहां 37 लाख बोतलें (57 करोड़ रुपये) की जाली बिक्री दिखाई गई। रांची फर्म से सप्लाई कागजों पर यूपी जिलों को जाती, लेकिन वास्तव में तस्करी होती।

30 नवंबर को कोलकाता एयरपोर्ट पर भोला प्रसाद को पकड़ा गया। वह थाईलैंड जाने वाली फ्लाइट में सवार था, और उसके बाद सिंगापुर जाने की योजना थी। सोनभद्र पुलिस की इंटेलिजेंस के आधार पर कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई की। भोला शैली ट्रेडर्स का मालिक है, जो सोनभद्र के दो मेडिकल स्टोर्स—मां कृपा मेडिकल और शिविक्षा फार्मा—को 7.53 लाख बोतलें (7.53 करोड़ मिलीलीटर) सप्लाई कर चुका। स्टोर्स पर स्टॉक या बिक्री का कोई प्रमाण न मिला। रॉबर्टसगंज कोतवाली में FIR दर्ज हुई। भोला को यूपी लाकर पूछताछ होगी। शुभम दुबई में है, और उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हो गई। वाराणसी में 16 नवंबर को कोतवाली में शुभम, भोला और 26 फर्मों पर FIR हुई।

UPFSDA ने 12 नवंबर से विशेष अभियान शुरू किया, जो वाराणसी से फैला। 31 फर्मों की जांच में 28 पर कार्रवाई हुई। 29 नवंबर को 12 और फर्मों पर FIR दर्ज की गईं, जो बंद पाई गईं। इन फर्मों को नोटिस दिए गए, लेकिन दस्तावेज न जमा करने पर केस बना। जांच में 70 से अधिक कंपनियां जांच के दायरे में हैं। गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर में 17 लोगों पर FIR हुई, जिसमें शुभम शामिल है। घाजीाबाद में 3 नवंबर को 1.5 लाख बोतलें जब्त हुईं, और आठ गिरफ्तार। नंदग्राम थाने में 17 आरोपी बने। नेटवर्क मुंबई, हिमाचल, झारखंड और यूपी के लोगों से जुड़ा।

मध्य प्रदेश में 24 बच्चों की मौत के बाद छापेमारी तेज हुई। सोनभद्र में दो कंटेनर ट्रक रांची के लिए रवाना हो रहे थे, जिनमें चिप्स-नमकीन के कार्टन में 1 लाख बोतलें (3.5 करोड़ रुपये) छिपीं। ट्रक ड्राइवरों ने शुभम की फर्मों का खुलासा किया। वाराणसी के रोहानिया गोदाम से 93,000 बोतलें बरामद हुईं। लखनऊ में शुभम के सहयोगी अमित कुमार सिंह टाटा को 27 नवंबर को गिरफ्तार किया। टाटा का पिता अशोक सिंह पर भी FIR है। टाटा झारखंड की देवकृपा फर्म से जुड़ा, जो तस्करी में शामिल। नेटवर्क बांग्लादेश और खाड़ी देशों तक फैला।

मुख्य बिंदु-

UPFSDA आयुक्त रोशन जैकब ने कहा कि जांच 30 जिलों में फैली। 90 से अधिक FIR दर्ज। दवा निरीक्षकों और लाइसेंसिंग अधिकारियों की भूमिका जांच में। शुभम ने स्थानीय प्रभावशाली व्यक्ति से गठजोड़ किया। STF ने अमित टाटा को पकड़ा। शुभम के प्रत्यर्पण के लिए टीम दुबई भेजी। 38 फार्मा फर्मों पर जांच। वाराणसी एडीसीपी टी सरवनन ने समन्वय बैठक की।

नेटवर्क की आपूर्ति हिमाचल फैक्ट्री से। स्टोरेज गाजियाबाद। वितरण आगरा, लखनऊ, वाराणसी से। पूर्वी गलियारे में बिहार, झारखंड, बंगाल। अंतरराष्ट्रीय सीमा पार। जाली दस्तावेजों से वैधता। शुभम ने कई फर्जी ट्रेडिंग फर्में चलाईं। UPFSDA ने 12 दवा निरीक्षकों की टीम लगाई। 51 फर्मों की जांच विस्तारित।

29 नवंबर को 12 फर्मों पर FIR। नोटिस दिए, लेकिन दस्तावेज न जमा। स्टॉक रजिस्टर अधूरे या गायब। शुभम की शैली ट्रेडर्स से लिंक। पूर्वी यूपी में कोडीन डायवर्जन। वाराणसी ड्रग कंट्रोल ने कार्रवाई तेज।

जांच में 70 कंपनियां। 102 फर्मों पर नजर। प्रारंभिक जांच में 28 पर FIR। शुभम, भोला और 26 फर्में आरोपी। जौनपुर में 12 स्टोर मालिक। 37 लाख बोतलें जाली बिक्री। रांची सप्लाई कागजों पर यूपी, असल में तस्करी।

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