भारत ने रद्द की 31,500 करोड़ की बोइंग डील- अमेरिकी टैरिफ के जवाब में बड़ा कदम।

भारत ने अमेरिका की बोइंग कंपनी के साथ 31,500 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण रक्षा सौदे को रद्द कर दिया है। यह सौदा भारतीय नौसेना के लिए छह P-8I ...

Aug 8, 2025 - 15:24
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भारत ने रद्द की 31,500 करोड़ की बोइंग डील- अमेरिकी टैरिफ के जवाब में बड़ा कदम।
भारत ने रद्द की 31,500 करोड़ की बोइंग डील- अमेरिकी टैरिफ के जवाब में बड़ा कदम।

भारत ने अमेरिका की बोइंग कंपनी के साथ 31,500 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण रक्षा सौदे को रद्द कर दिया है। यह सौदा भारतीय नौसेना के लिए छह P-8I पोसेडन समुद्री निगरानी विमानों की खरीद से संबंधित था। यह फैसला 3 अगस्त 2025 को लिया गया, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के रूसी तेल आयात पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा के जवाब में आया। ट्रंप ने 6 अगस्त 2025 को एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से भारत के सामानों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लागू किया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। भारत ने इस कदम को "अनुचित और अन्यायपूर्ण" बताया और जवाबी कार्रवाई के रूप में इस सौदे को रद्द करने का निर्णय लिया। यह घटना भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ते तनाव को दर्शाती है, खासकर रूस के साथ भारत के ऊर्जा और रक्षा संबंधों को लेकर।

P-8I पोसेडन विमान अत्याधुनिक समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान हैं, जो भारतीय नौसेना के लिए अरब सागर और हिंद महासागर में निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये विमान खास तौर पर चीन की नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। इन विमानों में NASM-MR एंटी-शिप मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 350 किलोमीटर है। भारतीय नौसेना के पास पहले से ही 12 ऐसे विमान हैं, जो 2009 और 2016 में खरीदे गए थे।

2009 में भारत ने बोइंग से आठ P-8I विमान खरीदे थे, जिसकी लागत उस समय करीब 19,000 करोड़ रुपये थी। भारत इस विमान को खरीदने वाला पहला गैर-अमेरिकी देश बना। 2016 में चार और विमान खरीदे गए, जिनकी लागत 8,500 करोड़ रुपये थी। भारतीय नौसेना ने इन विमानों की कार्यक्षमता की काफी सराहना की थी। 2021 में छह और विमानों की खरीद के लिए अमेरिका से मंजूरी मिली थी, जिसकी अनुमानित लागत 21,000 करोड़ रुपये थी। हालांकि, लागत बढ़कर 31,500 करोड़ रुपये (लगभग 3.78 बिलियन डॉलर) हो गई, जिसके कारण सौदा पहले ही टल चुका था। जुलाई 2025 तक भारत इस सौदे को अंतिम रूप देने के करीब था, लेकिन अमेरिकी टैरिफ की घोषणा के बाद इसे रद्द कर दिया गया।

  • अमेरिकी टैरिफ और भारत की प्रतिक्रिया

6 अगस्त 2025 को डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूसी तेल आयात को लेकर एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसमें भारत के सामानों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। यह टैरिफ पहले से लागू 25% टैरिफ के अतिरिक्त था, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर भारत पर आरोप लगाया कि वह रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा, "भारत रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, और उसे यूक्रेन में रूस के युद्ध को रोकने की परवाह नहीं है।"

भारत ने इस टैरिफ को "अनुचित, अन्यायपूर्ण और अनुचित" बताया। विदेश मंत्रालय ने 4 अगस्त 2025 को एक बयान में कहा कि भारत का रूसी तेल आयात वैश्विक बाजार की स्थिति और 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत के कारण है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने ही भारत को सस्ता रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था, ताकि वैश्विक तेल की कीमतें स्थिर रहें। भारत ने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका और यूरोपीय संघ खुद रूस से यूरेनियम, पैलेडियम, और उर्वरक जैसे उत्पाद आयात कर रहे हैं। 2024 में यूरोपीय संघ ने रूस से 67.5 बिलियन यूरो का तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदा।

  • बोइंग डील रद्द करने का निर्णय

3 अगस्त 2025 को भारत ने बोइंग के साथ P-8I विमान सौदे को रद्द करने का फैसला लिया। यह सौदा भारतीय नौसेना के पूर्वी कमांड के लिए था और इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा था। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय अमेरिकी टैरिफ के जवाब में लिया गया। एक रक्षा वेबसाइट IDRW की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस सौदे को रद्द करके अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश और व्यापार नीति पर अडिग है।

हालांकि, कुछ सूत्रों ने बताया कि सौदे को रद्द करने का निर्णय लागत में वृद्धि के कारण भी हो सकता है। 2021 में सौदे की लागत 21,000 करोड़ रुपये थी, जो 2025 तक बढ़कर 31,500 करोड़ रुपये हो गई। भारतीय नौसेना ने इस विमान की कार्यक्षमता की सराहना की थी, लेकिन बढ़ती लागत और अब अमेरिकी टैरिफ के कारण यह सौदा रद्द कर दिया गया।

  • भारत-अमेरिका संबंधों पर प्रभाव

यह घटना भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक और भू-राजनीतिक तनाव को दर्शाती है। दोनों देशों ने 2030 तक 500 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा था, लेकिन ट्रंप के टैरिफ और भारत की जवाबी कार्रवाई ने इस लक्ष्य को मुश्किल बना दिया है। ट्रंप ने भारत को "खराब व्यापारिक साझेदार" करार दिया और कहा कि भारत अमेरिका के साथ व्यापार करता है, लेकिन अमेरिका भारत के साथ उतना व्यापार नहीं करता।

भारत ने इस टैरिफ को एकतरफा और अनुचित बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा, "भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।" इस सौदे के रद्द होने से बोइंग को बड़ा नुकसान हो सकता है, क्योंकि कंपनी भारत में करीब 5,000 कर्मचारियों को रोजगार देती है और भारतीय अर्थव्यवस्था में 15,000 करोड़ रुपये का योगदान देती है।

  • रूस के साथ भारत के संबंध

भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है। रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जो भारत की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 35% हिस्सा प्रदान करता है। 2023 में भारत ने रूस से 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो युद्ध से पहले 2.5% से बढ़कर 39% हो गया। भारत ने इस आयात को वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने और अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी बताया है।

रक्षा के क्षेत्र में भी रूस भारत का प्रमुख साझेदार है। 2020-2024 के बीच भारत रूस के हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार रहा, जो रूसी हथियार निर्यात का 38% हिस्सा था। भारत ने S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली और अन्य हथियार रूस से खरीदे हैं, और अब Su-57 लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है।

इस घटना ने भारत में व्यापक चर्चा शुरू कर दी है। सोशल मीडिया मंच X पर कई लोगों ने भारत के इस कदम की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, "भारत ने सही समय पर सही जवाब दिया। हमें अपनी स्वतंत्र नीति पर अडिग रहना चाहिए।" हालांकि, कुछ लोगों ने चिंता जताई कि यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों को और खराब कर सकता है। एक अन्य यूजर ने लिखा, "ट्रंप की नीति अमेरिका की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा रही है, लेकिन भारत को भी सावधानी से कदम उठाने चाहिए।"

विपक्षी नेता जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच की तथाकथित दोस्ती का कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने ट्रंप के बार-बार यह दावा करने पर भी सवाल उठाया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम किया। भारत द्वारा 31,500 करोड़ रुपये की बोइंग डील को रद्द करना अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ एक मजबूत जवाब है।

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