Sambhal: ‘कल्कि सम्भल’ फिल्म पर सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद का तीखा हमला, बोले— 'यह सच्चाई नहीं, नफरत फैलाने की साजिश'।
सम्भल के 1978 के दंगों और 24 नवंबर 2024 की घटना पर आधारित बताई जा रही फिल्म ‘कल्कि सम्भल’ को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल के 1978 के दंगों और 24 नवंबर 2024 की घटना पर आधारित बताई जा रही फिल्म ‘कल्कि सम्भल’ को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक नवाब इकबाल महमूद ने कड़ा विरोध जताया है। फिल्म में शामिल किए गए किरदारों ‘भाईजान’ और ‘अब्बाजान’ को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में विधायक ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सब सिर्फ पैसा कमाने और समाज में नफरत फैलाने का जरिया है।
नवाब इकबाल महमूद ने कहा कि सम्भल की स्थिति कभी भी वैसी नहीं रही, जैसी इस फिल्म के जरिए दिखाई जा रही है। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर कोई यह साबित कर दे कि सम्भल में 80, 84 या 85 लोगों की मौत हुई थी, तो वे अपने विधायक पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। उन्होंने यह बात विधानसभा में भी कही है और मुख्यमंत्री से भी यही मांग रखी है। सपा विधायक ने कहा कि यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है, ऐसे में किसी फिल्म या प्रचार के जरिए एकतरफा माहौल बनाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म के जरिए समाजवादी पार्टी और मुसलमानों के खिलाफ जानबूझकर नकारात्मक माहौल तैयार किया जा रहा है ताकि लोगों की भावनाओं को भड़काया जा सके। नवाब इकबाल महमूद ने हिंदुओं के कथित पलायन के आरोपों को भी बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि सम्भल में हिंदू और मुसलमान हमेशा मिल-जुलकर रहते आए हैं और कोई भी यह साबित नहीं कर सकता कि किसी को जबरन पलायन के लिए मजबूर किया गया हो। उन्होंने 2024 में जामा मस्जिद को लेकर हुए विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि अब इन मुद्दों को 2027 के चुनावों से जोड़कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए एक कमेटी बनाने की मांग की, जिसमें सत्ता पक्ष के सात और विपक्ष के तीन सदस्य हों, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
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