अफजल खान ने 63 पत्नियों को कुएं में डुबोकर मारा, शिवाजी से युद्ध से पहले की क्रूर घटना।

बीजापुर के इतिहास में एक क्रूर घटना दर्ज है जहां आदिलशाही सल्तनत के सेनापति अफजल खान ने अपनी 63 पत्नियों को कुएं में डुबोकर मार

By INA News Desk
Feb 11, 2026 - 13:12
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अफजल खान ने 63 पत्नियों को कुएं में डुबोकर मारा, शिवाजी से युद्ध से पहले की क्रूर घटना।
अफजल खान ने 63 पत्नियों को कुएं में डुबोकर मारा, शिवाजी से युद्ध से पहले की क्रूर घटना।
  • बीजापुर के सेनापति अफजल खान की 63 बीवियों की हत्या, 'साठ कब्र' आज भी गवाह
  • ज्योतिष भविष्यवाणी से डरकर अफजल खान ने पत्नियों को डुबोया, खुद को मिली वाघनख से मौत

By Sukhmaal Jain(Senior Journalist and Social Activist)

बीजापुर के इतिहास में एक क्रूर घटना दर्ज है जहां आदिलशाही सल्तनत के सेनापति अफजल खान ने अपनी 63 पत्नियों को कुएं में डुबोकर मार डाला। यह घटना 1659 में छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ युद्ध से पहले हुई। अफजल खान की मौत भी खौफनाक रही जब शिवाजी महाराज ने उन्हें वाघनख से मार डाला। अफजल खान आदिलशाही सल्तनत के प्रमुख सेनापति थे। उन्होंने 1659 में बीजापुर के सुल्तान अली आदिल शाह द्वितीय के आदेश पर छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ युद्ध किया। युद्ध से पहले अफजल खान ने ज्योतिषियों से भविष्यवाणी करवाई जिसमें कहा गया कि वे इस युद्ध में जीवित नहीं बचेंगे। इस भविष्यवाणी से प्रभावित होकर अफजल खान ने अपनी 63 पत्नियों को मारने का फैसला किया। कारण यह था कि युद्ध में उनकी मौत होने पर पत्नियां किसी अन्य पुरुष के हाथ न लगें।

अफजल खान ने अपनी पत्नियों को एक-एक करके कुएं में धकेलकर डुबो दिया। यह घटना बीजापुर के पास अफजलपुरा इलाके में हुई। पत्नियों को मारने के बाद उनके शवों को बाहर निकाला गया और वहां 63 कब्रें बनाई गईं। इस जगह को 'साठ कब्र' या 'सात कब्र' के नाम से जाना जाता है। एक कब्र खाली बताई जाती है क्योंकि एक महिला भाग गई थी लेकिन बाद में पकड़ ली गई। अफजल खान ने खुद के लिए भी एक कब्र बनवा रखी थी।

घटना 1659 में हुई। अफजल खान ने शिवाजी महाराज के खिलाफ युद्ध से पहले यह कदम उठाया। स्थान बीजापुर के पास अफजलपुरा था। कब्रें 'साठ कब्र' के नाम से प्रसिद्ध हैं। अफजल खान की मौत 10 नवंबर 1659 को प्रतापगढ़ की लड़ाई में हुई। शिवाजी महाराज ने मुलाकात के दौरान वाघनख का इस्तेमाल कर अफजल खान को मार डाला। अफजल खान ने मुलाकात में धोखे से हमला करने की कोशिश की लेकिन शिवाजी महाराज तैयार थे। वाघनख से पेट चीरकर अफजल खान की मौत हो गई। यह घटना इतिहास में अफजल खान की क्रूरता के रूप में दर्ज है। 'साठ कब्र' आज भी बीजापुर में मौजूद है और पर्यटकों के लिए एक स्थल है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ज्योतिष भविष्यवाणी मुख्य कारण थी। अफजल खान ने पत्नियों को डुबोकर मारने का तरीका चुना ताकि वे किसी अन्य के पास न जाएं।

अफजल खान की मौत 10 नवंबर 1659 को प्रतापगढ़ में हुई। शिवाजी महाराज ने वाघनख से हमला किया। अफजल खान ने धोखे से वार किया लेकिन असफल रहे। मौत खौफनाक रही। अफजल खान आदिलशाही सल्तनत में महत्वपूर्ण सेनापति थे। उन्होंने कई युद्ध लड़े। शिवाजी महाराज के खिलाफ अभियान उनके जीवन का अंतिम था। पत्नियों की हत्या की घटना उनकी क्रूरता का प्रमाण मानी जाती है। कब्रें आज भी उस घटना की याद दिलाती हैं। 'साठ कब्र' बीजापुर में स्थित है। 63 कब्रें अफजल खान की पत्नियों की बताई जाती हैं। एक कब्र अफजल खान की खुद की है। स्थानीय लोग इसे क्रूरता की गवाही मानते हैं।

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