कार्तिक पूर्णिमा पर साल का सबसे बड़ा और चमकीला सुपरमून ने रोशन किया देश का आसमान।
देशभर में 5 नवंबर 2025 को कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस बार यह दिन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसी रात साल का सबसे बड़ा और
देशभर में 5 नवंबर 2025 को कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस बार यह दिन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसी रात साल का सबसे बड़ा और सबसे चमकीला सुपरमून आसमान में नजर आया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बीवर सुपरमून था जो पृथ्वी से महज तीन लाख छप्पन हजार नौ सौ किलोमीटर दूर था। सामान्य पूर्णिमा के चांद से यह चौदह प्रतिशत बड़ा और तीस प्रतिशत ज्यादा चमकीला दिखाई दिया। भारत में शाम छह बजकर उनचास मिनट पर यह अपने चरम पर पहुंचा और पूरी रात आसमान को अपनी रोशनी से नहला गया।
सुपरमून तब होता है जब पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे निकट बिंदु पर होता है। इस बार यह संयोग कार्तिक पूर्णिमा से जुड़ा जिससे धार्मिक और खगोलीय दोनों महत्व बढ़ गए। नासा और भारतीय खगोल वैज्ञानिकों ने बताया कि 2025 में तीन सुपरमून हो रहे हैं जिनमें नवंबर वाला सबसे बड़ा है। अगला सुपरमून दिसंबर में आएगा लेकिन वह इतना निकट नहीं होगा।
देश के विभिन्न हिस्सों से सुपरमून की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। दिल्ली में जहां हल्की धुंध के बावजूद चांद बड़ा और सुनहरा दिखा वहीं मुंबई के मरीन ड्राइव पर लोग देर रात तक इसे निहारते रहे। कोलकाता में हुगली नदी के किनारे हजारों लोग इकट्ठा हुए और चांद की रोशनी में दीपदान किया। जयपुर के आमेर किले से सुपरमून की तस्वीरें बेहद खूबसूरत आईं जहां चांद किले के ऊपर मानो लटक रहा हो। चंडीगढ़ के सुखना झील पर युवा फोटोग्राफरों ने इसे कैद किया तो गोवा के बीच पर पर्यटक और स्थानीय लोग आश्चर्यचकित हो गए।
वाराणसी में तो नजारा अद्भुत था। देव दीपावली के मौके पर गंगा घाटों पर पच्चीस लाख से ज्यादा दीये जलाए गए। इन दीयों की रोशनी और सुपरमून की चांदनी मिलकर काशी को स्वर्ग जैसा बना दिया। लोग नावों में बैठकर गंगा आरती देखते रहे और चांद को अर्घ्य देते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट कर इस खूबसूरत नजारे की सराहना की और लोगों से इसे देखने की अपील की।
ओडिशा में कार्तिक पूर्णिमा को बोइता बंदना के रूप में मनाया जाता है। यहां लोग नदियों में छोटी नावें छोड़ते हैं और इस बार सुपरमून की रोशनी में ये नावें चमकती दिखीं। पुरी में जगन्नाथ मंदिर के पास हजारों श्रद्धालु जमा हुए। राजस्थान के पुष्कर में भी मेले में सुपरमून ने रंग जमा दिया। गुजरात के सोमनाथ मंदिर से चांद की तस्वीरें वायरल हुईं जहां वह समुद्र के ऊपर बड़ा गोलाकार दिखा। पश्चिम बंगाल में गंगा सागर पर तीर्थयात्री रातभर जागकर इसे देखते रहे।
धार्मिक दृष्टि से कार्तिक पूर्णिमा बेहद पवित्र मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और विष्णु पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु मत्स्य अवतार में प्रकट हुए थे और शिवजी ने त्रिपुरासुर का वध किया था। इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। देव दीपावली के रूप में देवता भी इस दिन धरती पर उतरते हैं और दीपों से घाट सजाए जाते हैं।
इस साल गुरु नानक जयंती भी कार्तिक पूर्णिमा पर ही पड़ी। सिख समुदाय ने स्वर्ण मंदिर को दीयों से सजाया और सुपरमून की रोशनी में कीर्तन किया। अमृतसर में हरमंदिर साहिब सुनहरी चमक के साथ चांद के नीचे और भी दिव्य लग रहा था।
लोगों ने घरों में तुलसी विवाह भी संपन्न किया। शाम को तुलसी के पौधे को दुल्हन की तरह सजाकर शिव पूजा की गई। कई जगहों पर 365 बत्ती का दीपक जलाया गया जो पूरे साल की पूजा का फल देता है।
सुपरमून को देखने के लिए लोगों ने छतों पर डेरा जमाया। बच्चे उत्साहित थे क्योंकि चांद इतना बड़ा कभी नहीं दिखा। फोटोग्राफरों ने दूरबीन और कैमरे से इसे कैद किया। सोशल मीडिया पर हैशटैग सुपरमून और कार्तिक पूर्णिमा ट्रेंड करते रहे। कई शहरों में खगोल समाजों ने विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जहां लोगों को सुपरमून के बारे में बताया गया।
मौसम भी साथ रहा। ज्यादातर जगहों पर आसमान साफ था। हालांकि दिल्ली और आसपास प्रदूषण के कारण थोड़ी धुंध रही लेकिन फिर भी चांद साफ दिखा। दक्षिण भारत में चेन्नई और बेंगलुरु में लोग पार्कों में इकट्ठा होकर इसे देखते रहे। वैज्ञानिकों का कहना है कि सुपरमून से ज्वार भाटा ज्यादा प्रभावित होता है। इस बार समुद्र तटों पर ऊंची लहरें देखी गईं। लेकिन कोई नुकसान नहीं हुआ।
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