राजस्थान के सभी सरकारी संस्थानों में रोज गूंजेगा वंदे मातरम, मदरसों में भी लागू होगा नियम, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का ऐलान।
राजस्थान में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 5 नवंबर 2025 को घोषणा की कि अब प्रदेश के सभी सरकारी
राजस्थान में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने 5 नवंबर 2025 को घोषणा की कि अब प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, कार्यालयों और मदरसों में हर दिन वंदे मातरम गाया जाएगा। यह नियम सभी सरकारी संस्थानों पर लागू होगा। मंत्री ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है। यह हर भारतीय को देशभक्ति की भावना से जोड़ता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 7 नवंबर 2025 को वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
मदन दिलावर ने जयपुर में मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार ने सभी सरकारी संस्थानों में रोजाना प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान के साथ वंदे मातरम गाने का निर्देश दिया है। मदरसे भी सरकारी मदद से चलते हैं इसलिए उन पर भी यह नियम लागू होगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं है बल्कि राष्ट्रप्रेम जगाने के लिए है। राजस्थान में करीब 5 हजार मदरसे हैं जिनमें से कई सरकारी अनुदान पर चलते हैं। इनमें संस्कृत स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थान भी शामिल हैं।
यह घोषणा वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के ठीक पहले की गई है। वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1876 में की थी। इसे पहली बार 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया। स्वतंत्रता संग्राम में यह गीत क्रांति का प्रतीक बना। कई स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे गाकर ब्रिटिश सरकार को चुनौती दी। 1950 में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया। अब राजस्थान सरकार इसे हर सरकारी संस्थान में अनिवार्य कर रही है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि स्कूलों में पहले से राष्ट्रगान गाया जाता है अब वंदे मातरम भी जोड़ा जाएगा। प्रार्थना सभा की शुरुआत राष्ट्रगान से और समापन वंदे मातरम से होगा। इससे बच्चों में देशभक्ति की भावना मजबूत होगी। मंत्री ने बताया कि 7 नवंबर को पूरे प्रदेश में विशेष कार्यक्रम होंगे। स्कूलों में निबंध प्रतियोगिता, भाषण और सामूहिक गायन होगा। जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में बड़ा आयोजन होगा जहां 50 हजार लोग एक साथ वंदे मातरम गाएंगे।
राजस्थान भाजपा ने भी इस मौके पर पूरे प्रदेश में अभियान चलाने का फैसला लिया है। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देश पर हर जिले में 150 जगहों पर 150 कार्यकर्ता सामूहिक गायन करेंगे। पंचायतों, अस्पतालों, पुलिस थानों और छात्रावासों में भी कार्यक्रम होंगे। सरकार का मानना है कि वंदे मातरम हर पीढ़ी को देश की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
यह फैसला मदरसों में लागू होने से कुछ विवाद की संभावना है। पहले भी कई राज्यों में मदरसों में राष्ट्रगान या वंदे मातरम को लेकर बहस हुई है। कुछ संगठनों ने कहा कि मदरसे धार्मिक शिक्षा देते हैं इसलिए यह अनिवार्य नहीं होना चाहिए। लेकिन शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकारी अनुदान लेने वाले सभी संस्थान नियमों का पालन करेंगे। यह राष्ट्रहित में है। कोई भी संस्थान इससे अलग नहीं रह सकता।
राजस्थान में शिक्षा विभाग लगातार सुधार कर रहा है। हाल ही में स्कूलों का शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू करने का फैसला लिया गया। निजी और सरकारी स्कूलों में एक समान यूनिफॉर्म लागू की गई। पाठ्यक्रम में बदलाव किए जा रहे हैं। अब वंदे मातरम को जोड़कर राष्ट्रीय भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। मंत्री मदन दिलावर खुद स्कूलों का निरीक्षण करते हैं और अनुशासन पर जोर देते हैं।
वंदे मातरम का इतिहास बहुत गौरवशाली है। बंकिम चंद्र चटर्जी ने इसे आनंदमठ उपन्यास में लिखा। 7 नवंबर 1876 को इसकी रचना हुई। कांग्रेस ने इसे अपनाया। गांधी जी, नेहरू जी और अन्य नेताओं ने इसे स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया। ब्रिटिश सरकार ने इसे गाने पर पाबंदी लगाई लेकिन लोग गाते रहे। आजादी के बाद इसे जन गण मन के साथ राष्ट्रगीत का दर्जा मिला।
राजस्थान सरकार ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। 7 नवंबर से यह नियम लागू हो जाएगा। स्कूलों में शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा रही है। वंदे मातरम के बोल और धुन उपलब्ध कराई गई हैं। बच्चे अभ्यास कर रहे हैं। अभिभावक भी खुश हैं कि बच्चों में देशप्रेम बढ़ेगा।
कुछ विपक्षी नेता इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा चुनाव से पहले ऐसे मुद्दे उछालती है। लेकिन सरकार ने कहा कि यह राष्ट्रहित का फैसला है। कोई राजनीति नहीं। पूरे देश में वंदे मातरम के 150 साल मनाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी सभी स्कूलों और कार्यालयों में एक साथ गायन होगा। केंद्र सरकार ने साल भर कार्यक्रम प्लान किए हैं।
राजस्थान में यह अभियान 7 नवंबर 2025 से शुरू होकर 2026 तक चलेगा। चार चरणों में कार्यक्रम होंगे। पहला चरण 7 से 14 नवंबर, दूसरा गणतंत्र दिवस के आसपास, तीसरा स्वतंत्रता दिवस और चौथा अगले साल नवंबर में। हर चरण में देशभक्ति के आयोजन होंगे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी भारतीय हैं। उन्हें भी वंदे मातरम गाना चाहिए। इससे एकता बढ़ेगी। कोई जबरदस्ती नहीं लेकिन नियम सभी पर लागू। सरकारी मदद लेने की शर्त यही है।
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