मामूली विवाद में पति ने गैस सिलेंडर से वार कर पत्नी को उतारा मौत के घाट, हत्यारा पति गिरफ्तार।
हरियाणा के गुरुग्राम में कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को ठेंगा दिखाते हुए एक शख्स ने अपनी पत्नी की जान ले ली। यह मामला
- साइबर सिटी में सनसनी: मामूली विवाद के बाद आपा खोया, भारी सिलेंडर से सिर कुचलकर की जीवनसंगिनी की हत्या
- गुरुग्राम पुलिस ने फरार आरोपी सुनील को दबोचा, पत्नी की हत्या के बाद भागने की कोशिश हुई नाकाम
हरियाणा के गुरुग्राम में कानून-व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं को ठेंगा दिखाते हुए एक शख्स ने अपनी पत्नी की जान ले ली। यह मामला शहर के एक घनी आबादी वाले क्षेत्र का है, जहाँ सुनील नाम के व्यक्ति ने अपनी पत्नी के साथ हुए झगड़े के बाद इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, पति-पत्नी के बीच काफी समय से किसी बात को लेकर अनबन चल रही थी, जो घटना वाले दिन हिंसक रूप ले बैठी। गुस्से में अंधे होकर सुनील ने घर में रखे रसोई गैस सिलेंडर को हथियार बनाया और सो रही या निहत्थी पत्नी पर एक के बाद एक कई वार किए। सिलेंडर के भारी प्रहार से महिला को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी सुनील ने कानून के शिकंजे से बचने के लिए वहां से भागने की योजना बनाई। उसने कमरे को बाहर से बंद किया और मौके से फरार हो गया। पड़ोसियों को जब घर से किसी तरह की हलचल नहीं मिली और शक हुआ, तो उन्होंने इस बात की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। पुलिस की टीम जब घटनास्थल पर पहुँची, तो अंदर का नजारा देखकर अनुभवी अधिकारियों के भी पैर कांप गए। फर्श पर खून बिखरा हुआ था और महिला का शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा था। पुलिस ने तुरंत फॉरेंसिक टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की और मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
गुरुग्राम पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई टीमों का गठन किया ताकि आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके। तकनीकी निगरानी और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी शुरू की। आरोपी सुनील अपने छिपने के ठिकाने बदल रहा था, लेकिन पुलिस की तत्परता के आगे उसकी एक न चली। कुछ ही घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद हुई प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। उसने बताया कि विवाद इतना बढ़ गया था कि वह अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख सका और उसने अपनी पत्नी को खत्म करने का फैसला कर लिया। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि घरेलू हिंसा के ऐसे मामलों में अक्सर लंबे समय से दबे हुए गुस्से और संवाद की कमी की बड़ी भूमिका होती है। गुरुग्राम जैसे महानगरों में भागदौड़ भरी जिंदगी और आर्थिक तनाव भी कई बार परिवारों में कलह का कारण बनते हैं। पुलिस विभाग अब ऐसे मामलों को रोकने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग और काउंसलिंग सेंटर्स की भूमिका को और मजबूत करने पर विचार कर रहा है ताकि हिंसा होने से पहले ही विवादों को सुलझाया जा सके।
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया कि आरोपी सुनील के खिलाफ हत्या की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस वारदात में किसी और व्यक्ति ने उसकी मदद की थी या यह पूरी तरह से उसके अकेले का कृत्य था। मृतका के मायके वालों को भी सूचित कर दिया गया है, जिन्होंने आरोपी पर पहले भी प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस अब उन सभी पुराने विवादों की कड़ियों को जोड़ रही है जो इस हत्या की वजह बने। घटनास्थल से बरामद गैस सिलेंडर को भी मुख्य साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया गया है, जिस पर आरोपी के उंगलियों के निशान और खून के धब्बे मिले हैं।
इस घटना ने पड़ोस में रहने वाले लोगों को सदमे में डाल दिया है। लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके बगल के घर में इतना बड़ा अपराध घटित हो सकता है। शहर में सुरक्षा के दावों के बीच इस तरह की घरेलू हत्याएं पुलिस प्रशासन के लिए एक नई चुनौती पेश करती हैं। गुरुग्राम पुलिस अब इस मामले में जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है ताकि आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कड़ी सजा दिलाई जा सके। समाज में इस तरह के अपराधों के प्रति कड़ा संदेश भेजने के लिए पुलिस हर मुमकिन सबूत को मजबूती से अदालत में पेश करने का इरादा रखती है।
मृतका के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मौत सिलेंडर के पहले वार से हुई या आरोपी ने बार-बार प्रहार किए थे। शरीर पर मिले चोट के निशान हमले की क्रूरता को दर्शाते हैं। पुलिस डायरी के अनुसार, सुनील का पिछला रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है कि क्या उसका कोई आपराधिक इतिहास रहा है। महिला के परिजनों ने न्याय की गुहार लगाई है और आरोपी के लिए फांसी की सजा की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि घर की चारदीवारी के भीतर महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं और क्या छोटी-छोटी बहसें इस कदर जानलेवा हो सकती हैं।
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