Ballia : जेएनसीयू में दीनदयाल उपाध्याय की स्मृति में गोष्ठी का आयोजन
कहा कि राष्ट्र कोई भूमि का टुकड़ा नहीं होता बल्कि प्रत्येक राष्ट्र की एक चिति होती है जो उसकी संस्कृति से अनुप्राणित होती है और उसे ही राष्ट्र की आत्मा कहा जा सकता है। दीनदयाल जी
बलिया l जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के स्मृति दिवस पर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किये गये। इस अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के तत्वावधान में दीनदयाल का व्यक्तित्व और विचार विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त, गोरखपुर विश्वविद्यालय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक दृष्टि- एकात्म मानववाद एवं राष्ट्रवाद पर चर्चा की। कहा कि दीनदयाल जी का दर्शन भारतीय परंपरा से प्राप्त औपनिषदिक दर्शन एवं अद्वैत दर्शन से अनुप्राणित था।
कहा कि राष्ट्र कोई भूमि का टुकड़ा नहीं होता बल्कि प्रत्येक राष्ट्र की एक चिति होती है जो उसकी संस्कृति से अनुप्राणित होती है और उसे ही राष्ट्र की आत्मा कहा जा सकता है। दीनदयाल जी का दर्शन व्यष्टि, समेष्टि, सृष्टि और परमेष्टि की यात्रा है, जो व्यक्ति को एकात्मता का अनुभव कराता है। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के युगानुकूल एवं समयानुकूल विचार की चर्चा की। कहा कि भारत का विकास भारतीय चिंतन परंपरा पर आधारित होना चाहिए, विदेशी विचारों से देश का भला नहीं हो सकता।
कहा कि अर्थ का अभाव और प्रभाव दोनों मनुष्य को पथच्युत करते हैं। दीनदयाल जी आर्थिक लोकतंत्र की बात करते हैं, जिसमें हर- एक हाथ को काम का विचार दिया गया है। विषय प्रवर्तन डॉ. राम सरन यादव एवं स्वागत उद्बोधन प्रो. बब्बन राम, निदेशक शोधपीठ ने किया। संचालन सौम्या मिश्रा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक मिश्र ने किया। इस अवसर पर डॉ. अनुराधा राय, प्रो. अशोक सिंह, डॉ. पुष्पा मिश्रा, डॉ. अजय चौबे, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. विनीत सिंह, परिसर तथा महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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