आजम खान के समर्थकों के काफिले पर बड़ी कार्रवाई, 73 वाहनों पर ट्रैफिक चालान, 1.49 लाख का जुर्माना लगाया, ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने पर हुई कार्रवाई
आजम खान, 77 वर्षीय वरिष्ठ नेता, पिछले 23 महीनों से सीतापुर जेल में बंद थे। उनकी रिहाई की तारीख 23 सितंबर 2025 थी, लेकिन कुछ पुराने मामलों में बकाया जुर्माने
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ समाजवादी पार्टी नेता आजम खान की रिहाई पर उनके समर्थकों ने उत्साह का इजहार तो किया, लेकिन ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। सीतापुर जेल से रिहा होने के बाद आजम खान के काफिले में शामिल 73 वाहनों पर ट्रैफिक पुलिस ने चालान जारी कर दिया। कुल जुर्माना 1,49,000 रुपये वसूला गया। यह कार्रवाई काफिले के दौरान हुई अवैध रैली, तेज गति, गलत लेन और बिना हेलमेट के चलने जैसे उल्लंघनों के लिए की गई। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिनमें समर्थक नारे लगाते और सड़कें जाम करते दिख रहे हैं। आजम खान ने रिहाई के बाद चुप्पी साधे रखी, लेकिन उनके बेटों अब्दुल्ला आजम और अदीब आजम ने कहा कि पिता की सेहत पर ध्यान दिया जाएगा। पुलिस ने धारा 144 लागू होने के बावजूद भीड़ को नियंत्रित करने में कड़ी मशक्कत की। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ी कर रही है।
आजम खान, 77 वर्षीय वरिष्ठ नेता, पिछले 23 महीनों से सीतापुर जेल में बंद थे। उनकी रिहाई की तारीख 23 सितंबर 2025 थी, लेकिन कुछ पुराने मामलों में बकाया जुर्माने के कारण इसमें दो घंटे की देरी हुई। रामपुर कोर्ट में 3,000 और 5,000 रुपये के जुर्माने जमा करने के बाद दोपहर करीब 12:30 बजे उन्हें रिहा किया गया। जेल के बाहर सैकड़ों समर्थक इकट्ठे थे। धारा 144 लागू होने के बावजूद वे नारे लगाते रहे। आजम खान बिना मीडिया से बात किए एक इनोवा कार में सवार हो गए। उनके बेटे अब्दुल्ला और अदीब उनके साथ थे। काफिला सीधा रामपुर की ओर रवाना हुआ, जो सीतापुर से करीब 250 किलोमीटर दूर है। रास्ते में हजारों समर्थक सड़क किनारे खड़े होकर फूल बरसाते रहे। लेकिन उत्साह में ट्रैफिक नियमों का पालन न करने से हंगामा हो गया।
काफिले में दर्जनों गाड़ियां शामिल थीं। समर्थकों ने बैनर लहराए, हॉर्न बजाए और सड़क पर अवैध रैली की तरह चलने लगे। सीतापुर से लखनऊ हाईवे तक ट्रैफिक जाम लग गया। पुलिस ने चेकपोस्ट पर नाकाबंदी की थी, लेकिन काफिला तेज रफ्तार से निकल गया। ट्रैफिक पुलिस ने वाहनों के नंबर नोट किए। शाम तक 73 चालान कट चुके थे। इनमें 50 बाइकें बिना हेलमेट के चलने, 15 कारें गलत लेन तोड़ने और 8 वाहन तेज गति के लिए थे। प्रति चालान औसतन 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। कुल राशि 1,49,000 रुपये हो गई। एक अधिकारी ने बताया कि हमने पहले ही वाहनों की सूची तैयार कर ली थी। कोई छूट नहीं दी गई। समर्थकों ने विरोध किया, लेकिन पुलिस अड़ी रही। वीडियो में एक समर्थक चिल्ला रहा है कि आजम साहब के लिए तो नियम टूटेंगे ही। लेकिन कानून सबके लिए बराबर है।
