'जैसा हमने सोचा था...वैसा ही नतीजा दिख रहा है': मनोज तिवारी ने बंगाल और दक्षिण में भाजपा की जीत का किया दावा।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न होते ही राजनीतिक गलियारों में बयानों की
- एग्जिट पोल्स के बाद मनोज तिवारी का बड़ा बयान: बोले- बंगाल में ममता का किला ढहा, तमिलनाडु में चौंकाएगी भाजपा
- चुनाव 2026: मनोज तिवारी ने जनता का जताया आभार, कहा- असम में वापसी और बंगाल में परिवर्तन तय
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को संपन्न होते ही राजनीतिक गलियारों में बयानों की बाढ़ आ गई है। दिल्ली से भाजपा सांसद और लोकप्रिय अभिनेता-गायक मनोज तिवारी ने इन चुनावों के बाद आए एग्जिट पोल्स और जमीनी रुझानों पर अपनी पहली विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि परिणामों की जो दिशा अभी दिखाई दे रही है, वह ठीक वैसी ही है जैसी पार्टी ने अपनी रणनीति और सर्वे के दौरान सोची थी। मनोज तिवारी का यह बयान न केवल उनके आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भाजपा इस बार क्षेत्रीय राजनीति के समीकरणों को बदलने के प्रति कितनी गंभीर है। मनोज तिवारी ने अपने संबोधन में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता पिछले कई वर्षों के कुशासन और प्रशासनिक विफलताओं से तंग आ चुकी थी। मतदान का भारी प्रतिशत इस बात का गवाह है कि लोग अब बदलाव चाहते हैं। तिवारी के अनुसार, जिस तरह से बंगाल के कोने-कोने में 'परिवर्तन' की गूंज सुनाई दे रही थी, वह अब आंकड़ों में तब्दील होती दिख रही है। उन्होंने संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस के गढ़ों में इस बार भाजपा ने जबरदस्त सेंध लगाई है और नतीजे आने पर एक नया राजनैतिक परिदृश्य सामने आएगा।
दक्षिण भारत की राजनीति, विशेषकर तमिलनाडु को लेकर भी मनोज तिवारी ने बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में भाजपा और एआईडीएमके का गठबंधन एक ऐसी शक्ति बनकर उभरा है जिसे पहले कम करके आंका जा रहा था। मनोज तिवारी के अनुसार, तमिलनाडु में मुकाबला अब केवल एकपक्षीय नहीं रहा है, बल्कि भाजपा वहां एक मुख्य खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने तमिलनाडु की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वहां के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल और राज्य की सांस्कृतिक पहचान के समन्वय को स्वीकार किया है, जिसका असर मतगणना वाले दिन साफ नजर आएगा। 2026 के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में 90% से अधिक मतदान दर्ज किया गया है, जो राज्य के चुनावी इतिहास के सबसे ऊंचे आंकड़ों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतना अधिक मतदान हमेशा सत्ता विरोधी लहर या बड़े राजनैतिक बदलाव का सूचक होता है।
असम विधानसभा चुनाव के संदर्भ में मनोज तिवारी ने भाजपा की हैट्रिक की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि असम में जिस तरह का विकास कार्य पिछले दो कार्यकाल में हुआ है, उसका फल पार्टी को मिलने जा रहा है। असम की जनता ने घुसपैठ और पहचान के मुद्दों पर सरकार की स्पष्ट नीति का समर्थन किया है। तिवारी का मानना है कि असम में भाजपा की जीत न केवल राज्य के लिए बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। उनके अनुसार, असम के नतीजे यह स्पष्ट कर देंगे कि जनता अब काम की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है।
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने जिस तरह से स्थानीय मुद्दों और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाया, उसका श्रेय भी मनोज तिवारी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं ने बंगाल के जमीनी स्तर पर जो मेहनत की, वह अब रंग ला रही है। मनोज तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी ने प्रत्येक बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत की थी, जिससे वोटिंग के दिन कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। उनका यह बयान कि "जैसा सोचा था वैसा ही हो रहा है", सीधे तौर पर पार्टी की माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति की सफलता की ओर इशारा करता है। मनोज तिवारी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे अब बहाने ढूंढने लगे हैं। जब भी नतीजे उनके खिलाफ जाते हैं, वे संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि 4 मई को जब आधिकारिक परिणाम घोषित होंगे, तब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। तिवारी के मुताबिक, भाजपा केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के संकल्प के साथ मैदान में उतरी थी और बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक लोगों ने इस मंशा को समझा है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान संपन्न होना लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है।
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