गोरखपुर में छलका कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का दर्द: मंच पर संबोधन के दौरान फूट-फूट कर रोए निषाद पार्टी प्रमुख

भाषण के दौरान जब संजय निषाद ने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र किया, तो वहां मौजूद भीड़ ने 'संजय निषाद संघर्ष करो' के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि आज जब वह मंत्री पद पर हैं, तब भी उनका प्राथमिक लक्ष्य केवल सत्ता का सुख भोगना नहीं, बल्कि उस अंतिम व्यक्ति त

Mar 23, 2026 - 12:01
 0  12
गोरखपुर में छलका कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का दर्द: मंच पर संबोधन के दौरान फूट-फूट कर रोए निषाद पार्टी प्रमुख
गोरखपुर में छलका कैबिनेट मंत्री संजय निषाद का दर्द: मंच पर संबोधन के दौरान फूट-फूट कर रोए निषाद पार्टी प्रमुख

  • वोट बैंक की राजनीति और अधिकारों के हनन पर बरसे डॉ. संजय निषाद; समाज से एकजुट होने की भावुक अपील
  • बच्चों के भविष्य और पूर्ववर्ती सरकारों के अन्यायों का जिक्र करते हुए भरा गला, कहा- अब सहने का वक्त खत्म हुआ

गोरखपुर के चंपा देवी पार्क मैदान में आयोजित इस विशाल जनसभा का उद्देश्य निषाद समाज को जागरूक करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करना था। जैसे ही डॉ. संजय निषाद ने माइक संभाला और अपनी बात रखनी शुरू की, उनके शब्दों में आक्रामकता के साथ-साथ एक गहरा दुख भी झलक रहा था। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत समाज के गौरवशाली इतिहास से की, लेकिन जैसे ही वह वर्तमान परिस्थितियों और पिछली सरकारों के कार्यकाल पर आए, उनका स्वर भारी होने लगा। उन्होंने सीधे तौर पर पिछली सरकारों को दोषी ठहराते हुए कहा कि निषाद समाज को केवल चुनाव के समय इस्तेमाल किया गया और सत्ता मिलते ही उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया।

मंत्री संजय निषाद ने अपने संबोधन में उन काली यादों को ताजा किया जब निषाद समाज के युवाओं और महिलाओं को प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने कहा कि दशकों तक हमारे समाज की बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ किया गया और हमारे पास केवल आंसू बहाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। यह कहते हुए उनका गला भर आया और वह कुछ पलों के लिए मौन हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यवस्था ने जानबूझकर निषाद समाज के बच्चों को शिक्षा और अवसरों से वंचित रखा ताकि वे कभी अपनी आवाज बुलंद न कर सकें। इस दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद लोगों और जनता की तरफ देखते हुए रुंधे गले से कहा कि अब हमें अपनी ताकत को पहचानना होगा।

भावुकता के इस चरम पर संजय निषाद ने समाज के अधिकारों, विशेष रूप से आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि निषाद समाज के हक को छीनकर दूसरों की झोली में डाल दिया गया और जब भी हक की मांग की गई, उसे लाठियों के जोर पर दबा दिया गया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह अपने समाज के लिए लड़ते-लड़ते थकेंगे नहीं, भले ही इसके लिए उन्हें कितनी ही बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट हों और किसी भी बाहरी बहकावे में न आएं। उनका रोना केवल व्यक्तिगत दुख नहीं था, बल्कि वह उस सामूहिक पीड़ा का प्रकटीकरण था जिसे निषाद समाज ने पीढ़ियों से सहा है। डॉ. संजय निषाद की राजनीति का मुख्य आधार निषाद (मछुआ) समुदाय को अनुसूचित जाति का आरक्षण दिलाना रहा है। वह अक्सर कसार, निषाद, बिंद और केवट जैसे समुदायों के अधिकारों की वकालत करते नजर आते हैं। गोरखपुर में हुई यह भावुक घटना उनकी उस छवि को और मजबूत करती है जो उन्हें एक जननेता और समाज के संरक्षक के रूप में पेश करती है। इस घटना के बाद उनके समर्थकों में एक नई ऊर्जा और सहानुभूति की लहर देखी जा रही है।

भाषण के दौरान जब संजय निषाद ने अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र किया, तो वहां मौजूद भीड़ ने 'संजय निषाद संघर्ष करो' के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि आज जब वह मंत्री पद पर हैं, तब भी उनका प्राथमिक लक्ष्य केवल सत्ता का सुख भोगना नहीं, बल्कि उस अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाना है जो आज भी हाशिए पर खड़ा है। उन्होंने पिछली सरकारों के समय हुए दंगों और पुलिसिया कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि निषाद समाज के खून से कई बार धरती लाल हुई है। यह सब बताते हुए वह अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और मंच पर ही रुमाल से आंखें पोंछते नजर आए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय निषाद का यह भावुक रूप चुनाव से पहले समाज को लामबंद करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। जब कोई बड़ा नेता सार्वजनिक रूप से अपनी भावनाएं व्यक्त करता है, तो उसका सीधा जुड़ाव आम जनता के दिल से होता है। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि निषाद समाज अब किसी का पिछलग्गू बनकर नहीं रहेगा, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत के दम पर अपनी शर्तें तय करेगा। उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि यदि समाज एकजुट रहा, तो दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें उनके अधिकारों से वंचित नहीं रख सकती।

कैबिनेट मंत्री ने शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि रोने से कुछ नहीं होगा, हमें लड़ना होगा और अपने बच्चों को पढ़ाना होगा। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि वह लगातार कोशिश कर रहे हैं कि निषाद समाज के कल्याण के लिए अधिक से अधिक नीतियां बनाई जाएं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रास्ता कठिन है और सिस्टम के भीतर कई ऐसी बाधाएं हैं जो दलितों और पिछड़ों को आगे बढ़ने से रोकती हैं। उनके इस भाषण ने वहां मौजूद युवाओं में जोश भर दिया और कई लोगों की आंखों में भी आंसू देखे गए।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow