Special : कभी बेंचते थे गली- गली दूध, आज हैं 400 लग्जरी कारों के मालिक, पढ़ें अनकही सक्सेज स्टोरी
रमेश बाबू बैंगलोर के रहने वाले हैं। सात साल की उम्र में पिता की मौत हो गई। परिवार गरीबी में जी रहा था। मां घरों में खाना बनाती थीं। रमेश बाबू ने 13 साल की उम्र में दूध और अखबा
दूध और अखबार बेचने वाले लड़के ने अपनी मेहनत से कार रेंटल का बड़ा बिजनेस खड़ा किया। आज उनके पास 400 से ज्यादा लग्जरी कारें हैं। उनका नाम रमेश बाबू है और वे बैंगलोर से हैं। गरीबी के दिनों से निकलकर उन्होंने बार्बर का काम जारी रखते हुए रेंटल सर्विस शुरू की। 1993 में पहली कार खरीदने से लेकर अब तक का सफर। अब इस पूरी कहानी के तथ्यों को विस्तार से समझते हैं।
दूध-अखबार बेचने वाले लड़के से 400 लग्जरी कारों के मालिक तक पहुंचा
रमेश बाबू का जन्म बैंगलोर में हुआ था। वे सात साल की उम्र में थे जब उनके पिता की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद परिवार को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। परिवार में तीन भाई-बहन थे और मां घरों में खाना बनाकर परिवार चलाती थीं। रमेश बाबू ने 13 साल की उम्र से काम शुरू किया। उन्होंने दूध और अखबार बेचने का काम किया। स्कूल जाते समय सुबह अखबार बेचते थे और शाम को दूध सप्लाई करते थे। परिवार इतना गरीब था कि कई बार तीन समय का खाना नहीं मिलता था। रमेश बाबू ने इन मुश्किलों के बीच पढ़ाई जारी रखी। उनके पिता की एक छोटी बार्बर शॉप थी, जिसे रमेश बाबू ने संभाला। उन्होंने बार्बर का काम सीखा और शॉप चलाने लगे।
1993 में उन्होंने अपनी पहली कार खरीदी, जो मारुति ओमनी थी। यह कार उन्होंने रेंट पर देने के लिए खरीदी थी। इस कार से मिलने वाली कमाई से उन्होंने और कारें खरीदीं। धीरे-धीरे उनका बिजनेस बढ़ता गया। आज उनका बिजनेस रमेश टूर्स एंड ट्रेवल्स के नाम से चलता है। इसमें 400 से ज्यादा वाहन हैं, जिनमें लग्जरी कारें शामिल हैं।
इन कारों में रोल्स रॉयस घोस्ट, मर्सिडीज मेबैक, बीएमडब्ल्यू, जैगुआर, ऑडी, लैंड रोवर, मर्सिडीज सी-क्लास, ई-क्लास, एस-क्लास, कंटेसा, विन्टेज कारें, मिनी बसें और वैन शामिल हैं। रमेश बाबू अभी भी अपनी बार्बर शॉप में काम करते हैं। उनका बिजनेस सेलिब्रिटीज को सर्विस देता है, जैसे अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर। रमेश बाबू का सफर 1993 से शुरू हुआ जब उन्होंने पहली कार रेंट पर दी। इससे मिली कमाई से उन्होंने और निवेश किया। उनका बिजनेस अब बड़ा हो चुका है। वे फोर्ब्स की लिस्ट में भारत के 140 अरबपतियों में से एक हैं। उनका कार कलेक्शन बैंगलोर में मशहूर है। रमेश बाबू ने कभी हार नहीं मानी और छोटे काम से बड़ा साम्राज्य बनाया। उनके परिवार की स्थिति अब बदल चुकी है। वे बैंगलोर में रहते हैं और बिजनेस संभालते हैं। रमेश बाबू ने 13 साल की उम्र से दूध और अखबार बेचना शुरू किया। पिता की मौत के बाद परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। 1993 में पहली मारुति ओमनी कार खरीदी, जो रेंट पर दी गई। इससे बिजनेस की शुरुआत हुई।
गरीबी से निकलकर बनाया कार रेंटल का बड़ा साम्राज्य, 400 से ज्यादा वाहन
