2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण- दक्षिणी गोलार्ध में चंद्रमा की छाया, न्यूजीलैंड में 86 प्रतिशत सूर्य ढकेगा

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। चूंकि चंद्रमा का कक्षा थोड़ी तिरछी होती है, इसलिए हर महीने पूर्ण ग्रहण नहीं होता। इस बार चंद्रमा की छाया

By INA News Desk
Sep 21, 2025 - 13:12
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2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण- दक्षिणी गोलार्ध में चंद्रमा की छाया, न्यूजीलैंड में 86 प्रतिशत सूर्य ढकेगा
2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण- दक्षिणी गोलार्ध में चंद्रमा की छाया, न्यूजीलैंड में 86 प्रतिशत सूर्य ढकेगा
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21 सितंबर 2025 को रात में एक दुर्लभ खगोलीय घटना होने वाली है, जो 2025 का अंतिम सूर्य ग्रहण होगा। यह आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के कुछ हिस्से को ढक लेगा। भारत में यह दिखाई नहीं देगा, लेकिन दक्षिणी गोलार्ध के कई इलाकों में यह नजारा रोमांचक होगा। ग्रहण वैश्विक समय (यूटीसी) के अनुसार 21 सितंबर को दोपहर 5:29 बजे शुरू होगा और 22 सितंबर को सुबह 2:53 बजे समाप्त होगा। भारतीय समयानुसार यह 21 सितंबर रात 10:59 बजे से 22 सितंबर सुबह 3:23 बजे तक रहेगा। अधिकतम ग्रहण 21 सितंबर को शाम 7:41 बजे यूटीसी (भारतीय समय रात 1:11 बजे) पर होगा, जब न्यूजीलैंड के दक्षिणी हिस्से में सूर्य का लगभग 86 प्रतिशत भाग ढक जाएगा। टाइम एंड डेट और नासा जैसे संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार, यह ग्रहण सितंबर के विषुव (22 सितंबर) से ठीक पहले हो रहा है, जो इसे और भी खास बनाता है।

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। चूंकि चंद्रमा का कक्षा थोड़ी तिरछी होती है, इसलिए हर महीने पूर्ण ग्रहण नहीं होता। इस बार चंद्रमा की छाया पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्रों पर पड़ेगी, जहां यह आंशिक रूप से दिखेगा। विकिपीडिया और अर्थस्काई.ओआरजी के अनुसार, यह ग्रहण 2025 के दूसरे सूर्य ग्रहण के रूप में हो रहा है। वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को आंशिक था, जो अंटार्कटिका में दिखा। सितंबर में पहले ही 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण हुआ था, जो 'रक्त चंद्रमा' के नाम से जाना गया। यह ग्रहण सीरीज का हिस्सा है, जो हर छह महीने में दो से तीन ग्रहण लाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ग्रहण पृथ्वी की कक्षा और चंद्रमा की स्थिति के कारण हो रहा है।

ग्रहण की दृश्यता दक्षिणी गोलार्ध तक सीमित रहेगी। स्पेस.कॉम और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, न्यूजीलैंड के दक्षिणी भाग, जैसे स्टीवर्ट द्वीप और इनवर्करगिल में यह सबसे गहरा होगा। यहां सूर्योदय के समय ग्रहण शुरू होगा, जो सुबह 6:27 बजे स्थानीय समय पर दिखेगा। न्यूजीलैंड के दक्षिणी छोर पर 80 से 86 प्रतिशत सूर्य ढकेगा, जिससे आसमान में अजीबोगरीब अंधेरा छा जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी हिस्से, जैसे सिडनी और ब्रिस्बेन में भी आंशिक ग्रहण दिखेगा, लेकिन वहां कवरेज कम होगा, लगभग 20-40 प्रतिशत। प्रशांत महासागर के द्वीपसमूह, जैसे टोंगा, फिजी, ताहिती और फ्रेंच पॉलीनेशिया में सुबह के समय ग्रहण का नजारा देखने को मिलेगा। ताहिती में सूर्योदय पर 8 प्रतिशत ग्रहण दिखेगा। अटलांटिक महासागर के दक्षिणी हिस्सों और अंटार्कटिका के कुछ क्षेत्रों में भी यह दिखाई देगा। यूएस नेवल ऑब्जर्वेटरी के मानचित्र के अनुसार, कुल 16.6 मिलियन लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां ग्रहण दिखेगा, जो विश्व की आबादी का मात्र 0.2 प्रतिशत है।

