Sambhal: शाही जामा मस्जिद विवाद: काशिफ खान ने लगाए ज़फर अली पर गंभीर आरोप, कहा 'जांच से नहीं डरते, सबके खाते खुलेंगे।
सम्भल की शाही जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। ज़फर अली एडवोकेट द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल की शाही जामा मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। ज़फर अली एडवोकेट द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के बीच काशिफ खान खुलकर सामने आए और उन्होंने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। काशिफ खान ने साफ कहा कि वे किसी भी जांच से डरने वाले नहीं हैं और अगर वक्फ बोर्ड या किसी सरकारी एजेंसी की जांच होती है तो वे हर तरह से सहयोग करने को तैयार हैं।
काशिफ खान ने बताया कि शाही जामा मस्जिद की इंतज़ामिया कमेटी कभी भी रजिस्टर्ड नहीं रही है। उन्होंने कहा कि वे 2022 से ही अपने स्वर्गीय चाचा लड्डन खां को कमेटी को पंजीकृत कराने की सलाह देते रहे, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। 24 नवंबर 2024 के दंगों के बाद खुद कमेटी के लोगों ने उन्हें बुलाकर वक्फ बोर्ड में पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा, जिसके बाद दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किया गया और उसमें उन्हें सचिव के रूप में नामित किया गया। मस्जिद के दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोपों को काशिफ खान ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सभी कागजात, आईडी और शपथ पत्र उन्हें कमेटी द्वारा ही सचिव की हैसियत से सौंपे गए थे। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद से जुड़े सबसे अधिक दस्तावेज वही लेकर आए और वक्फ बोर्ड व भारतीय पुरातत्व विभाग से लगातार पत्राचार भी वही करते रहे हैं।
30 मार्च 2024 को बनाए गए “शाही जामा मस्जिद ट्रस्ट” पर सफाई देते हुए काशिफ खान ने कहा कि यह ट्रस्ट उनकी व्यक्तिगत पहल थी, ताकि भविष्य में किसी कानूनी अड़चन की स्थिति में मस्जिद और उससे जुड़ी संपत्तियों को सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट का कमेटी से कोई लेना-देना नहीं है और उसमें किसी भी कमेटी सदस्य के हस्ताक्षर या दस्तावेजों का इस्तेमाल नहीं किया गया। चंदा वसूली के आरोपों पर पलटवार करते हुए काशिफ खान ने कहा कि ट्रस्ट का केनरा बैंक में खाता है, जिसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जा सकता है। उनका दावा है कि खाता शुरू से ही माइनस बैलेंस में है। वहीं, उन्होंने ज़फर अली एडवोकेट पर आरोप लगाया कि मस्जिद की वक्फ संपत्तियों से जुड़ी 52 दुकानों के किराए को लेकर भारी अनियमितताएं हैं और कई दुकानदार महीनों से किराया नहीं दे रहे, जिनमें ज़फर अली के करीबी लोग शामिल हैं। कानूनी भूमिका पर काशिफ खान ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जामा मस्जिद से जुड़े मामलों में मुख्य पक्षकार हैं और उनके पास हर दावे से जुड़े सबूत, ईमेल, व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड मौजूद हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि “जो लोग खुद जवाब नहीं दे पा रहे, वही हमें फर्जी और बाहरी बता रहे हैं।” अंत में काशिफ खान ने कहा कि समय आने पर सच्चाई सबके सामने होगी और जांच में यह साफ हो जाएगा कि मस्जिद के नाम पर कौन काम कर रहा है और कौन निजी फायदे उठा रहा है।
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