Pilibhit : मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन पर मरौरी ब्लॉक में कार्यशाला आयोजित
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. ढाका ने बताया कि जंगल के किनारे औषधीय फसलों की खेती करने से संघर्ष कम हो सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने कहा
Report : कुँवर निर्भय सिंह, आईएनए, पीलीभीत- उत्तर प्रदेश
पीलीभीत में वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने विश्व प्रकृति निधि-भारत (WWF-India) के सहयोग से मरौरी ब्लॉक परिसर में मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में वन विभाग के अलावा कृषि, राजस्व, पुलिस, पंचायत एवं विकास, सिंचाई, विद्युत विभागों के प्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, बाघ मित्र और अन्य संबंधित लोग शामिल हुए। प्रभागीय वनाधिकारी, पीलीभीत टाइगर रिजर्व मनीष सिंह ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और स्थानीय ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। बाघ मित्रों, ग्राम प्रधानों और ईको-विकास समितियों के सदस्यों को मजबूत बनाकर संघर्ष प्रबंधन में उनकी मदद ली जाएगी। सभी विभागों का आपसी समन्वय बहुत जरूरी है।
प्रभागीय निदेशक, वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने बताया कि यह कार्यशाला पीलीभीत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। जिले में मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। ऐसी कार्यशालाओं से प्रशिक्षित बाघ मित्र और विभागीय कर्मचारी संघर्ष को काफी हद तक कम कर सकेंगे। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. ढाका ने बताया कि जंगल के किनारे औषधीय फसलों की खेती करने से संघर्ष कम हो सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित क्षेत्रों में पूरा सहयोग देगा। सीओ ट्रैफिक विधि मौर्य ने पुलिस विभाग की ओर से हमेशा सहयोग का आश्वासन दिया।
डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री ने कहा कि हाथी अपने पुराने इलाकों में अनुवांशिक कारणों से घूमते हैं। डीएफओ, उत्तर खीरी वन प्रभाग कीर्ति चौधरी ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व और दुधवा टाइगर रिजर्व के बीच हाथियों के कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए समन्वय पर जोर दिया। वरिष्ठ परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने तराई एलिफेंट रिजर्व, हाथियों के व्यवहार, प्राकृतिक आवास, कॉरिडोर और लंबे व छोटे समय के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने मुआवजा प्रक्रिया, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), समुदाय आधारित संस्थाओं और त्वरित प्रतिक्रिया दलों के गठन पर प्रस्तुति दी।
वरिष्ठ परियोजना अधिकारी, WWF-India नरेश कुमार ने वन्यजीवों से होने वाली जान-माल की क्षति के मुआवजे की प्रक्रिया बताई और कार्यशाला का संचालन किया। कार्यक्रम में एसडीओ रमेश चौहान, जेई दीपक शुक्ल (शारदा सागर), बीडीओ मरौरी लियाकत अली, वीडीओ अमरिया दिनेश सिंह, बीडीओ ललौरीखेड़ा लक्ष्मण प्रसाद, उप निरीक्षक शेर सिंह सहित कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। आज शनिवार को माधोटांडा स्थित गोमती उद्गम तीर्थ स्थल पर भी मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन की एक कार्यशाला आयोजित होगी।
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