मंत्री संजय निषाद के 'दलाल' बयान पर करणी सेना के जिला अध्यक्ष ने निषाद की जीभ 'काटकर लाने' वाले को पांच लाख 51 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की। 

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के एक बयान ने राजनीतिक विवाद

Dec 3, 2025 - 12:23
 0  64
मंत्री संजय निषाद के 'दलाल' बयान पर करणी सेना के जिला अध्यक्ष ने निषाद की जीभ 'काटकर लाने' वाले को पांच लाख 51 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की। 
मंत्री संजय निषाद के 'दलाल' बयान पर करणी सेना के जिला अध्यक्ष ने निषाद की जीभ 'काटकर लाने' वाले को पांच लाख 51 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की। 

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के एक बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है, जो शनिवार को बांसडीह में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान दिया गया था। मंत्री के भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद तेज हो गया, जिसमें उन्होंने बलिया को ब्रिटिश काल के दलालों का गढ़ बताते हुए कहा कि वहां कई लोग अंग्रेजों के एजेंट थे और दलाली का सिलसिला आज भी जारी है, जिसके कारण जिला अभी भी पिछड़ा हुआ है। इस बयान को बलिया की क्रांतिकारी विरासत का अपमान मानते हुए स्थानीय संगठनों ने विरोध जताया, और मंगलवार को करणी सेना के जिला अध्यक्ष कमलेश सिंह ने मंत्री की जीभ काटकर लाने वाले को पांच लाख 51 हजार रुपये के इनाम की घोषणा कर दी। इसी बीच कांग्रेस ने बांसडीह कोतवाली में मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई, तथा सोमवार को शहर में उनके पुतले का दहन भी किया। विवाद के केंद्र में मंत्री का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बलिया में ब्रिटिश काल में कई लोग दलाल एजेंट थे, दलाली का सिस्टम चला और आज भी चलता है, इसलिए जिला बर्बाद है।

विवाद की शुरुआत शनिवार 29 नवंबर 2025 को बांसडीह में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं की बैठक से हुई, जहां संजय निषाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। बैठक का उद्देश्य पार्टी की स्थानीय इकाई को मजबूत करना तथा आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा करना था। मंत्री ने अपने संबोधन में बलिया जिले के विकास पर बात करते हुए कहा कि यहां की पिछड़ी स्थिति का कारण ऐतिहालिक रूप से ब्रिटिश काल में लोगों द्वारा अंग्रेजों की दलाली करना था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, यहां कई लोग ब्रिटिश के दलाल एजेंट थे, दलाली का सिस्टम चला और अभी भी चलता है, इसी कारण बलिया अभी भी बर्बाद है। अन्यथा यह विद्रोहियों की धरती थी, जिसने अंग्रेजों को भगाने में भूमिका निभाई और देश को आजादी दिलाने में योगदान दिया। यह बयान वीडियो के रूप में रिकॉर्ड हो गया तथा रविवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर आक्रोश फैल गया। बलिया को 1857 की क्रांति का प्रमुख केंद्र माना जाता है, जहां मंगल पांडे ने विद्रोह का बिगुल फूंका था, इसलिए इस बयान को जिले की ऐतिहालिक गरिमा पर हमला माना गया।

वीडियो वायरल होते ही बलिया में विरोध के स्वर उभर आए, और विभिन्न संगठनों ने मंत्री के बयान की निंदा की। पूर्व विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी ने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंत्री को बोलने से पहले बलिया के इतिहास की जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बलिया देश के उन पहले जिलों में से एक था, जहां ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त हुई थी, और ऐसे अपमानजनक भाषण से जिले की साख को ठेस पहुंची है। चौधरी ने मंत्री के बयान को निंदनीय करार दिया तथा कहा कि एक मंत्री द्वारा ऐसी भाषा का प्रयोग अस्वीकार्य है। इसी तरह स्थानीय राजपूत संगठनों ने भी बयान को अपमानजनक बताया तथा विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई। विवाद के एक दिन बाद सोमवार को कांग्रेस के जिला अध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने बलिया शहर में मंत्री का पुतला दहन कराया तथा कहा कि 72 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से मजबूर होकर शिकायत दर्ज कराई जा रही है।

मंगलवार को विवाद और भड़क गया जब करणी सेना के बलिया जिला अध्यक्ष कमलेश सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में मंत्री के बयान की कड़ी निंदा की। सिंह ने कहा कि मंत्री का यह बयान उनकी विकृत मानसिकता को दर्शाता है, क्योंकि बलिया मंगल पांडे की धरती है जहां क्रांति का बिगुल फूंका गया था। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद बलिया को बेचने का काम करते हैं, वे बलिया को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, जो शहीदों की भूमि है। सिंह ने तीखे शब्दों में कहा कि मैं पांच लाख 51 हजार रुपये का इनाम दूंगा उस व्यक्ति को जो संजय निषाद की जीभ काटकर लाए। यह घोषणा हिंसक धमकी के रूप में देखी गई तथा स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया। करणी सेना, जो राजपूत समुदाय से जुड़ा संगठन है, ने बयान को जिले की ऐतिहालिक गरिमा पर सीधा प्रहार माना तथा मांग की कि मंत्री पर तुरंत कार्रवाई हो। सिंह ने कहा कि बलिया विद्रोहियों की धरती है तथा ऐसी टिप्पणियां असहनीय हैं।

