Special Article: भाजपा पूरे कर रही अपने संकल्प,गुजरात में भी लागू होगी समान नागरिक संहिता। 

वर्ष 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद से लेकर अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के

Mar 25, 2026 - 17:02
 0  47
Special Article: भाजपा पूरे कर रही अपने संकल्प,गुजरात में भी लागू होगी समान नागरिक संहिता। 
भाजपा पूरे कर रही अपने संकल्प,गुजरात में भी लागू होगी समान नागरिक संहिता। 

लेखक: मृत्युंजय दीक्षित 

वर्ष 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद से लेकर अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशन में भाजपा अपने सभी संकल्पों को गंभीरता के साथ पूर्णता की ओर ले जाने के लिए अग्रसर है। भाजपा ने अपनी स्थापना से लेकर अब तक किए गए कई संकल्प पूर्ण किए हैं जिनमें सबसे प्रमुख है अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि स्थल पर दिव्य व भव्य राम मंदिर का निर्माण, जो अब पूर्ण हो चुका है । जम्मू कश्मीर से धारा 370 को हटाया जाना एक संकल्प था वह भी पूर्ण हो चुका है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय से चल रहा महिलाओं  के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का विधेयक भी कानून बन चुका है जिसे परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा।

 सामान नागरिक संहिता भी भारतीय जनता पार्टी का एक संकल्प है, जो चरणबद्ध रूप से सिद्धि की दिशा में बढ़ रहा है। पहले समान नागरिक संहिता कानून भाजपा शासित राज्य उत्तराखंड में सफलतापूर्वक लागू हुआ  अब उसकी सफलताओें का गहन अध्ययन करने के बाद गुजरात भी ऐसा दूसरा राज्य बन गया है जहां सामान नागरिक संहिता लागू की गई है। विगत विधानसभा चुनावों से पूर्व गुजरात भाजपा के संकल्प पत्र में सामान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया गया था और इसके लिए एक समिति भी बना दी गई थी। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले के संबोधन से भारतीय जनमानस के लिए समान नागरिक संहिता की बात कर  चुके हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर मुस्लिम महिलाओं को भी समान अधिकार प्राप्त करने हैं तो अब समय आ गया है कि देश की संसद समान नागरिक संहिता पर विचार करे और कानून बनाए। 

गुजरात विधानसभा में सात घंटे की लंबी चर्चा  के बाद यह विधेयक पारित हुआ। विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के विधायकों  ने इस विधेयक को मुस्लिम विरोधी करार देते हुए कहा कि भाजपा यह विधेयक  जानबूझ कर चुनावों  से पहले जल्दबाजी में लेकर आई है । कांग्रेस विधायकों ने इसे  विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की जिसे खारिज कर दिया गया।
इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद गुजरात में विभिन्न जातियों, धर्मों और संप्रदायों के लिए लोगों के लिए विवाह, तलाक, पिता की संपत्ति में महिलाओं की हिस्सेदारी और लिव -इन रिलेशनशिप को लेकर समान नागरिक संहिता कानून लागू हो जाएगा। विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक प्रस्तुत करते समय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि इसका  मुख्य उद्देश्य विभिन्न वर्गों और धर्मों  के बीच कानूनी भेदभाव को समाप्त करना है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित जनजातियों के पुरुषों और महिलाओं पर यह कानून लागू नहीं होगा लेकिन मुस्लिम समुदाय के लिए पर्सनल लॉ को समाप्त किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा समान नागरिक संहिता कानून की आवश्यकता पर दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए  सदन में कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी विभिन्न धर्मों और समाजों के लोगों के नागरिक अधिकारों के साथ भेदभाव हो रहा है। इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, पिता की संपत्ति, भरण पोषण  और लिव इन रिलेशनशिप के कानूनों में एकरूपता लाना है। इस विधेयक में विवाह, तलाक और लिव इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इस विधेयक में पहचान छिपाकर धोखे से विवाह करने पर सात वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है ताकि किसी बेटी को धोखा देकर उसका जीवन खराब न किया जा सके। 

इस विधेयक के अनुसार अनुसूचित जातियों को छोड़कर अन्य धर्मों के पुरुष और महिलाएं एक से अधिक विवाह नहीं कर सकेंगे। ऐसा करने पर भी सात वर्ष की सजा का प्रावधान होगा। लिव -इन रिलेशन का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है और ऐसा न करने पर तीन माह तक की सजा होगी। समान नागरिक संहिता के चार सिद्धांत तय किए गए हैं जिसमें लैंगिक समानता, कानूनों का सरलीकरण व एकीकरण तथा संवैधानिक नैतिकता ।  

समान नागरिक संहिता  कानून के पक्ष में कहा जा रहा हे कि इससे महिला सशक्तीकरण के प्रयासों को मजबूती प्राप्त होगी। यह मुस्लिम महिलाओं  को कानूनी सुरक्षा देगा। कानून लागू  हो जाने के बाद इसके लागू होने के दिन से लिव -इन में रहने वाली महिलाओं को भी पहचान मिल सकेगी। सरकार यह स्पष्ट रूप से कह रही है कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं अपितु नागरिक अधिकारों  को समान बनाने के लिए है। एक प्रश्न यह उठाया जा रहा है कि जब यह समान नागरिक संहिता कानून है तो फिर इसमें आदिवासी समाज को क्यों  अलग किया गया है? 
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को सफलतापूर्वक लागू किया गया है और  उसके लाभ भी दिखाई दे रहे हैं । अब गुजरात का यह कानून कितना लाभदायक होगा यह तो आगामी समय ही बताएगा, रही बात कांग्रेस और विपक्ष के विरोध की तो वह तो पूरी तरह से मुस्लिम लीगी माओवादी हो चुकी है और उसका कोई भी वक्तव्य केवल वोट बैंक तुष्टिकरण के लिए ही होता है । 

Also Read- Special Article: युद्धकाल का संकट, राजनीति और नागरिक कर्तव्य।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।