रामनवमी पर सांप्रदायिक तनाव: गढ़वा और अहिल्यानगर में शोभायात्रा पर भारी पथराव, पुलिसकर्मी समेत कई घायल।
झारखंड के गढ़वा जिले के रमकंडा थाना क्षेत्र में रामनवमी की महाअष्टमी और नवमी के उपलक्ष्य में निकाली गई शोभायात्रा के दौरान स्थिति तब
- झारखंड से महाराष्ट्र तक हिंसा की गूंज: रमकंडा और श्रीरामपुर में आमने-सामने आए दो समुदाय, भारी पुलिस बल तैनात
- उत्सव के बीच उपद्रव: असामाजिक तत्वों ने शोभायात्रा को बनाया निशाना, आंसू गैस के गोलों और लाठीचार्ज से संभाली गई स्थिति
झारखंड के गढ़वा जिले के रमकंडा थाना क्षेत्र में रामनवमी की महाअष्टमी और नवमी के उपलक्ष्य में निकाली गई शोभायात्रा के दौरान स्थिति तब बिगड़ गई, जब दो पक्ष आमने-सामने आ गए। जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर शाम जब भव्य झांकी मुख्य मार्ग से गुजर रही थी, तभी कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से पत्थरबाजी होने लगी। इस हिंसक झड़प में आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी और कई स्थानीय नागरिक घायल हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी बल के साथ मौके पर पहुँचे और उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा। वर्तमान में पूरे रमकंडा इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले (पूर्व में अहमदनगर) के श्रीरामपुर शहर में भी रामनवमी की शोभायात्रा को निशाना बनाने की खबर सामने आई है। यहाँ के गोंधवणी क्षेत्र से पारंपरिक शोभायात्रा निकाली जा रही थी, जो श्रीराम मंदिर की ओर बढ़ रही थी। जैसे ही मिरवणूक (जुलूस) एक संवेदनशील धार्मिक स्थल के पास पहुँची, अचानक छतों और गलियों से पत्थरों की बौछार शुरू हो गई। इस अचानक हुए हमले से भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई और दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद इलाके में तनाव व्याप्त हो गया और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को काबू में किया और भारी सुरक्षा घेरा तैयार किया।
गढ़वा में हुए पथराव के पीछे की वजह शोभायात्रा के मार्ग को लेकर हुआ पुराना विवाद बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कौआखोह के पास झांकी को आगे बढ़ने से रोकने के प्रयास किए गए, जिसके बाद बहस पत्थरबाजी में बदल गई। उपद्रवियों ने न केवल पत्थर बरसाए बल्कि कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक एक दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया है और दर्जनों मोटरसाइकिलों को जब्त किया गया है। डीआईजी और एसपी स्वयं इलाके में गश्त कर रहे हैं ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न घटे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्रालय ने रामनवमी के मद्देनजर पहले ही सभी राज्यों को अलर्ट जारी किया था। विशेष रूप से उन संवेदनशील रूटों पर सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से निगरानी के निर्देश दिए गए थे जहाँ पहले कभी तनाव हुआ हो। गढ़वा और अहिल्यानगर की घटनाओं के बाद, देश के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर भी निगरानी रखी जा रही है ताकि अफवाहों के माध्यम से तनाव न फैले।
अहिल्यानगर के श्रीरामपुर में हुई घटना के बाद पुलिस ने एक स्थानीय मौलाना और करीब 12 अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पत्थरबाजों की पहचान की जा रही है। श्रीरामपुर में स्थिति अब नियंत्रण में है लेकिन तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और भाईचारा बनाए रखें। राज्य आरक्षित पुलिस बल (SRPF) की टुकड़ियों को संवेदनशील चौकों पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की प्रतिक्रियात्मक घटना को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन ने शांति समिति की बैठकें बुलाकर दोनों समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश शुरू कर दी है।
इन घटनाओं के अलावा, देश के कुछ अन्य हिस्सों से भी छिटपुट झड़पों और तनाव की खबरें आईं, लेकिन पुलिस की सक्रियता के कारण वे बड़े विवाद में नहीं बदलीं। पश्चिम बंगाल के हावड़ा और हुगली में भी शोभायात्राओं के दौरान भारी पुलिस बंदोबस्त देखा गया। बिहार के गया में भी एक मामूली विवाद के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। रामनवमी जैसे बड़े त्योहारों पर सुरक्षा व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनकर उभरती है, जहाँ लाखों की भीड़ सड़कों पर होती है। इनपुट मिले थे कि कुछ बाहरी तत्व उत्सव के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की फिराक में हैं, जिसके बाद पुलिस ने कई इलाकों में फ्लैग मार्च भी निकाला था।
प्रशासनिक स्तर पर अब यह जांच की जा रही है कि क्या इन पथराव की घटनाओं के पीछे कोई पूर्व नियोजित साजिश थी। गढ़वा के रमकंडा में हुए हमले के बाद थाना प्रभारी को भी पद से हटा दिया गया है और नए अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उधर, अहिल्यानगर में राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी संयम बरतने की अपील की है। कानून के रक्षकों का कहना है कि पत्थरबाजी करने वालों के घर और ठिकानों की जांच की जाएगी और यदि वे किसी भी तरह के अवैध कब्जे या आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए, तो उन पर और भी कड़ा प्रहार किया जाएगा। जनता से सहयोग की अपील की गई है ताकि पर्व की गरिमा बनी रहे।
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