कांग्रेस ने विवाद को राजनीतिक रंग देते हुए बांसडीह कोतवाली में मंगलवार को औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। जिला अध्यक्ष उमाशंकर पाठक ने थाने पहुंचकर कहा कि मंत्री का बयान न केवल अपमानजनक है बल्कि भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करता है, जिसमें धारा 196 के तहत सार्वजनिक शांति भंग करने तथा धारा 351 के तहत आपराधिक धमकी शामिल है। उन्होंने मांग की कि प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की जाए तथा मंत्री को बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। पाठक ने कहा कि पुतला दहन के बाद भी कोई प्रतिक्रिया न आने से शिकायत दर्ज करानी पड़ी, और यदि कार्रवाई न हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। कांग्रेस ने इस मुद्दे को राज्य स्तर पर उठाने का फैसला लिया तथा कहा कि यह बयान निषाद समुदाय की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। बांसडीह थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया।

विवाद के बीच संजय निषाद या निषाद पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। मंत्री सोमवार को बलिया में ही थे तथा स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे थे, लेकिन विवाद पर चुप्पी साधे रहे। निषाद पार्टी, जो भाजपा के सहयोगी दल के रूप में कार्य करती है, ने पार्टी स्तर पर कोई बयान जारी नहीं किया। सूत्रों के अनुसार, मंत्री का बयान स्थानीय विकास पर केंद्रित था, जहां उन्होंने दलाली के सिस्टम को पिछड़ापन का कारण बताया, लेकिन ऐतिहालिक संदर्भ ने इसे संवेदनशील बना दिया। बलिया जिला पूर्वांचल का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र है, जहां 1857 की क्रांति के अलावा कई स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाएं हुईं। मंगल पांडे को यहां का वीर माना जाता है, और जिले में उनकी स्मृति में कई स्मारक हैं। विवाद ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया, जहां विपक्षी दल भाजपा सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

बलिया के जिला प्रशासन ने विवाद को शांतिपूर्ण रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया तथा सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि शिकायत पर जांच की जा रही है तथा यदि आवश्यक हुआ तो प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। करणी सेना की इनाम घोषणा को हिंसक बताते हुए प्रशासन ने संगठन को चेतावनी जारी की तथा कहा कि ऐसी धमकियां कानून का उल्लंघन हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने राजनीतिक दलों से अपील की कि विवाद को सड़क पर न ले जाया जाए तथा संवाद के माध्यम से हल किया जाए। विवाद के दौरान बांसडीह क्षेत्र में कुछ जगहों पर तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन कोई हिंसक घटना नहीं हुई। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कहा कि मंत्री का बयान गलत संदर्भ में लिया गया, लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिक हथियार बनाया।

यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातिगत और क्षेत्रीय संवेदनाओं को उजागर करता है, जहां बलिया जैसे जिलों में ऐतिहालिक गौरव को लेकर संवेदनशीलता अधिक है। निषाद पार्टी, जो निषाद समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है, ने हाल के वर्षों में अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन ऐसे बयान पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकते हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने संयुक्त रूप से मुद्दे को उठाया तथा कहा कि यह भाजपा सरकार की मंत्रीमंडल की मानसिकता को दर्शाता है। विवाद के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर वार्ता की संभावना जताई जा रही है, लेकिन करणी सेना की धमकी ने स्थिति को और जटिल बना दिया। पुलिस ने करणी सेना के अध्यक्ष कमलेश सिंह को पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला लिया तथा उनकी इनाम घोषणा की जांच शुरू की।

बलिया जिले में ऐतिहालिक रूप से क्रांतिकारी आंदोलनों का केंद्र रहा है, जहां 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई गई। मंत्री का बयान इसी संदर्भ में विवादास्पद साबित हुआ, क्योंकि दलाली का जिक्र ब्रिटिश सहयोगियों को इंगित करता प्रतीत होता है। कांग्रेस की शिकायत में मंत्री पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने तथा सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाया गया। थाने में दर्ज शिकायत की कॉपी जिला कांग्रेस मुख्यालय में रखी गई तथा इसे राज्य नेतृत्व को भेजा गया। विपक्ष ने मांग की कि मंत्री को बयान वापस लेना चाहिए तथा माफी मांगनी चाहिए। विवाद के दौरान बलिया शहर में कुछ पोस्टर लगाए गए, जिनमें मंत्री के बयान की निंदा की गई। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की निगरानी बढ़ा दी तथा भड़काऊ पोस्ट्स हटाने के निर्देश दिए।

Also Read- अखिलेश यादव ने BJP-SIR पर साधा निशाना, बोले 'शादियों के मौसम में तारीखें तय कर लोगों को घर से भगाया, वोट कटवाने का षड्यंत्र'।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।