अयोध्या में करोड़ों का नजूल भूमि घोटाला: 18 साल पुराना नामांतरण रद्द, स्टांप चोरी का खेल उजागर, 100 बीघा से अधिक जमीन वापस सरकारी खाते में दर्ज। 

धार्मिक नगरी अयोध्या में एक बार फिर जमीन घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सहायक अभिलेख अधिकारी न्यायालय

Feb 4, 2026 - 16:14
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अयोध्या में करोड़ों का नजूल भूमि घोटाला: 18 साल पुराना नामांतरण रद्द, स्टांप चोरी का खेल उजागर, 100 बीघा से अधिक जमीन वापस सरकारी खाते में दर्ज। 
अयोध्या में करोड़ों का नजूल भूमि घोटाला: 18 साल पुराना नामांतरण रद्द, स्टांप चोरी का खेल उजागर, 100 बीघा से अधिक जमीन वापस सरकारी खाते में दर्ज। 

अयोध्या। धार्मिक नगरी अयोध्या में एक बार फिर जमीन घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सहायक अभिलेख अधिकारी न्यायालय ने 18 वर्ष पुराने नामांतरण आदेश को निरस्त करते हुए स्टांप चोरी के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। यह आदेश एक कथित संधिपत्र के आधार पर वर्ष 2006 में पारित किया गया था, जिसे अब अवैध और संदेहास्पद मानते हुए रद्द कर दिया गया है।

मामला माझा जमथरा स्थित प्रस्तावित मंदिर म्यूजियम के पास स्थित करीब 100 बीघा छह बिस्वा 10 धुर भूमि से जुड़ा है, जिसकी बाजार कीमत आज करोड़ों में आंकी जा रही है। यह भूमि लंबे समय तक निजी स्वामित्व में दिखाकर सरकारी नजूल संपत्ति पर कब्जे का माध्यम बनी रही।

मिली जानकारी के अनुसार, 30 जून 2006 को ब्रह्मानंद सरस्वती चैरिटेबल ट्रस्ट (नई दिल्ली) और भूदेव पुत्र महादेव शुक्ल, निवासी परिक्रमा रोड, अयोध्या के बीच एक संधिपत्र के आधार पर तत्कालीन सहायक अभिलेख अधिकारी ने नामांतरण आदेश पारित कर दिया था। जांच में सामने आया कि इस संधिपत्र में नियमानुसार स्टांप शुल्क अदा नहीं किया गया था, जिससे शासन को भारी राजस्व नुकसान पहुंचा। यही नहीं, दस्तावेजों की सत्यता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

3 फरवरी को पारित नए आदेश में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह भूमि मूल रूप से नजूल विभाग की थी और इसे अवैध रूप से निजी संपत्ति के रूप में दर्ज कराया गया। अब खाता खेवट संख्या-1, मोहाल एक्स्ट्रा, भूखंड संख्या-1 की पूरी जमीन पुनः नजूल विभाग के नाम दर्ज कर दी गई है। इस आदेश के बाद वर्षों से चली आ रही कब्जे की साजिश पर पानी फिर गया है और सरकारी जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

बता दे कि यह मामला जमथरा निवासी स्वर्गीय इश्तियाक की पत्नी अच्छी बीबी के कथित वंशज बताने वाले जमीर अहमद, नसीर अहमद, मुनीर अहमद सहित अन्य लोगों द्वारा दाखिल किया गया था।
इन लोगों ने न्यायालय में दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठाते हुए वाद दायर किया, जिसके बाद सुनवाई के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।  सूत्र बताते हैं कि इस भूमि सौदे में कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है, जिनके नाम अब तक सामने नहीं आए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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