सोशल मीडिया पर वीडियो रात से वायरल होने लगे। ट्विटर पर #AzamKhanRelease और #TrafficViolation जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। एक यूजर ने लिखा कि खुशी में नियम तोड़ना ठीक नहीं, इससे आम आदमी को परेशानी होती है। दूसरा बोला कि राजनीतिक काफिले हमेशा ट्रैफिक बर्बाद करते हैं। वीडियो देखने वालों की संख्या लाखों में पहुंच गई। कई ने समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाए। कहा कि नेता रिहा होते ही अनुशासन भूल जाते हैं। एक पोस्ट में लिखा गया कि अगर आम नागरिक ऐसा करता तो जेल हो जाती। वायरल वीडियो ने पुलिस की तारीफ भी की। वे बिना हिंसा के कार्रवाई कर रहे थे। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि उत्साह में चूक हुई, लेकिन हम नियमों का सम्मान करते हैं। चालान भर दिए जाएंगे।
आजम खान का राजनीतिक सफर लंबा है। वे समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। रामपुर से कई बार विधायक और सांसद रहे। मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे। लेकिन 2020 से उनके खिलाफ 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए। मुख्य मामले जाली जन्म प्रमाण पत्र, जमीन हड़पने और गुंडागर्दी से जुड़े थे। अक्टूबर 2023 में रामपुर क्वालिटी बार जमीन मामले में सात साल की सजा मिली। उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला को भी सजा हुई, लेकिन वे पहले जमानत पर रिहा हो चुके थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को क्वालिटी बार मामले में जमानत दी। 10 सितंबर को डुंगरपुर कॉलोनी जबरन खाली कराने के मामले में भी। रामपुर कोर्ट ने 19 पुराने मामलों में रिहाई का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि आजम को जेल में रखने की साजिश हो रही है। रिहाई के बाद उन्होंने कहा कि पहले सेहत सुधारेंगे, फिर राजनीति पर फैसला लेंगे।
रामपुर पहुंचने पर स्वागत भव्य था। हजारों समर्थक सड़कों पर उतर आए। लेकिन वहां भी ट्रैफिक बाधित हुआ। रामपुर पहुंचते ही एक डीएसपी से बहस हो गई। आजम ने कहा कि मेरे इलाके में आने दो, लेकिन अधिकारी ने सुरक्षा का हवाला दिया। बाद में बात शांत हो गई। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रिहाई पर खुशी जताई। कहा कि आजम साहब पर सारे झूठे मुकदमे एसपी सरकार बनने पर वापस होंगे। बीजेपी पर निशाना साधा कि वे रामपुर विधायक और एक रिटायर्ड अधिकारी के जरिए अन्याय कर रहे थे। शिवपाल यादव ने कहा कि न्याय हुआ। आजम निर्दोष साबित होंगे। रामपुर में बीजेपी विधायक की हार के बाद आजम का प्रभाव कम हुआ था, लेकिन रिहाई से पार्टी मजबूत होगी। विशेषज्ञ कहते हैं कि पश्चिमी यूपी में लोकसभा चुनाव से पहले यह फायदेमंद साबित होगा।
ट्रैफिक उल्लंघन की घटना उत्तर प्रदेश में आम है। राजनीतिक काफिलों के दौरान अक्सर नियम टूटते हैं। लेकिन इस बार पुलिस ने सख्ती दिखाई। सीतापुर एसएसपी ने कहा कि हमने पहले से तैयारी की थी। चालान ऑनलाइन जारी हो गए। वाहन मालिकों को नोटिस भेजे जाएंगे। अगर न भरा तो वाहन जब्त होंगे। समर्थकों में नाराजगी है। एक ने कहा कि हम खुशी में आए थे, जुर्माना क्यों। लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं। आजम खान के परिवार ने कहा कि पिता थकान महसूस कर रहे हैं। वे घर पर आराम करेंगे। बेटे अब्दुल्ला ने कहा कि आजम साहब का संघर्ष सबके लिए प्रेरणा है। जेल में कोविड भी हो गया था, फिर भी हार न मानी।
Also Click : Sambhal : स्कूटी सवार बदमाशों ने अध्यापिका पर फेंका तेजाब, 25 से 30% झुलसी, दो महीने बाद होनी थी शादी
What's Your Reaction?











