Hardoi : शिल्पी हत्याकांड के बाद शोक संतप्त परिवार से मिले अखिलेश यादव, भाई ने जताई इंसाफ की आस
पीड़िता के भाई के अनुसार घटना के बाद से उनका पूरा परिवार बेहद डरे हुए माहौल में रहने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के कुछ रसूखदार लोग उनके घर आकर मारपीट करते थे और उन्हें डराते-धमकाते थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने इन शिकायतों
हरदोई जिले के गढ़ी रसूलपुर गांव में हुए चर्चित शिल्पी हत्याकांड को लेकर लंबे समय से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे परिवार के पास जब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पहुंचे, तो उनके बीच इंसाफ की एक नई उम्मीद दिखाई दी। इस मुलाकात के बाद पीड़िता के भाई ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें भरोसा होने लगा है कि उनकी बहन को न्याय मिल पाएगा। काफी समय से दर-दर की ठोकरें खा रहे परिवार ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि प्रशासन की ओर से अब तक उन्हें वह सहयोग नहीं मिल सका था, जिसकी वे अपेक्षा कर रहे थे।
पीड़िता के भाई के अनुसार घटना के बाद से उनका पूरा परिवार बेहद डरे हुए माहौल में रहने को मजबूर है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के कुछ रसूखदार लोग उनके घर आकर मारपीट करते थे और उन्हें डराते-धमकाते थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने इन शिकायतों पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया। परिवार का कहना है कि आरोपियों के हौसले इतने ज्यादा बढ़े हुए थे कि वे अपनी संपत्ति बेचकर भी सजा से बचने का दावा करते थे। इसी कारण से परिवार को लगने लगा था कि उनकी आवाज को अनसुना कर दिया जाएगा और उन्हें कभी न्याय नहीं मिलेगा।
अखिलेश यादव ने परिवार के सदस्यों से काफी देर बातचीत की और उनकी पूरी बात को ध्यान से सुना। पीड़िता के भाई ने जानकारी दी कि अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले की जांच किसी बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसी या सीबीआई से कराने की मांग उठाने का वादा किया है। उन्होंने परिवार को आश्वस्त किया कि वह इस लड़ाई में उनके साथ हैं और दोषियों को सजा दिलवाने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाएंगे। इस आश्वासन के बाद परिवार को महसूस हुआ कि अब उनकी लड़ाई को एक बड़ा और मजबूत साथ मिल गया है।
सहायता के तौर पर अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद का चेक भी सौंपा। परिवार ने सहायता मिलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन उनका कहना है कि उनके लिए आर्थिक मदद से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण दोषियों को सजा मिलना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक उनकी बहन के गुनहगारों को सख्त सजा नहीं मिल जाती, तब तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। परिवार ने सरकार से भी मांग की है कि इस मामले में किसी तरह का भेदभाव न किया जाए और दोषियों के खिलाफ वैसी ही सख्त कार्रवाई की जाए जैसी अन्य बड़े अपराधों में की जाती है। उन्होंने मांग की कि दोषियों की संपत्तियों पर भी कानून का डंडा चले ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिम्मत न कर सके।
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