अलीगढ़ साइबर पुलिस का बड़ा ऑपरेशन, शेयर बाजार ठगी गिरोह के 12 सदस्य गिरफ्तार
गिरोह का पूरा खेल व्हाट्सएप ग्रुप से चलाया जा रहा था। सदस्य लोगों को पहले सोशल मीडिया या फोन से संपर्क करते थे और फिर व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते थे। ग्रुप का नाम 'वीआईपी प्रॉफिट क्लब' जैसे रखा जा
अलीगढ़ साइबर पुलिस ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर देश भर में ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश सहित सात राज्यों से गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए लोगों को झूठे निवेश स्कीम में फंसाते थे और करोड़ों रुपये की ठगी करते थे। जांच में गिरोह के विदेशी कनेक्शन के संकेत मिले हैं, जिसमें हांगकांग सहित दक्षिण पूर्व एशिया के आईपी एड्रेस ट्रेस किए गए हैं। गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने 600 से ज्यादा फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप बंद कर दिए हैं। अब इस पूरी घटना के तथ्यों को विस्तार से समझते हैं।
अलीगढ़ साइबर पुलिस ने 7 फरवरी 2026 को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया। इस रैकेट में शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लोगों को ठगा जाता था। पुलिस ने सात राज्यों में समन्वित छापेमारी करके गिरोह के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार सदस्यों में चार ओडिशा से, तीन उत्तर प्रदेश से, दो उत्तराखंड से और एक-एक राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से हैं। गिरोह लोगों को 200 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच देकर फंसाता था। जांच में पता चला कि गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन हैं और ठगे गए पैसे को भारतीय म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट करके विदेश भेजा जाता था। आईपी एड्रेस से हांगकांग और दक्षिण पूर्व एशिया के कनेक्शन ट्रेस हुए हैं। इस रैकेट से करीब 1.5 लाख लोग प्रभावित होने वाले थे और लगभग 500 करोड़ रुपये की ठगी होने वाली थी। पुलिस ने समय रहते 600 से ज्यादा फर्जी व्हाट्सएप निवेश ग्रुप बंद कर दिए। गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप ग्रुप में फर्जी स्क्रीनशॉट और वीडियो शेयर करके लोगों को झूठे लाभ दिखाते थे। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जिसमें एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी ने ठगी की रिपोर्ट की थी। पुलिस ने भारतीय साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की मदद से जांच की। गिरोह के सदस्य शेल कंपनियां बनाकर बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल करते थे। ठगे गए पैसे को क्रिप्टो में बदलकर विदेश ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस ने 500 से ज्यादा संभावित पीड़ितों को फोन करके सतर्क किया। गिरफ्तार सदस्यों पर संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य होने, आपराधिक साजिश रचने, जालसाजी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब गिरोह के विदेशी लीडर्स को ट्रेस करने के लिए सीबीआई और इंटरपोल से संपर्क कर रही है।
व्हाट्सएप ग्रुप से चलता था ठगी का जाल, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन ट्रेस
