मालिक के पास छोड़ गये थे मासूम बच्ची, वापस लौटे तो पेट दर्द उठा और .... पढ़िए दिल दहला देने वाली घटना।
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले हल्द्वानी के हल्दूचौड़ क्षेत्र से एक बेहद दुखद और विचलित कर देने वाला मामला
- हल्द्वानी के हल्दूचौड़ इलाके में दस वर्षीय मासूम बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत, क्षेत्र में पसरा गहरा सन्नाटा
- माता-पिता की अनुपस्थिति में खेत मालिक के पास रुकी थी नन्ही मासूम, अचानक पेट में उठा तेज दर्द बना जानलेवा
- अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम चुकी थीं मासूम की सांसें, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस तफ्तीश पर टिकी मौत की असली वजह
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले हल्द्वानी के हल्दूचौड़ क्षेत्र से एक बेहद दुखद और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक खेत में काम करने वाले खेतिहर मजदूर की महज दस साल की मासूम बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के समय बच्ची के माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे और वे किसी पारिवारिक कार्य से दूसरे राज्य गए हुए थे। अपनी अनुपस्थिति के दौरान वे अपनी लाडली को अपने उसी मालिक के पास छोड़ गए थे, जिसके खेतों पर वे आजीविका कमाने के लिए दिन-रात पसीना बहाते हैं। इस बीच अचानक बच्ची की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई और उसे आनन-फानन में नजदीकी बड़े चिकित्सालय ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस दुखद घटना ने एक झटके में एक गरीब हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन ली हैं और पूरे गांव में इस समय केवल मातम का माहौल देखा जा रहा है।
इस हृदयविदारक घटना का शिकार हुई मासूम बच्ची का नाम पायल था, जो अपने माता-पिता के चार बच्चों में बीच की संतान थी। पायल के पिता रामपाल लंबे समय से हल्दूचौड़ इलाके में ही एक स्थानीय व्यक्ति के खेतों पर किसानी और मजदूरी का काम करके अपने बड़े परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। रामपाल अपनी पत्नी और चारों बच्चों के साथ खेत मालिक के परिसर के पास ही बने आवास में निवास करते हैं। कुछ दिनों पहले रामपाल को अपनी पत्नी के साथ उत्तर प्रदेश के बहेड़ी के पास स्थित अपने पैतृक गांव किसी आवश्यक कार्यवश जाना पड़ा था। चूंकि बच्चों की पढ़ाई और अन्य दिक्कतें थीं, इसलिए उन्होंने अपनी दस वर्षीय बेटी पायल को अपने उसी मालिक के भरोसे छोड़ दिया था, जिनके यहां वे काम करते थे। उन्हें इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि उनका यह फैसला उनकी मासूम बेटी से हमेशा के लिए उनका साथ छुड़ा देगा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के सामने बच्चों की देखभाल हमेशा से एक बहुत बड़ी चुनौती रही है। जब इन गरीब परिवारों को किसी जरूरी काम से अपने मूल निवास स्थान पर जाना पड़ता है, तो सामाजिक और आर्थिक निर्भरता के कारण वे अक्सर अपने बच्चों को अपने नियोक्ताओं या मकान मालिकों की देखरेख में छोड़ जाते हैं। हल्द्वानी की यह घटना इस प्रकार की सामाजिक व्यवस्था के बीच रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार के दिन जब बच्ची अपने माता-पिता के बिना मालिक के घर पर रह रही थी, तो उसने सामान्य रूप से भोजन किया था। दोपहर का खाना खाने के कुछ ही समय बाद अचानक उसके पेट में बहुत तेज और असहनीय दर्द होने लगा। देखते ही देखते उसकी शारीरिक स्थिति बहुत ज्यादा खराब होने लगी और वह दर्द से बुरी तरह तड़पने लगी। बच्ची की हालत को बिगड़ता देख वहां मौजूद खेत मालिक और उनके परिवार के लोग घबरा गए। उन्होंने तुरंत इस बात की सूचना बहेड़ी गए हुए पिता रामपाल को फोन पर दी और बताया कि पायल की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा गंभीर हो गई है और वह पेट के दर्द से बेहाल है। इसके तत्काल बाद मालिक खुद ही उसे गंभीर अवस्था में लेकर हल्द्वानी के डॉक्टर सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल की तरफ भागे ताकि उसे समय पर इलाज मिल सके।
हल्द्वानी के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में जब खेत मालिक उस मासूम बच्ची को लेकर पहुंचे, तो वहां तैनात डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उसे अपनी निगरानी में ले लिया। अस्पताल के वरिष्ठ सर्जनों और डॉक्टरों ने तत्काल उसकी नब्ज और धड़कनों की जांच की, लेकिन दुर्भाग्य से बच्ची के शरीर में किसी भी प्रकार की हलचल या जीवन के लक्षण शेष नहीं थे। डॉक्टरों ने जांच के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया और बताया कि अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी सांसें पूरी तरह से थम चुकी थीं। चिकित्सालय के वरिष्ठ सर्जन के मुताबिक, जब बच्ची को आपातकालीन कक्ष में लाया गया, तो उसकी धड़कनें पूरी तरह बंद हो चुकी थीं और उसे बचाने का कोई भी मौका डॉक्टरों के पास नहीं बचा था। इस सूचना ने अस्पताल परिसर में मौजूद सभी लोगों को स्तब्ध कर दिया।
बेटी की अचानक तबीयत बिगड़ने की खबर पाते ही बदहवास माता-पिता भी बहेड़ी से सीधे हल्द्वानी अस्पताल के लिए रवाना हो गए थे। जब वे अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें अपनी लाडली का बेजान शरीर मिला, जिसे देखकर माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक बच्ची के पिता रामपाल ने रुंधे गले से बताया कि उन्हें केवल यह जानकारी दी गई थी कि खाना खाने के बाद उनकी बेटी के पेट में अचानक तेज दर्द शुरू हुआ था और कुछ ही देर में उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल लाना पड़ा। एक गरीब पिता के लिए अपनी बेटी की इस तरह अचानक हुई मौत पर विश्वास करना बेहद कठिन हो रहा था। अस्पताल प्रशासन की लिखित सूचना के बाद स्थानीय पुलिस विभाग भी हरकत में आया और उन्होंने शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू की। शुक्रवार के दिन पुलिस प्रशासन की देखरेख में डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा मृत बच्ची के शव का विधिवत पोस्टमार्टम पैनल प्रक्रिया के तहत किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया है। चूंकि मामला एक मासूम बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा हुआ है, इसलिए पुलिस इसे बेहद संवेदनशीलता से ले रही है। विसरा और अन्य जरूरी नमूनों को सुरक्षित रख लिया गया है ताकि रासायनिक परीक्षण के जरिए यह स्पष्ट हो सके कि अचानक पेट में हुए इस जानलेवा दर्द और मौत का वास्तविक कारण क्या था। क्या यह किसी प्रकार का फूड प्वाइजनिंग का मामला था या फिर इसके पीछे कोई अन्य अंदरूनी चिकित्सीय जटिलता थी, इसकी पूरी सच्चाई विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।
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