Sambhal: 'गरिमा के साथ बुढ़ापा' का संदेश: सम्भल में बुजुर्गों की देखभाल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन।
सम्भल में बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन और उनकी बेहतर देखभाल को लेकर एक अहम दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन और उनकी बेहतर देखभाल को लेकर एक अहम दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें “गरिमा और देखभाल के लिए शिक्षा” विषय पर गहन चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में वरिष्ठ नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना रहा।
मुख्य अतिथि तान्या सेन गुप्ता, रिसर्च ऑफिसर, राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान ने कहा कि बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन देना हमारे अपने हाथ में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। उनका मानना है कि शुरुआत परिवार से होनी चाहिए, जिससे यह संदेश पूरे समाज में फैल सके। उन्होंने यह भी बताया कि सम्मेलन के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें प्रस्तुत शोध पत्रों और निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी। यह पहल देशभर में लगातार चलाई जा रही है क्योंकि तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी और घटती सक्रिय जनसंख्या के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
वहीं, नेहा ठाकुर ने कहा कि आज के समय में कई बुजुर्गों को अकेला छोड़ दिया जाता है या वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को स्कूल स्तर से ही बुजुर्गों के सम्मान और देखभाल की शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी को कम किया जा सके। सम्मेलन में सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी, शिक्षाविद और शोधार्थी शामिल हुए, जिन्होंने बुजुर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बुजुर्गों को “एजिंग इन प्लेस” यानी अपने ही घर में, अपने परिवार के बीच सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। इस आयोजन ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि बुजुर्गों की सेवा और सम्मान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का कर्तव्य है। अगर समाज का हर वर्ग अपनी भूमिका निभाए, तो वरिष्ठ नागरिकों का जीवन अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल बन सकता है।
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