गिरोह का पूरा खेल व्हाट्सएप ग्रुप से चलाया जा रहा था। सदस्य लोगों को पहले सोशल मीडिया या फोन से संपर्क करते थे और फिर व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ते थे। ग्रुप का नाम 'वीआईपी प्रॉफिट क्लब' जैसे रखा जाता था। ग्रुप में फर्जी विशेषज्ञ फेक स्क्रीनशॉट और वीडियो शेयर करके बड़े लाभ दिखाते थे। लोगों को छोटी रकम से शुरुआत करवाई जाती थी और फिर बड़े निवेश के लिए दबाव डाला जाता था। जब पीड़ित रिटर्न मांगते थे तो नए टास्क दिए जाते थे या ज्यादा पैसे मांगे जाते थे। जांच में पता चला कि ठगे गए पैसे को म्यूल बैंक अकाउंट्स से यूएसडीटी क्रिप्टो में कन्वर्ट किया जाता था। आईपी एड्रेस से गिरोह के दक्षिण पूर्व एशिया और हांगकांग कनेक्शन मिले हैं। गिरोह के सदस्य शेल कंपनियां बनाकर बैंक अकाउंट्स खोलते थे और कमीशन के बदले विदेशी हैंडलर्स को उपलब्ध कराते थे। मामले की शुरुआत अलवर के स्वर्ण जयंती नगर के निवासी दिनेश कुमार शर्मा की शिकायत से हुई। वे पंजाब नेशनल बैंक के रिटायर्ड डिप्टी जनरल मैनेजर हैं। नवंबर में उन्हें व्हाट्सएप से संपर्क किया गया और 35-40 प्रतिशत रिटर्न का लालच दिया गया। दिसंबर में उन्होंने 5000 रुपये निवेश किए और फिर ग्रुप में जोड़े गए। फर्जी लाभ देखकर उन्होंने 1.10 करोड़ रुपये निवेश किए, लेकिन कोई रिटर्न नहीं मिला। जब उन्होंने सवाल किया तो 3 करोड़ और मांगे गए। शक होने पर उन्होंने 31 जनवरी को शिकायत की। पुलिस ने साइबर सेल की टीम बनाई और जांच शुरू की। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से मिली जानकारी से 500 से ज्यादा लोगों को फोन करके सतर्क किया गया। पुलिस ने कहा कि अगले 48 घंटों में 500 करोड़ की ठगी होने वाली थी। गिरोह के सदस्यों पर बीएनएस की धारा 111(4), 61(2), 340, 336, 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत केस दर्ज किया गया है। एसएसपी नीरज कुमार जदौन ने टीम को 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।
साइबर ठगी रैकेट का विदेशी लिंक, 500 करोड़ की ठगी रोकने का दावा, जांच जारी
पुलिस की जांच में गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए हैं। ठगे गए पैसे को भारतीय बैंक अकाउंट्स से क्रिप्टो में बदलकर विदेश भेजा जाता था। आईपी एड्रेस से हांगकांग और दक्षिण पूर्व एशिया के लिंक मिले हैं। गिरोह के सदस्य कमीशन के बदले बैंक अकाउंट्स उपलब्ध कराते थे। गिरफ्तार सदस्यों में शेल कंपनियां चलाने वाले भी शामिल हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के साथ ही 600 से ज्यादा फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप बंद कर दिए। इन ग्रुप में हजारों लोग जुड़े थे। पुलिस ने 500 से ज्यादा संभावित पीड़ितों को व्यक्तिगत फोन करके ठगी से बचाया। गिरोह की योजना अगले 48 घंटों में 500 करोड़ की ठगी करने की थी। मामले की शिकायत दिनेश कुमार शर्मा ने की, जिन्होंने 1.10 करोड़ रुपये गंवाए। शर्मा को नवंबर में संपर्क किया गया और दिसंबर में निवेश शुरू करवाया गया। ग्रुप में फर्जी लाभ दिखाकर निवेश बढ़वाया गया। पुलिस ने साइबर क्राइम सर्कल ऑफिसर संजना सिंह की देखरेख में टीम बनाई। इंचार्ज इंस्पेक्टर बी डी पांडे और साइबर सेल टीम ने जांच की। पांच टीमों ने सात राज्यों में छापेमारी की। गिरफ्तार सदस्यों से मिली जानकारी से विदेशी लीडर्स को ट्रेस करने के लिए सीबीआई और इंटरपोल से संपर्क किया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है और और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। गिरोह के सदस्य संगठित तरीके से काम करते थे। ठगी का पैसा क्रिप्टो में बदलकर विदेश ट्रांसफर होता था। पुलिस ने मोबाइल, लैपटॉप और अन्य उपकरण जब्त किए हैं। एसएसपी ने टीम को इनाम दिया।
यह पूरी घटना दिखाती है कि साइबर ठगी के गिरोह कैसे संगठित तरीके से काम करते हैं। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करके बड़ी ठगी रोकी। जांच में विदेशी कनेक्शन की पुष्टि हुई है। गिरफ्तार सदस्यों से और जानकारी मिलने की उम्मीद है।
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