Special Article: प्रदेश के विकास का एक्सप्रेस वे बनेगा गंगा एक्सप्रेस वे। 

उत्तर प्रदेश में अवस्थापना विकास के क्रम में निर्मित गंगा एक्सप्रेस वे आम जनमानस के लिए खुल रहा है जिसे    प्रदेश के विकास में मील

By INA News Desk
Apr 29, 2026 - 22:16
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Special Article: प्रदेश के विकास का एक्सप्रेस वे बनेगा गंगा एक्सप्रेस वे। 
प्रदेश के विकास का एक्सप्रेस वे बनेगा गंगा एक्सप्रेस वे। 
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लेखक- मृत्युंजय दीक्षित 

उत्तर प्रदेश में अवस्थापना विकास के क्रम में निर्मित गंगा एक्सप्रेस वे आम जनमानस के लिए खुल रहा है जिसे    प्रदेश के विकास में मील का पत्थर माना जा रहा  है। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस वे प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र (दिल्ली -एनसीआर) को पूर्वी क्षेत्र से जोड़ने वाला पहला सीधा हाई स्पीड एक्सप्रेस वे है। इस परियोजना पर 36,230 करोड़ की लागत आर्इ है। यह एक्सप्रेस वे मेरठ के बिजौली गाँव से प्रारंभ होकर बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, शाहजहांपुर, संभल, बंदायू, उन्नाव, हरदोई, प्रतापगढ़, रायबरेली होते हुए  प्रयागराज जिले के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा। इस एक्सप्रेस वे के प्रारंभ हो जाने के बाद देश के एक्सप्रेस वे नेटवर्क में यूपी की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत हो जाएगी और परियोजनाओं की कुल लंबाई  1910 किमी हो जाएगी। छह लेन का यह एक्सप्रेस वे पूरी तरह ग्रीनफील्ड व एक्सेस -कंट्रोल्ड है। इसमें 3.75 मीटर चौड़ी सर्विस रोड, 17 टोल प्लाजा 8 मुख्य पुल और 381 अंडरपास शामिल हैं। 

यह भारत का पहला ऐसा एक्सप्रेस है जिस पर होटल, ढाबा और ईवी चार्जिंग स्टेशन से लेकर अस्पताल  तक बनाए गए हैं। इस एक्सप्रेस वे पर विश्वस्तरीय फूड चेन और मोटेल तक की सुविधाएं मिलेगी। 594 किमी लंबे इस एक्सप्रेस वे का 80 प्रतिशत निर्माण अडानी इंटरप्राइजेज ने किया है।अडानी ने प्रयागराज से बदायूं तक 464 किमी लंबा एक्सप्रेस वे बनाया है जबकि शेष 20 प्रतिशत आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर  ने बनाया है। 

एक्सप्रेस वे मतल्टीनेशनल चेन भी उपलब्ध - एक्सप्रेस वे पर लखनऊ के खानपान और चिकनकारी की झलक दिखाई पड़ेगी। इस वे पर एक बड़ा डाइनिंग फूड एरिया विकसित किया गया है। पहली बार किसी एक्सप्रेस वे पर ट्रक लेन बनाया गया है। मोटेल भी तैयार हो गया है जहां विश्राम के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं  से युक्त कमरे उपलब्ध हैं। स्टारबक्स जैसे बड़े ब्रांड के साथ गंगा भोग ढाबा भी है। इसमें लोकप्रिय मुरथल ढाबे को लाने का भी प्रयास चल रहा है। यहां पर एक ट्रामा सेन्टर भी तैयार किया गया है।एक्सप्रेस वे पर सुविधा केंद्रों में बच्चों के लिए चिल्ड्रन प्ले एरिया भी बनाया गया है जहां बच्चों के खेलने के लिए झूला पार्क भी बनाया गया है।ड्राइवरों के लिए भी अलग- अलग विश्राम एरिया बनाया गया है।हर क्षेत्र में  वाहनों के लिए सर्विस सेंटर बनाया गया  है।यह एक्सप्रेस वे 12 जिलों  को जोड़ते हुए प्रयागराज से मेरठ की दूरी मात्र 6 घंटे में समेट देगा। वाहनों की 120 किमी प्रति घंटा गति, एयर स्ट्रिप,  हाईटेक टेाल और दुर्घटना रोकने वाली अलर्ट स्ट्रिप्स जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस यह एक्सप्रेस वे प्रदेश की कनेक्टिविटी के परिदृश्य को बदलकर रख देगा। 