भारत और उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि भारत में सूर्योदय के समय ग्रहण समाप्त हो चुका होगा, इसलिए कोई दृश्य प्रभाव नहीं। यहां के निवासियों को अगला सूर्य ग्रहण 2026 में देखना पड़ेगा। लेकिन वैज्ञानिक महत्व से यह ग्रहण सभी के लिए रोचक है। नासा के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूर्य के वायुमंडल में परिवर्तन का अध्ययन किया जा सकता है। ग्रहण वैज्ञानिकों को सूर्य की सतह और सौर हवाओं के बारे में नई जानकारी देगा। टाइम एंड डेट ने लाइव स्ट्रीमिंग की घोषणा की है, जो ड्यूनेडिन, न्यूजीलैंड से प्रसारित होगी।

ग्रहण देखने के लिए सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। प्रिवेंट ब्लाइंडनेस और स्पेस.कॉम ने चेतावनी दी कि कभी भी नंगी आंखों से सूर्य की ओर न देखें, क्योंकि इससे स्थायी अंधापन हो सकता है। विशेष सोलर फिल्टर चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्टर का उपयोग करें। घर पर ही एक कार्डबोर्ड से पिनहोल बनाकर दीवार पर सूर्य की छवि प्रोजेक्ट की जा सकती है। दूरबीन या कैमरे का उपयोग सोलर फिल्टर के बिना न करें। ग्रहण के दौरान जानवरों का व्यवहार भी बदल जाता है। पक्षी चुप हो जाते हैं, और तापमान थोड़ा गिर जाता है। न्यूजीलैंड में पर्यटक इस नजारे के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन मौसम की चुनौतियां हैं। क्लाउड कवर की संभावना 50 प्रतिशत है।

यह ग्रहण 2025 के ग्रहण सीरीज का समापन है। मार्च में दो ग्रहण हुए थे, सितंबर में दो। अगला प्रमुख सूर्य ग्रहण 2026 में अंगूठी वाला होगा, जो ग्रीनलैंड और स्पेन में दिखेगा। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह ग्रहण विषुव से पहले हो रहा है, जब दिन-रात बराबर होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रहण पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और चंद्रमा की दूरी के कारण होते हैं। चंद्रमा की छाया की लंबाई लगभग 2,500 किलोमीटर होगी, लेकिन यह पृथ्वी की सतह को छूए बिना गुजरेगी।

सोशल मीडिया पर उत्साह है। लोग वीडियो शेयर कर रहे हैं, जहां पिछले ग्रहणों की यादें ताजा हो रही हैं। न्यूजीलैंड के स्कूलों ने विशेष कक्षाएं लगाई हैं। पर्यटन बढ़ रहा है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण पर जोर है। यह घटना हमें ब्रह्मांड की विशालता याद दिलाती है। पृथ्वी पर खड़े होकर हम सूर्य-चंद्रमा के नृत्य को देखते हैं। वैज्ञानिक अध्ययन से नई खोजें होंगी। भारत में तो यह न दिखेगा, लेकिन लाइव स्ट्रीम से सभी देख सकेंगे। उम्मीद है कि सुरक्षित तरीके से लोग इसका आनंद लेंगे। यह वर्ष का अंतिम ग्रहण न केवल दृश्य है, बल्कि विज्ञान का उत्सव भी।

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