Delhi Blast : दिल्ली कार धमाके से सामने आया ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ : व्हाइट कॉलर आतंक में फंसे छह प्रमुख नाम
जांच के दौरान ये तथ्य भी सामने आए हैं कि इस नेटवर्क ने तीन-जिला (कश्मीर, हरियाणा-फरीदाबाद, उत्तर-प्रदेश) में सक्रिय रूप से काम किया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, हॉ
नई दिल्ली : राजधानी के लाल किला के पास हुई कार धमाके की जांच अब एक नए अर्थ में सामने आ रही है। इस मामले में अब तक ऐसी जानकारी मिली है कि पढ़े-लिखे डॉक्टर, मेडिकल-प्रोफेशनल्स और विश्वविद्यालय से जुड़े लोग एक बड़े आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा थे जिसे सुरक्षा एजेंसियाँ ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ कह रही हैं। इस नेटवर्क के अंतर्गत कम-से-कम छह प्रमुख किरदार सामने आए हैं, जिनमें डॉक्टरों का नेटवर्क सक्रिय पाया गया है।
इस धमाके में मुख्य भूमिका निभाने वालों के नाम इस प्रकार सामने आए हैं :
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डॉ. मुज़म्मिल गनाई पुलवामा का रहने वाला, Faridabad में विश्वविद्यालय-अस्पताल से जुड़ा। पुलिस ने उसके ठिकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक एवं गोला-बारूद बरामद किया।
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डॉ. अदील अहमद रदर कश्मीर-के उधारे संपर्क से जुड़ा और Faridabad में उसी मॉड्यूल में शामिल।
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डॉ. शाहीन सईद (या शाहीन शाहिद) लखनऊ की रहने वाली, Al-Falah विश्वविद्यालय से जुड़ी हुई। इस पर आरोप है कि उसने जैश‑ए‑मोहम्मद की महिला शाखा बनाने का काम किया।
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डॉ. उमर मोहम्मद कश्मीर-मूल का डॉक्टर, जिसे वाहन धमाके से सीधे जोड़ा जा रहा है।
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डॉ. अहमद मोइयुद्दीन सैयद हैदराबाद-मूल का डॉक्टर, सोशल-मीडिया व टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से अतिवादियों से जुड़ा पाया गया।
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एक अन्य व्यक्ति जिसे अभी सार्वजनिक रूप से नाम नहीं मिला है, लेकिन जांच में उसकी भागीदारी पुख्ता हो रही है इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य सह-सदस्य, जिनमें सैन्य व आतंक-सहायता-संपर्क शामिल हैं।
जांच के दौरान ये तथ्य भी सामने आए हैं कि इस नेटवर्क ने तीन-जिला (कश्मीर, हरियाणा-फरीदाबाद, उत्तर-प्रदेश) में सक्रिय रूप से काम किया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, हॉस्पिटल्स व छात्रों के माध्यम से कट्टरपंथी विचारों को फैलाया और साथ ही वाहन, विस्फोटक सामग्री व संचार नेटवर्क तैयार किया।
इस सबका सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ये डॉक्टर सामान्य पेशेवर जीवन जीते थे अस्पतालों में काम करते, चिकित्सा शिक्षा देते या मेडिकल कॉलेज से जुड़े थे। इस वजह से इन्हें ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ कहा जा रहा है यानी पढ़े-लिखे, समाज में प्रतिष्ठित लोग आतंक-साजिश में शामिल।
धमाके की पृष्ठभूमि यह रही कि 10 नवंबर 2025 को लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक सफेद Hyundai i20 कार में विस्फोट हुआ। इसके तुरंत बाद जांच एजेंसियों ने इस धमाके को सिर्फ हादसा नहीं माना बल्कि आतंक-संगठन की कार्यवाही माना, और इस दिशा में छानबीन शुरू की।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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धमाके के लक्षण : विस्फोटक सामग्री, कार का पैटर्न, विस्फोट से पहले की गतिविधियाँ – इनसे पता चलता है कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं थी।
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अस्पताल-विश्वविद्यालयों से जुड़े लोगों का नाम सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाया।
