Sambhal: महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम- बिल पास फिर भी ‘स्पेशल सत्र’ क्यों? बर्क ने उठाए तीखे सवाल।
सम्भल के दीपा सराय स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में बर्क ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर फैसला लेने का अधिकार
उवैस दानिश, सम्भल
- सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का वार- जब अधिकार संसद के पास, तो विधानसभा का सत्र किसलिए?
महिला आरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर सियासत गर्मा गई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुलाए गए विशेष सत्र को लेकर समाजवादी पार्टी के सम्भल से सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि जब महिला आरक्षण कानून पहले ही 2023 में संसद से पास हो चुका है, तो अब राज्य विधानसभा में इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाने का क्या औचित्य है।
सम्भल के दीपा सराय स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में बर्क ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे विषय पर फैसला लेने का अधिकार संसद के पास होता है, न कि विधानसभा के पास। ऐसे में यह सत्र केवल दिखावा या राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नजर आता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि बिल पास होने के बावजूद अब तक उसे लागू नहीं किया गया। बर्क के मुताबिक, “सरकार महिलाओं को अधिकार देने के बजाय इस मुद्दे को बार-बार उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रही है।” उन्होंने कहा कि 2023 से अब तक काफी समय बीत चुका है, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव दिखाई नहीं देता। सपा सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रहा है और संसद में बिल पास कराने में उसकी अहम भूमिका रही है। हालांकि, परिसीमन के नाम पर हो रही राजनीति पर उन्होंने आपत्ति जताई और इसे नया विवाद खड़ा करने की कोशिश बताया। बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए बर्क ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने से पहले सत्ताधारी दल को अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में भाजपा नेताओं पर लगे आरोपों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के रुख का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के सम्मान को व्यवहार में भी साबित करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि एक महिला विधायक के घायल होने पर खुद अखिलेश यादव अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल लिया था। अंत में बर्क ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जब महिला आरक्षण कानून लागू करने का अधिकार केंद्र के पास है, तो राज्य में विशेष सत्र बुलाकर क्या हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को साफ करना चाहिए कि इस कदम के पीछे असली मकसद क्या है, क्योंकि जनता अब जवाब चाहती है।
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