Delhi Blast : जो भी जिम्मेदार हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.. दिल्ली ब्लास्ट पर भूटान में पीएम मोदी की दो टूक
सूत्रों के अनुसार कल केंद्रीय मंत्रिमंडल की शीर्ष समिति, Cabinet Committee on Security (सीसीएस) की बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस धमाके को आतंकी हमला
दिल्ली कार धमाके पर भारत का अगला कदम: संकट मोचन या कड़ी कार्रवाई?
नई दिल्ली : राजधानी के ऐतिहासिक स्थल लाल किला के पास सोमवार शाम हुई कार धमाके की घटना ने न सिर्फ राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी तय कर दिया है कि अगर यह वाकई एक आतंकी हमला है, तो भारत का अगला कदम क्या होगा। इस धमाके में कम-से-कम आठ लोगों की मृत्यु हुई और लगभग बीस घायल बताए जा रहे हैं।
इस घटना के बाद नरेन्द्र मोदी ने भूटान प्रवास के दौरान कहा कि “जो भी जिम्मेदार हैं उन्हें बख्शा नहीं जाएगा” और जांच एजेंसियों को मामले की जड़ तक पहुँचने का निर्देश दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जांच की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी संभावनाओं पर नजर रखी जा रही है और बड़े सुरक्षा-समीक्षा समूह को सक्रिय कर दिया गया है।
क्या होगा भारत का अगला कदम?
अगर इस मामले को आतंकी हमला माना गया है, तो भारत की ओर से निम्नलिखित चार प्रमुख पहल की संभावना है:
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राष्ट्रीय सुरक्षा-क्रिया तेज करना – मामला जबरलह तौर पर आतंकवाद का माना जा रहा है, तो इसे जांच एवं कार्रवाई के लिए विशेष कानूनों जैसे Unlawful Activities (Prevention) Act (यूएपीए) के तहत दर्ज कर लिया गया है। इसके अंतर्गत केंद्रीय एजेंसियाँ जैसे National Investigation Agency (एनआईए), National Security Guard (एनएसजी) और फोरेंसिक और खुफिया टीमों को सक्रिय किया जा रहा है।
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संबंधित बड़े नेटवर्क का खुलासा एवं कार्रवाई – सिर्फ उस कार ऑपरेशन पर नहीं बल्कि उसके पीछे रहने वाले नेटवर्क, वित्त-आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स, और प्रशिक्षण की जाँच होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि घटना में शामिल वाहन, विस्फोटक सामग्री और समय-स्थान से यह संकेत मिलता है कि यह स्थानीय स्तर की घटना नहीं थी।
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विदेश एवं सीमा पार संबंधों की कड़ी समीक्षा – भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में इस तरह की घटनाओं को अक्सर सीमा पार वाले आतंकी नेटवर्क से जोड़कर देखा जाता रहा है। यदि यह हमला आतंकी तत्वों द्वारा प्रेरित या समर्थित पाया जाता है, तो मान्य है कि विदेश नीति एवं दूतावास संवाद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, व सीमा सुरक्षा को और सख्त करने की दिशा होगी।
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सार्वजनिक सुरक्षा बढ़ाना एवं अलर्ट जारी करना – राजधानी व सीमावर्ती राज्यों में हलचल बढ़ाई गई है। बड़ी-भीड़वाली जगहों, मेट्रो स्टेशनों, ऐतिहासिक स्थलों पर सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं। नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों व वस्तुओं की निगरानी बढ़ा दी गई है।
कल होने वाली संदर्भित बैठक
सूत्रों के अनुसार कल केंद्रीय मंत्रिमंडल की शीर्ष समिति, Cabinet Committee on Security (सीसीएस) की बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस धमाके को आतंकी हमला मानने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस बैठक में सुरक्षा बलों के प्रमुख, गृह मंत्रालय, खुफिया एजेंसियाँ और विदेश मंत्रालय शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने यह बैठक की घोषणा की है और कहा है कि जांच पूर्ण निष्पक्ष व त्वरित होनी चाहिए।
चुनौतियाँ और आगे की दिशा
इस कदम की दिशा में कई चुनौतियाँ हैं-
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प्रथम यह कि अभी तक जांच में प्रमाण जुटाना बाकी है कि यह हमला किसने किया, किसने समर्थन दिया और इसके नेटवर्क की सीमा क्या थी। एजेंसियों ने कहा है कि विश्लेषण जारी है और अभी कुछ भी अंतिम रूप नहीं दिया जा सकता।
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दूसरा, इस तरह के हमलों में समय-स्थान-लॉजिस्टिक्स का दस्तावेजी अनुक्रम जुटाना कठिन होता है। कार के रूट, उसमें रखे विस्फोटक, संदिग्धों की सफर-हीतिहास इत्यादि का पता लगाना पड़ता है। इस मामले में कार को कई राज्यों से आते-जाते देखा गया, जो जटिलता बढ़ाता है।
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तीसरा, अगर इसे आतंकी हमला माना जाता है तो इसके विदेश संबंधी निहितार्थ होंगे यह भारत-पाकिस्तान तथा भारत के अन्य पड़ोसी देश-संबंधों में तनाव का नया स्रोत बन सकता है। सरकार को इस मामले में प्रमाण-आधारित कार्रवाई करना होगी ताकि भारत-अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संतुलन बना रहे।
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चौथा, नागरिक स्तर पर सुरक्षा-जागरूकता बढ़ाना ज़रूरी है। इस तरह की घटना ने यह दिखाया है कि राजधानी में भी बड़े आतंकी हमले को रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों तक सीमित नहीं बल्कि आम नागरिकों, इलाके के रिहायशी तथा स्थानीय प्रशासन तक फैली हुई है।
अगर यह वाकई आतंकी हमला है तो भारत का अगला कदम त्वरित, निर्णायक और व्यापक होगा। यह सिर्फ ‘एक धमाका’ नहीं रहेगा बल्कि एक संदेश होगा कि भारत अपनी राजधानी में इस तरह के हमले बर्दाश्त नहीं करेगा; दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा; और सुरक्षा व्यवस्था, खुफिया नेटवर्क तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत बनाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के शब्द कि “जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा” इसे स्पष्ट करते हैं।
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