Lakhimpur : धौरहरा में जमीन जालसाजी का मामला, फर्जी महिला खड़ी कर दो बार बैनामा कराया, मूल मालकिन के कब्जे में रही जमीन

करीब नौ महीने बाद श्यामू ने उसी जमीन का बैनामा बम्हौरी गांव निवासी मालती देवी के नाम कर दिया। इस बैनामे में गांव के राजाराम और विजय पाल (पिता-पुत्र) गवा

Jan 21, 2026 - 00:18
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Lakhimpur : धौरहरा में जमीन जालसाजी का मामला, फर्जी महिला खड़ी कर दो बार बैनामा कराया, मूल मालकिन के कब्जे में रही जमीन
Lakhimpur : धौरहरा में जमीन जालसाजी का मामला, फर्जी महिला खड़ी कर दो बार बैनामा कराया, मूल मालकिन के कब्जे में रही जमीन

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के धौरहरा तहसील क्षेत्र के बम्हौरी गांव में जमीन हड़पने की जालसाजी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने मूल मालकिन सावित्री देवी की जगह दूसरी महिला को खड़ा कर बैनामा कराया। इसके बाद उसी जमीन का दूसरा बैनामा भी कराकर दाखिल-खारिज करा लिया गया। पूरी घटना के दौरान जमीन मूल मालकिन के कब्जे में रही और उस पर उसका बोया गन्ना खड़ा है।

सावित्री देवी ने बताया कि उनके जेठ परमेश्वर ने 2023 में दानपत्र से बसंतापुर रेहुआ मुख्य मार्ग पर स्थित 9 डिसमिल जमीन (गाटा संख्या 390 मिनजुमला) उनके नाम कर दी थी। खतौनी में उनका नाम दर्ज हो गया था।

20 सितंबर को जालसाजों ने किसी दूसरी महिला को सावित्री देवी बताकर रजिस्ट्री कार्यालय में पेश किया और जमीन का बैनामा खानीपुर नकहा निवासी श्यामू के नाम कराया। इस बैनामे में धौरहरा के चिकनाजती निवासी पुष्पेंद्र कुमार और पीलीभीत के कबीरगंज श्रीनगर निवासी अभय सिंह गवाह बने।

करीब नौ महीने बाद श्यामू ने उसी जमीन का बैनामा बम्हौरी गांव निवासी मालती देवी के नाम कर दिया। इस बैनामे में गांव के राजाराम और विजय पाल (पिता-पुत्र) गवाह बने।

सावित्री देवी का आरोप है कि इस साजिश के पीछे गांव के बैजनाथ का हाथ है। फर्जी सावित्री बनाकर जिस श्यामू के नाम बैनामा हुआ, वह बैजनाथ का मामा है। बाद में श्यामू ने जमीन बैजनाथ की पत्नी मालती देवी को बेच दी। पीड़िता का कहना है कि जालसाजी में रजिस्ट्री कार्यालय से लेकर दानपत्र लेखक और गवाह तक शामिल हैं।

जमीन सड़क किनारे की कीमती है, लेकिन पहले बैनामे में 50 हजार रुपये और दूसरे में 20 हजार रुपये में बेची गई। इतने कम दाम और घाटे में बिक्री से साफ जालसाजी और साठगांठ का पता चलता है।

पीड़िता खतौनी निकालने तहसील पहुंची तो कागजात में उनका नाम गायब मिला। तब से वे तहसील अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उपजिलाधिकारी शशिकांत मणि ने बताया कि शिकायती पत्र मिला है। राजस्व निरीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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