ईंधन की कीमतों पर सरकार का बड़ा प्रहार: पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में रू.10 की ऐतिहासिक कटौती।

भारत सरकार ने गुरुवार, 26 मार्च 2026 की देर शाम एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद

Mar 27, 2026 - 16:12
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ईंधन की कीमतों पर सरकार का बड़ा प्रहार: पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में रू.10 की ऐतिहासिक कटौती।
ईंधन की कीमतों पर सरकार का बड़ा प्रहार: पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में रू.10 की ऐतिहासिक कटौती।
  • मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ी राहत: पेट्रोल पर ड्यूटी घटकर रू.3 हुई, तो डीजल पर हुआ 'जीरो' टैक्स, जानें कब से लागू
  • ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत का साहसिक कदम: कच्चे तेल की महंगाई से निपटने के लिए केंद्र ने दी रू.1.55 लाख करोड़ की कर राहत

भारत सरकार ने गुरुवार, 26 मार्च 2026 की देर शाम एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में रू.10 प्रति लीटर की भारी कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क रू.13 प्रति लीटर से घटकर अब मात्र रू.3 प्रति लीटर रह गया है। वहीं, डीजल के मामले में सरकार ने और भी बड़ा कदम उठाते हुए उत्पाद शुल्क को रू.10 प्रति लीटर से घटाकर शून्य (Nil) कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से, यानी शुक्रवार 27 मार्च 2026 से पूरे देश में लागू हो गया है। इस कटौती का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बोझ को घरेलू उपभोक्ताओं और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर पड़ने से रोकना है।

इस बड़े फैसले के पीछे का सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया, विशेषकर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव है। फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमतें $120 प्रति बैरल के पार पहुँच गई थीं। भारत अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों में उछाल सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। सरकार ने अपनी आय (Tax Revenue) का बलिदान देकर नागरिकों को इस वैश्विक महंगाई से बचाने का प्रयास किया है।

उत्पाद शुल्क में की गई इस कटौती का एक तकनीकी पहलू यह भी है कि इसका सीधा लाभ शायद पंप पर तुरंत कीमतों में कमी के रूप में न दिखे। दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी। इसके चलते इन कंपनियों को भारी घाटा (Under-recovery) उठाना पड़ रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि रू.10 की यह टैक्स कटौती तेल कंपनियों के इस घाटे की भरपाई करेगी, जिससे भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका कम हो जाएगी। सरल शब्दों में, सरकार ने टैक्स कम करके यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश में तेल की कीमतें स्थिर बनी रहें। इस कर कटौती के साथ ही सरकार ने विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) के लिए भी राहत के संकेत दिए हैं। एविऐशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले करों के ढांचे में भी बदलाव किया गया है ताकि हवाई यात्रा की लागत को नियंत्रित रखा जा सके। इसके अलावा, सरकार ने साफ किया है कि यह संशोधित शुल्क ढांचा केवल घरेलू खपत के लिए है और निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर पुराने नियम या अन्य लागू कर प्रभावी रहेंगे। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि देश के पास पर्याप्त तेल और एलपीजी का स्टॉक मौजूद है।

निजी तेल क्षेत्र की बात करें तो इस अधिसूचना से ठीक एक दिन पहले देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन रिटेलर 'नायरा एनर्जी' ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः रू.5 और रू.3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। निजी कंपनियों द्वारा की गई इस बढ़ोतरी ने बाजार में इस बात की चिंता बढ़ा दी थी कि अब सरकारी कंपनियां भी दाम बढ़ा सकती हैं। हालांकि, केंद्र सरकार के इस ताजा फैसले के बाद अब सरकारी कंपनियों पर दाम बढ़ाने का दबाव खत्म हो गया है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह सार्वजनिक हित में अपने राजस्व का नुकसान सहने को तैयार है ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी न पड़े और परिवहन लागत में होने वाली वृद्धि को रोका जा सके।

आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्पाद शुल्क में रू.10 की इस कटौती से सरकारी खजाने पर लगभग रू.1.55 लाख करोड़ का वार्षिक बोझ पड़ेगा। इसके बावजूद, सरकार ने इसे एक 'साहसिक और समय पर लिया गया निर्णय' बताया है। इस कदम से न केवल आम आदमी को राहत मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई सस्ती होने से आवश्यक वस्तुओं के दाम भी स्थिर रहेंगे। शेयर बाजार में भी इस खबर का सकारात्मक असर देखा गया, जहाँ तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी दर्ज की गई। निवेशकों को भरोसा है कि इस कर राहत से कंपनियों की बैलेंस शीट में सुधार होगा और वे अपना परिचालन सुचारू रूप से जारी रख सकेंगी।

वर्तमान में प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले लंबे समय से स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल लगभग रू.94.72 और मुंबई में रू.104.21 के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि वैट (VAT) और स्थानीय करों के कारण अलग-अलग राज्यों में अंतिम कीमतें भिन्न हो सकती हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह वैश्विक परिस्थितियों पर पैनी नजर बनाए हुए है और यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक उछाल आता है, तो स्थिति की समीक्षा कर अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं। फिलहाल के लिए, रू.10 की यह कटौती भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी ढाल के रूप में कार्य करेगी।

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