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भारतीय जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मॉड्यूल भारत में छोटे-ठहाके स्तर से आगे निकलकर बड़े स्तर पर साजिश रच रहा था।
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इन डॉक्टरों ने सामाजिक व शैक्षणिक मंचों का इस्तेमाल किया, स्किल्ड प्रोफेशनल छवि के कारण उन्हें कम शक के बीच में रहना आसान था।
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अब यह स्पष्ट है कि इस तरह की ‘व्हाइट कॉलर’ साजिशें सुरक्षा-कोण से बेहद खतरनाक हैं क्योंकि वे अंदरूनी खामियों का फायदा उठाती हैं।
सरकारी व जांच एजेंसियों के रुख को देखें तो :
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मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के जिम्मे दिया गया है।
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विस्फोटक कानून, आतंकवाद-विरोधी कानून जैसे UAPA (Unlawful Activities (Prevention) Act) के तहत केस दर्ज हुआ है।
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गिरफ्तारी, फोरेंसिक, डिजिटल ट्रेल, बैंक ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया ट्रेस, सभी आयाम पर काम चल रहा है।
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सरकार ने यह कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
हालांकि अभी कुछ सवाल अधूरे हैं :
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पूरी सूची और इस मॉड्यूल में शामिल सभी सदस्य सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
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इस नेटवर्क की बाहरी सीमाओं और वित्त-प्रवाह का पूरा खुलासा होना बाकी है।
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जबकि डॉक्टरों का लिंक पक्का हुआ है, यह अभी स्पष्ट नहीं कि क्या इन्हें सीधे विदेशी आतंकी संगठन ने निर्देश दिए थे या स्वायत्त नेटवर्क था।
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धमाके के तकनीकी पहलुओं उपयोग किए गए विस्फोटक का प्रकार, ट्रिगर मेकेनिज्म व कार के मालिकाना रिकार्ड की पूरी जाँच चल रही है।
इस तरह की घटनाओं ने यह बात उजागर की है कि आतंकी क्रियाएँ अब सिर्फ सीमांत इलाकों में नहीं हो रही बल्कि शहरों के भीतर, पढ़े-लिखे वर्ग में भी सक्रिय हो रही हैं। ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ का मतलब यही है कि उच्च शिक्षा-प्रोफेशन के लोग भी आतंक संभावना में शामिल हो सकते हैं। इस बदलाव ने सुरक्षा-चैनल्स को अधिक चौकन्ना बना दिया है।
आगे की दिशा में क्या होने वाला है :
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इस मॉड्यूल में अभी और गिरफ्तारियाँ अपेक्षित हैं।
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विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों व हॉस्पिटल्स के प्रोफेशनल्स की पृष्ठभूमि और उनकी गतिविधियों की समीक्षा बढ़ाई गई है।
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निजी-शिक्षा-संस्थान, हॉस्टल, छात्र-समूह जिनमें संदिग्ध गतिविधियाँ आई थीं, उन पर गहरी छान-बीन हो रही है।
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बड़े सार्वजनिक स्थलों, मेट्रो स्टेशनों, ऐतिहासिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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डिजिटल व सोशल मीडिया-ट्रेल, फंड फ्लो, सीमा-पार सहयोग आदि की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि नेटवर्क की जड़ें पकड़ी जा सकें।
दिल्ली धमाके ने सिर्फ एक विस्फोट नहीं किया बल्कि यह संकेत दिया है कि आतंकवाद के स्वरूप में बदलाव आ गया है जहाँ अब वाहन बम, पारंपरिक हथियारों की जगह पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स, डॉक्टर, शिक्षा-कर्मी भी शामिल हो रहे हैं। इस प्रकार का मॉड्यूल अधिक खतरनाक है क्योंकि इसे कम-से-कम शुरुआत में पहचानना आसान नहीं होता। सुरक्षा-व्यवस्था, चिकित्सा-संस्थान, शैक्षणिक संस्थानों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा।
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