Prayagraj : माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद जारी, धरना और नोटिस पर तनाव
मेला प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि भीड़ और सुरक्षा कारणों से पालकी आगे नहीं जाने दी गई। शंकराचार्य के शिष्यों ने बैरियर तोड़ने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की हुई। प्रशासन ने
प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पालकी रथ को संगम स्नान के लिए रोकने से विवाद शुरू हुआ। इससे नाराज होकर शंकराचार्य अपने शिष्यों के साथ धरने पर बैठ गए और अन्न-जल त्याग कर विरोध जताया। यह विवाद अब तीसरे दिन भी जारी है।
मेला प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि भीड़ और सुरक्षा कारणों से पालकी आगे नहीं जाने दी गई। शंकराचार्य के शिष्यों ने बैरियर तोड़ने की कोशिश की, जिससे धक्का-मुक्की हुई। प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया कि किसी का अपमान हुआ।
प्रशासन ने शंकराचार्य को नोटिस जारी किया और 24 घंटे में जवाब मांगा कि वे खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य कैसे कहते हैं। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के लंबित मामले का हवाला दिया गया, जिसमें ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रात में नोटिस पहुंचाने पर शिष्यों ने मना किया, तो गेट पर चस्पा कर दिया गया।
शंकराचार्य ने कहा कि प्रशासन कोर्ट के नाम पर दबाव डाल रहा है और शंकराचार्य की मान्यता पर सवाल उठाने का हक किसी को नहीं। उन्होंने माफी की मांग की और कहा कि सम्मानजनक स्नान के बिना शिविर में नहीं लौटेंगे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्पष्ट किया कि 13 अखाड़ों द्वारा चादर ओढ़ाए जाने तक शंकराचार्य की पूर्ण मान्यता नहीं होती। अभी अविमुक्तेश्वरानंद को सभी अखाड़ों से यह मान्यता नहीं मिली है। विवाद बढ़ने से संत समाज में भी मतभेद दिख रहे हैं। कुछ नेता और समर्थक शंकराचार्य के पक्ष में हैं, जबकि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट आदेश का पालन बता रहा है।
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