वायुसेना के लिए भी अहम बनेगा एक्सप्रेस वे - यह एक्सप्रेस वे  नागरिकों का सफर आसान बनाने के साथ ही भारतीय वायुसेना की ताकत भी बनने वाला है। एक्सप्रेस वे पर शाहजहांपुर के जलालाबाद में 3.5 किमी  की हवाई पट्टी का भी निर्माण किया गया है। आपातकालीन स्थिति व युद्ध होने पर रणनीतिक तौर पर यह हवाई पट्टी लड़ाकू विमानों के उतरने व उड़ान भरने  के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी। इस हवाई पट्टी का निर्माण सभी प्रकार के लड़ाकू व परिवहन विमानों के हिसाब से किया गया है। इस पर राफेल सुखोई -0 एमकेआई मिराज 2000 जगुआर और मिग 29 जैसे लडाकू और सी -130 जे  सुपर हरक्यूलिस  और एएन -32 जैसे वायुसेना के विमान उतरने के साथ-साथ  उड़ान  भी भर सकेंगे। इस पर रात में भी लड़ाकू विमानो के उतरने और उड़ान भरने  की सुविधा होगी। इसके लिए एक्सप्रेस वे पर प्रीसिज़न  अप्रोच लाइंटिंग  सिस्टम व उन्नत नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही इाई इंटेसिटी रनवे लाइटिंग का उपयोग किया गया है। हवाई पट्टी की सुरक्षा के लिए 250 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जो किसी भी आपातकालीन स्थिति पर नज़र रखने के लिए सहायक हैं।

इस एक्सप्रेस वे का संचालन पूरी तरह आरम्भ हो जाने के बाद 12 जिलों के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी जिससे  क्षेत्र के युवाओं  को रोजगार के अवसर मिलेंगे तथा पलायन कम होगा। प्रदेश सरकार की योजना इसके किनारे 27 औद्योगिक क्लस्टर  बनाने की है जिसके लिए भूमि का अधिग्रहण हो चुका है और  आवंटन चल रहा है।इससे रसद आपूर्ति, खाद्य प्रसंस्करण  वस्त्र उद्योग और विनिर्माण  क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी। मेरठ के खेल उद्योग, हापुड़ के  हथकरघा, बंदायू के जरी जरदोजी और प्रयागराज के कृषि उत्पादों को अब दिल्ली और पूर्वांचल के बाजारो तक पहुंचना आसान होगा।

प्रमुख विशेषताएं - इस एक्सप्रेस वे की पूरी सड़क पर जल संचयन प्रणाली लगाई गई है ताकि वर्षा का जल सीधे  जमीन के अंदर जाए और भूजल स्तर पर बना रहे। यह भारत का सबसे लंबा निरंतर नियंत्रित  प्रवेश एक्सप्रेस वे है जहां आवारा पशुओं व स्थानीय यातायत के अनियंत्रित प्रवेश को पूरी तरह से रोका गया है। यह परियोजना  टिकाऊ इंजीनियरिंग का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके निर्माण में भारी मात्रा में कोयले की राख का उपयोग किया गया है जो प्रदूषणा कम करने में  सहायक है। पहले सभ्यताएं नदियों के किनारे बसती थीं किंतु  अब एक्सप्रेस वे के किनारे होती हैं इसे ध्यान मे रखते हुए एक्सप्रेस वे किनारे 18 लाख से अधिक पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा एक्सप्रेस वे के निर्माण की गुणवत्ता को  एक्सीलेंट रेटिंग मिली है । 

विशिष्ट सुरक्षा तकनीक भी - यहां पर विशिष्ट सुरक्षा तकनीक का प्रयोग किया गया है। सड़क के दोनों किनारों पर व्हाइट एलर्ट स्ट्रिप लगाई गई है। यदि किसी चालक को झपकी आ जाए  और वाहन इन स्ट्रिप पर चढ़  जाए तो तेज कंपन और आवाज पैदा होगी जिससे चालक तुरंत सतर्क हो जाएगा और दुर्घटना टल जाएगी। इस सड़क पर चलने के दौरान झटके और कंपन महसूस नही होंगे। 

मंदिर आर्थिकी व पर्यटन को गति मिलेगी - गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण हो जाने के बाद अब मंदिर आधारित आर्थिकी व पर्यटन को भी गति मिलेगी। यह एक्सप्रेस वे यात्रा को ही आसान नहीं करेगा अपितु प्रदेश में आध्यात्मिक व धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा । 12 जिलों  से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेस वे से प्रमुख आध्यात्मिक व धार्मिक स्थल जुड़ रहे हैं – इनमें गढ़मुक्तेश्वर,  कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिकादेवी शक्ति पीठ और त्रिवेणी संगम शामिल हैं। एक्सप्रेस वे शुरू हो जाने के बाद श्रद्धालु इन तीर्थों के दर्शन आसानी से कर सकेंगे । आगामी समय में वाराणसी, मिर्जापुर और सोनभद्र तक इसका विस्तार किया  जिससे वाराणसी , विन्ध्याचल और अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं  की संख्या में वृद्धि होगी। 

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