रमेश बाबू के पिता की मौत सात साल की उम्र में हुई। परिवार बैंगलोर में रहता था। मां घरों में काम करके परिवार पालती थीं। रमेश बाबू ने स्कूल के साथ काम किया। उन्होंने अखबार और दूध बेचा। 13 साल की उम्र में वे विभिन्न काम करते थे ताकि परिवार चल सके। पिता की बार्बर शॉप को उन्होंने संभाला। बार्बर का काम सीखा और शॉप चलाई। 1993 में उन्होंने मारुति ओमनी खरीदी। यह कार रेंट पर देने के लिए थी। रेंट से मिलने वाली कमाई से उन्होंने और कारें जोड़ीं। उनका बिजनेस बढ़ता गया। अब रमेश टूर्स एंड ट्रेवल्स में 400 से ज्यादा वाहन हैं। इनमें लग्जरी सेडान, मिनी बसें, विन्टेज कारें शामिल हैं। कारों की लिस्ट में रोल्स रॉयस सिल्वर घोस्ट, मर्सिडीज मेबैक, जैगुआर लैंड रोवर, बीएमडब्ल्यू 5, 6 और 7 सीरीज, ऑडी, मर्सिडीज ई-क्लास सेडान शामिल हैं। रमेश बाबू का बिजनेस सेलिब्रिटीज को कार रेंट देता है।
उन्होंने अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर जैसे लोगों को सर्विस दी है। रमेश बाबू अभी भी बार्बर का काम करते हैं। वे अपनी शॉप में ग्राहकों के बाल काटते हैं। उनका सफर प्रेरणा का स्रोत है। गरीबी से निकलकर उन्होंने बड़ा बिजनेस बनाया। फोर्ब्स में वे भारत के अरबपतियों में शामिल हैं। उनका कार कलेक्शन 400 से ज्यादा है। बिजनेस की शुरुआत छोटी थी लेकिन अब बड़ा हो चुका है। रमेश बाबू ने जोखिम लिया और सफल हुए। उनका परिवार अब सुखी है। वे बैंगलोर में बिजनेस चलाते हैं। कार रेंटल का बिजनेस उनका मुख्य काम है। बार्बर शॉप अभी भी चल रही है। रमेश बाबू का नाम बैंगलोर के बिलियनेयर बार्बर के रूप में जाना जाता है। उनका सफर 30 साल से ज्यादा का है। 1993 से शुरू करके अब तक उन्होंने 400 से ज्यादा कारें जोड़ीं। रमेश बाबू का बिजनेस रमेश टूर्स एंड ट्रेवल्स है, जिसमें 400 से ज्यादा वाहन हैं। लग्जरी कारें जैसे रोल्स रॉयस, मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू शामिल। अभी भी बार्बर शॉप में काम करते हैं। सेलिब्रिटीज जैसे अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर को सर्विस दी है।
बैंगलोर के बार्बर ने मेहनत से बनाई लग्जरी कारों की फ्लीट, जानिए पूरी कहानी
रमेश बाबू बैंगलोर के रहने वाले हैं। सात साल की उम्र में पिता की मौत हो गई। परिवार गरीबी में जी रहा था। मां घरों में खाना बनाती थीं। रमेश बाबू ने 13 साल की उम्र में दूध और अखबार बेचना शुरू किया। स्कूल के साथ काम करते थे। पिता की बार्बर शॉप को संभाला। बार्बर बनकर शॉप चलाई। 1993 में पहली कार मारुति ओमनी खरीदी। इसे रेंट पर दिया। कमाई से और कारें जोड़ीं। बिजनेस बढ़ा। अब 400 से ज्यादा कारें हैं। इनमें लग्जरी ब्रांड जैसे रोल्स रॉयस घोस्ट, मर्सिडीज मेबैक, जैगुआर, बीएमडब्ल्यू, ऑडी शामिल हैं। विन्टेज कारें, मिनी बसें, वैन भी हैं। रमेश टूर्स एंड ट्रेवल्स उनका बिजनेस है। वे फोर्ब्स की लिस्ट में अरबपति हैं। भारत में 140 अरबपतियों में शामिल। अभी भी बार्बर का काम करते हैं।
शॉप में ग्राहकों के बाल काटते हैं। बिजनेस सेलिब्रिटीज को सर्विस देता है। अमिताभ बच्चन और सचिन तेंदुलकर जैसे लोगों ने उनकी कारें रेंट की हैं। रमेश बाबू का सफर 30 साल से ज्यादा का है। छोटे काम से बड़ा बिजनेस बनाया। गरीबी से निकलकर सफल हुए। परिवार की स्थिति अब अच्छी है। वे बैंगलोर में रहते हैं। कार कलेक्शन उनका बड़ा हिस्सा है। बिजनेस की कमाई से कारें खरीदीं। जोखिम लेकर निवेश किया। सफलता मिली। उनका नाम बिलियनेयर बार्बर है। बैंगलोर में उनका कार कलेक्शन सबसे बड़ा है। रमेश बाबू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेहनत से आगे बढ़े। अब उनका बिजनेस स्थापित है। कार रेंटल का काम जारी है। बार्बर शॉप भी चल रही है। उनका सफर दूध-अखबार बेचने से लग्जरी कारों तक का है। यह पूरी कहानी दिखाती है कि रमेश बाबू ने गरीबी से निकलकर बड़ा बिजनेस बनाया। आज उनके पास 400 से ज्यादा लग्जरी कारें हैं। उनका नाम बिलियनेयर बार्बर है।
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